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Bijnor News: हनीट्रैप कर दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज कराने वाला गिरोह गिरफ्तार
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दुष्कर्म के फर्जी मामलों में लोगों को फंसाने वाले गिरोह के सदस्य स्रोत पुलिस
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- तीन महिलाओं समेत पांच आरोपियों को पकड़ा, तीन की तलाश जारी, दस अन्य भी जांच में घिरे
- झूठे केस दर्ज कराकर वसूली करता था यह गिरोह
- जमीन-जायदाद और लेन-देन के मामलों को निपटाने के लिए भी दर्ज कराए गए थे झूठे केस
- बिजनौर और अमरोहा में दर्ज कराए गए थे 11 झूठे केस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। दुष्कर्म या गैंगरेप के झूठे केस दर्ज कराकर रकम वसूलने वाले गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तीन महिलाओं समेत पांच आरोपियों को पकड़ा गया है जबकि तीन की तलाश जारी है। दस अन्य संदिग्ध आरोपी भी पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस की प्राथमिक जांच में अमरोहा और बिजनौर के अलग-अलग थानों में दर्ज कराए गए 11 झूठे केस सामने आ चुके हैं।
एसपी केके बिश्नोई ने बताया कि जल निगम बरेली में तैनात अवर अभियंता मोहम्मद अहसान ने प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें कहा कि उसके खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज कराया गया है। अहसान के अलावा पांच अन्य लोगों ने भी इस तरह प्रार्थना पत्र दिए। इन छह प्रार्थना पत्रों की जांच एएसपी गौतम राय ने की। जांच में झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने की बात सही निकली।
स्वाट और शहर कोतवाली पुलिस ने गिरोह के सरगना जुल्फिकार उर्फ बब्बू लंगड़ा निवासी चांदपुर की चुंगी जन्नत कॉलोनी, अफजाल निवासी कफील निवासी भागूवाला, गुड्डी निवासी लड़ापुरा बिजनौर, कुंती निवासी मोहल्ला कस्साबान और प्रीति निवासी बिजनौर को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि पारुल निवासी लड़ापुरा, रामकली निवासी बिजनौर और अन्नू निवासी मोहल्ला रेती किरतपुर की तलाश की जा रही है। आरोपियों ने दुष्कर्म के झूठे मुकदमों में फंसाया और मुकदमा वापस लेने के लिए दो से तीन-तीन लाख रुपये तक की मांग की। पकड़े गए आरोपियों का चालान कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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- झूठे मुकदमे लिखवाकर निपटाए गए जमीन और लेनदेन के विवाद
दुष्कर्म के झूठे मुकदमे लिखवाकर सिर्फ वसूली ही नहीं की गई बल्कि जमीन या मकान या लेन-देन के मामलों को भी निपटाया गया। ताकि विपक्षी पार्टी को दबाव में लेकर मनचाहा फैसला कराया जा सके। अमरोहा के रजबपुर थाने में भी जमीन संबंधी विवाद में उक्त गिरोह ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। वहीं इस गिरोह ने शबाना से झूठा केस दर्ज कराते हुए एक मकान भी खाली कराया था। पुरानी रंजिश के मामलों में भी एक पक्ष से संपर्क कर उसके विपक्षी के खिलाफ भी केस दर्ज कराने के लिए उक्त गिरोह काम करता था।
- कारोबारी ने रकम निकालने को लिया था गिरोह का सहारा
बिजनौर शहर के एक मंडप कारोबारी ने उक्त गिरोह से संपर्क कर थाना हीमपुर दीपा में अपने विपक्षी भट्ठा स्वामी आशीष अग्रवाल और अन्य के खिलाफ दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराया था। इस केस के दर्ज होने के बाद आशीष अग्रवाल पक्ष दबाव में आया और मंडप कारोबारी की फंसी रकम लौटा दी। बाद में उक्त केस को खत्म करा दिया गया। उक्त मंडप कारोबारी भी पुलिस की जांच के दायरे में है।
- कोर्ट के आदेश पर दर्ज कराए गए सभी झूठे केस
इस गिरोह ने अमरोहा के हसनपुर, रहरा, अमरोहा देहात थाने में झूठे केस दर्ज कराए थे। वहीं अमरोहा की अदालत में भी तीन परिवाद दर्ज कराए। इसके अलावा बिजनौर के हीमपुर दीपा, मंडावली, स्योहारा में भी प्राथमिकी दर्ज कराई। एक परिवाद भी बिजनौर की अदालत में दर्ज कराया था। थानों में दर्ज कराई गई सभी प्राथमिकी कोर्ट के आदेश के जरिये हुई।
- सभी केस में एक ही रही आरोपों की भाषाशैली
इस गिरोह ने जो केस दर्ज कराए उनकी भाषा शैली एक ही रही, जैसे दवाई लेने जा रही थी, या बाजार जा रही थी। सभी केस में बाद में फाइनल रिपोर्ट भी लगी। यानी आरोप पत्र अदालत नहीं गए। इसके साथ ही खुद को दुष्कर्म पीड़िता बताने वाली महिलाओं ने मेडिकल भी नहीं कराया था। साथ ही तकनीकी साक्ष्य भी नहीं थे।
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- झूठे केस दर्ज कराकर वसूली करता था यह गिरोह
- जमीन-जायदाद और लेन-देन के मामलों को निपटाने के लिए भी दर्ज कराए गए थे झूठे केस
- बिजनौर और अमरोहा में दर्ज कराए गए थे 11 झूठे केस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। दुष्कर्म या गैंगरेप के झूठे केस दर्ज कराकर रकम वसूलने वाले गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तीन महिलाओं समेत पांच आरोपियों को पकड़ा गया है जबकि तीन की तलाश जारी है। दस अन्य संदिग्ध आरोपी भी पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस की प्राथमिक जांच में अमरोहा और बिजनौर के अलग-अलग थानों में दर्ज कराए गए 11 झूठे केस सामने आ चुके हैं।
एसपी केके बिश्नोई ने बताया कि जल निगम बरेली में तैनात अवर अभियंता मोहम्मद अहसान ने प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें कहा कि उसके खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज कराया गया है। अहसान के अलावा पांच अन्य लोगों ने भी इस तरह प्रार्थना पत्र दिए। इन छह प्रार्थना पत्रों की जांच एएसपी गौतम राय ने की। जांच में झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने की बात सही निकली।
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स्वाट और शहर कोतवाली पुलिस ने गिरोह के सरगना जुल्फिकार उर्फ बब्बू लंगड़ा निवासी चांदपुर की चुंगी जन्नत कॉलोनी, अफजाल निवासी कफील निवासी भागूवाला, गुड्डी निवासी लड़ापुरा बिजनौर, कुंती निवासी मोहल्ला कस्साबान और प्रीति निवासी बिजनौर को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि पारुल निवासी लड़ापुरा, रामकली निवासी बिजनौर और अन्नू निवासी मोहल्ला रेती किरतपुर की तलाश की जा रही है। आरोपियों ने दुष्कर्म के झूठे मुकदमों में फंसाया और मुकदमा वापस लेने के लिए दो से तीन-तीन लाख रुपये तक की मांग की। पकड़े गए आरोपियों का चालान कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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- झूठे मुकदमे लिखवाकर निपटाए गए जमीन और लेनदेन के विवाद
दुष्कर्म के झूठे मुकदमे लिखवाकर सिर्फ वसूली ही नहीं की गई बल्कि जमीन या मकान या लेन-देन के मामलों को भी निपटाया गया। ताकि विपक्षी पार्टी को दबाव में लेकर मनचाहा फैसला कराया जा सके। अमरोहा के रजबपुर थाने में भी जमीन संबंधी विवाद में उक्त गिरोह ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। वहीं इस गिरोह ने शबाना से झूठा केस दर्ज कराते हुए एक मकान भी खाली कराया था। पुरानी रंजिश के मामलों में भी एक पक्ष से संपर्क कर उसके विपक्षी के खिलाफ भी केस दर्ज कराने के लिए उक्त गिरोह काम करता था।
- कारोबारी ने रकम निकालने को लिया था गिरोह का सहारा
बिजनौर शहर के एक मंडप कारोबारी ने उक्त गिरोह से संपर्क कर थाना हीमपुर दीपा में अपने विपक्षी भट्ठा स्वामी आशीष अग्रवाल और अन्य के खिलाफ दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराया था। इस केस के दर्ज होने के बाद आशीष अग्रवाल पक्ष दबाव में आया और मंडप कारोबारी की फंसी रकम लौटा दी। बाद में उक्त केस को खत्म करा दिया गया। उक्त मंडप कारोबारी भी पुलिस की जांच के दायरे में है।
- कोर्ट के आदेश पर दर्ज कराए गए सभी झूठे केस
इस गिरोह ने अमरोहा के हसनपुर, रहरा, अमरोहा देहात थाने में झूठे केस दर्ज कराए थे। वहीं अमरोहा की अदालत में भी तीन परिवाद दर्ज कराए। इसके अलावा बिजनौर के हीमपुर दीपा, मंडावली, स्योहारा में भी प्राथमिकी दर्ज कराई। एक परिवाद भी बिजनौर की अदालत में दर्ज कराया था। थानों में दर्ज कराई गई सभी प्राथमिकी कोर्ट के आदेश के जरिये हुई।
- सभी केस में एक ही रही आरोपों की भाषाशैली
इस गिरोह ने जो केस दर्ज कराए उनकी भाषा शैली एक ही रही, जैसे दवाई लेने जा रही थी, या बाजार जा रही थी। सभी केस में बाद में फाइनल रिपोर्ट भी लगी। यानी आरोप पत्र अदालत नहीं गए। इसके साथ ही खुद को दुष्कर्म पीड़िता बताने वाली महिलाओं ने मेडिकल भी नहीं कराया था। साथ ही तकनीकी साक्ष्य भी नहीं थे।