फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   baba's wife and colleague got imprisment till death

हत्याकांड में बाबा की पत्नी-चेले को भी उम्रकैद

Sat, 07 Jan 2017 11:23 PM IST
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस Updated Sat, 07 Jan 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
baba's wife and colleague got  imprisment till death
court shimla
अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने मुरसान गेट पर दुकान पर कब्जे को लेकर हुए हत्याकांड के मामले मेें बाकी दोनों आरोपियों को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में मुख्य अभियुक्त बाबा प्रभुदास को को पहले ही उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
विज्ञापन


न्यायालय ने प्रभुदास की पत्नी पूजा त्यागी और चेले मोना उर्फ मोनू को पहले ही दोषी मान लिया था, किंतु इन दोनों के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण सजा के बिंदु पर सुनवाई नहीं हो पाई थी। पूजा त्यागी ने चार जनवरी और मोना ने छह जनवरी को न्यायालय में समर्पण किया था, दोनों की सजा के बिंदु पर न्यायालय ने निर्णय दिया है।
विज्ञापन


वादी की ओर से संजीव कुमार निवासी ग्राम भगवंतपुर द्वारा 19 फरवरी 2015 को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि उसने वर्ष 1999 में परमहंस मार्केट मुरसान गेट हाथरस में एक दुकान किराए पर ली। इसमें वह हार्डवेयर का कारोबार करता है। मंदिर का महंत प्रभुदास त्यागी इस दुकान को जबरन गुंडागर्दी के बलबूते खाली कराना चाहता था। इस कारण 19 फरवरी 2015 को समय करीब एक बजे जब वादी और उसका चचेरा भाई हरिओम व भतीजा जितेंद्र दुकान पर बैठे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसके गांव के संतसरन और बच्चू सिंह दुकान पर सामान खरीदने आ रहे थे। उसी समय प्रभुदास त्यागी, उसकी पत्नी पूजा त्यागी और बाबा का चेला मोना उर्फ मोनू निवासीगण ठाकुर राधारमन मंदिर मुरसान गेट और बिजेंद्र उर्फ बंडा निवासी नगला कुंवरजी आए। इन सभी ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें वादी का भाई हाकिम, जो अचानक गांव से दुकान पर आया, चचेरा भाई हरिओम और वादी का भतीजा जितेंद्र बुरी तरह से घायल हो गए। चिकित्सकों ने चचेरे भाई हरिओम को मृत घोषित कर दिया।


न्यायालय ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए पूजा त्यागी एवं मोना उर्फ मोनू को आईपीसी की धारा 302 में सश्रम आजीवन कारावास एवं 40-40 हजार रुपये अर्थदंड एवं धारा 307 में 10 वर्ष की सजा व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने की।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed