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वृद्ध की हत्या में तीन को 8-8 साल की कैद
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Thu, 15 Sep 2016 11:58 PM IST
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सजा सुनने के बाद भाग
- फोटो : amar ujala
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अपर सत्र न्यायाधीश राजेशश्वरी टोलिया एफटीसी कोर्ट द्वितीय ने एक बुजुर्ग के साथ मारपीट कर हत्या करने के आरोप में तीन लोगों को दोषी माना है। न्यायालय ने तीनों को आठ-आठ साल के सश्रम कारावास व 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन की ओर से शीलेंद्र सिंह निवासी मुबारकपुर ने कोतवाली सिकंदराराऊ पुलिस को सौंपी तहरीर में आरोप लगाया कि 11 सितंबर, 2005 को उसकी बहन बोस कुमारी उम्र 12 साल सरकारी नल पर पानी भरने गई थी।
नल के नीचे पानी भरा था। नल के पास उसी के गांव के दुष्यंत पुत्र गिरेंद्र सिंह ने पानी की बाल्टी फेंक दी। इसका शीलेंद्र के पिता राजेंद्र सिंह ने जब बाल्टी फेंकने का विरोध किया तो दुष्यंत उनको गाली देने लगा।
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मना करने पर दुष्यंत के पिता गिरेंद्र सिंह, चाचा गवेंद्र सिंह ने राजेंद्र सिंह को लात घूंसों से शरीर के संवेदनशील पार्ट (गुप्तांग) पर प्रहार किया, जिससे वह अचेत हो गए। जब हम लोग उन्हें उठाकर घर ले गए तो उनकी मौत हो गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इस दौरान दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों पर विचार किया।
वादी की ओर से एडीजीसी राजेंद्र कुमार वार्ष्णेय व वादी की ओर से ही पैरवी कर रहे अधिवक्ता केशवदेव माहौर ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के जवाब में पर्याप्त साक्ष प्रस्तुत किए। इसके आधार पर न्यायालय ने तीनों को दोष सिद्ध मानते हुए सजा के बिंदु पर सुनवाई की। न्यायालय ने तीनों को आठ-आठ साल के सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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अभियोजन की ओर से शीलेंद्र सिंह निवासी मुबारकपुर ने कोतवाली सिकंदराराऊ पुलिस को सौंपी तहरीर में आरोप लगाया कि 11 सितंबर, 2005 को उसकी बहन बोस कुमारी उम्र 12 साल सरकारी नल पर पानी भरने गई थी।
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नल के नीचे पानी भरा था। नल के पास उसी के गांव के दुष्यंत पुत्र गिरेंद्र सिंह ने पानी की बाल्टी फेंक दी। इसका शीलेंद्र के पिता राजेंद्र सिंह ने जब बाल्टी फेंकने का विरोध किया तो दुष्यंत उनको गाली देने लगा।
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मना करने पर दुष्यंत के पिता गिरेंद्र सिंह, चाचा गवेंद्र सिंह ने राजेंद्र सिंह को लात घूंसों से शरीर के संवेदनशील पार्ट (गुप्तांग) पर प्रहार किया, जिससे वह अचेत हो गए। जब हम लोग उन्हें उठाकर घर ले गए तो उनकी मौत हो गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इस दौरान दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों पर विचार किया।
वादी की ओर से एडीजीसी राजेंद्र कुमार वार्ष्णेय व वादी की ओर से ही पैरवी कर रहे अधिवक्ता केशवदेव माहौर ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के जवाब में पर्याप्त साक्ष प्रस्तुत किए। इसके आधार पर न्यायालय ने तीनों को दोष सिद्ध मानते हुए सजा के बिंदु पर सुनवाई की। न्यायालय ने तीनों को आठ-आठ साल के सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।