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चतुरा को एक और मामले में मिली जमानत
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2016 11:22 PM IST
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हाथरस। जिला न्यायाधीश जयशील पाठक के न्यायालय में गुरुवार को सट्टा कारोबार के आरोपी चतुर्भुज गुप्ता उर्फ चतुरा के खिलाफ हाथरस गेट पुलिस द्वारा दर्ज किए गए 420, 467, 468, 471, 120 बी के मामले में जमानत के आवेदन पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायालय ने चतुरा को जमानत दे दी।
ज्ञात रहे कि कोतवाली हाथरस गेट में कोतवाली हाथरस जंक्शन के प्रभारी निरीक्षक अखिलेश त्रिपाठी ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें चतुरा और उसके साथियों पर फर्जी आईडी पर ली गई सिम से बात करके पुलिस को फंसाने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने इस मामले में चतुरा के खिलाफ 12 अप्रैल, 2016 को मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने चतुरा को 15 अप्रैल, 2016 को गिरफ्तार किया था। डीजीसी क्राइम वतन सिंह ने इस मामले में चतुरा पर 30 आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की बात कहते हुए जमानत नहीं देने की न्यायालय से अपील की, जबकि आरोपी के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह सभी मुकदमे पुलिस द्वारा दर्ज किए हुए हैं, जिनमें से आधे मामलों में वह पहले ही जमानत ले चुका है। दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायालय ने इस मामले में जमानत आवेदन को स्वीकार योग्य बताते हुए जमानत दे दी। इस मामले में सिम विक्रेता विपिन को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि आनंद कुमार के नाम के जिस व्यक्ति के नाम से सिम जारी कराई गई थी, पुलिस उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
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ज्ञात रहे कि कोतवाली हाथरस गेट में कोतवाली हाथरस जंक्शन के प्रभारी निरीक्षक अखिलेश त्रिपाठी ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें चतुरा और उसके साथियों पर फर्जी आईडी पर ली गई सिम से बात करके पुलिस को फंसाने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने इस मामले में चतुरा के खिलाफ 12 अप्रैल, 2016 को मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने चतुरा को 15 अप्रैल, 2016 को गिरफ्तार किया था। डीजीसी क्राइम वतन सिंह ने इस मामले में चतुरा पर 30 आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की बात कहते हुए जमानत नहीं देने की न्यायालय से अपील की, जबकि आरोपी के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह सभी मुकदमे पुलिस द्वारा दर्ज किए हुए हैं, जिनमें से आधे मामलों में वह पहले ही जमानत ले चुका है। दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायालय ने इस मामले में जमानत आवेदन को स्वीकार योग्य बताते हुए जमानत दे दी। इस मामले में सिम विक्रेता विपिन को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि आनंद कुमार के नाम के जिस व्यक्ति के नाम से सिम जारी कराई गई थी, पुलिस उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
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