{"_id":"5c645f16bdec22093e7c08ea","slug":"151550081814-hathras-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्या के मामले में तीन आरोपियों को कोर्ट ने माना दोषी, सुनाई उम्रकैद की सजा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हत्या के मामले में तीन आरोपियों को कोर्ट ने माना दोषी, सुनाई उम्रकैद की सजा
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 20 साल पुराने हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा इन्हें अर्थदंड भी देना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सुभाष उर्फ पप्पू पुत्र दाताराम निवासी निवासी करकौली थाना सहपऊ जिला हाथरस ने थाने में 13 अप्रैल 1998 को यह रिपोर्ट दर्ज कराई कि नौ अप्रैल 1998 को रात्रि आठ से नौ बजे के लगभग मेरे ही गांव का जगिया पुत्र अब्दुल शकूर मेरे खानदानी चाचा मुरारी पुत्र नाहर सिंह से गाली-गलौज कर रहा था तो उसके पिता दाताराम दूसरे घर की तरफ से आ गए और वह शराब के नशे में थे तो मुरारी ने मेरे पिता से कहा कि जगिया गाली दे रहा है।
रिपोर्ट में सुभाष ने कहा कि इतने में जगिया ने मेरे पिता में दो थप्पड़ मार दिए। इतने में जगिया के पिता अब्दुल शकूर आ गए और जगिया को गाली देकर हटा ले गए। सुभाष ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि इतने में मेरे पिता दाताराम ऊपर से बंदूक ले आए। दाताराम ने शराब के नशे में घर से बाहर फायर कर दिया। जो हवाई हो गया। दूसरा फायर मंदिर की तरफ कर दिया, जो रास्ते में खड़े रसीद, मुरारी, बसीरन व नेत्रपाल की लड़की गुड्डी को लगा। रसीद मौके पर ही गिर गया।
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सुभाष ने अपने पिता से बंदूक छीन ली। इतने में हल्ला हुआ कि दाताराम ने गोली मार दी है। तभी नोहले पुत्र अल्लादीन ने कहा कि अब देख क्या रहे हो मेरे रसीद को मार दिया तथा पूरन तुम्हारी लड़की को भी गोली लगी है। जगिया ने कहा कि मारो साले को और पूरन पुत्र डालचंद्र, नोहले पुत्र अल्लादीन व जगिया पुत्र अब्दुल शकूर ने अपने हाथों में लिए चाकू, छुरी व ईंटों मारा-पीटा और सुभाष के पिता को मरा समझ कर छोड़कर सुभाष को जान से मारने की धमकी देकर चले गए। उसके बाद कुछ फकीर, छोटे, सलीम आदि रसीद को ले गए। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
पुलिस वहां से घायल अवस्था में दाताराम के अलावा अन्य घायलों को ले गई। रिपोर्ट के मुताबिक रसीद उसी दिन रात में मर गया, जबकि दाताराम की मौत 11 अप्रैल 1998 को आगरा के एसएन अस्पताल में हो गई। सुभाष ने अपने पिता की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस ने विवेचना की और विवेचनाधिकारी ने विवेचना के उपरांत जगिया, पूरन व नोहले के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेशचंद्र के न्यायालय में हुई। जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों जगिया, पूरन और नोहले को दोषी मानते हुए इन्हें आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर इन्हें अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी अनुराग शर्मा ने पैरवी की।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 20 साल पुराने हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा इन्हें अर्थदंड भी देना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सुभाष उर्फ पप्पू पुत्र दाताराम निवासी निवासी करकौली थाना सहपऊ जिला हाथरस ने थाने में 13 अप्रैल 1998 को यह रिपोर्ट दर्ज कराई कि नौ अप्रैल 1998 को रात्रि आठ से नौ बजे के लगभग मेरे ही गांव का जगिया पुत्र अब्दुल शकूर मेरे खानदानी चाचा मुरारी पुत्र नाहर सिंह से गाली-गलौज कर रहा था तो उसके पिता दाताराम दूसरे घर की तरफ से आ गए और वह शराब के नशे में थे तो मुरारी ने मेरे पिता से कहा कि जगिया गाली दे रहा है।
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रिपोर्ट में सुभाष ने कहा कि इतने में जगिया ने मेरे पिता में दो थप्पड़ मार दिए। इतने में जगिया के पिता अब्दुल शकूर आ गए और जगिया को गाली देकर हटा ले गए। सुभाष ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि इतने में मेरे पिता दाताराम ऊपर से बंदूक ले आए। दाताराम ने शराब के नशे में घर से बाहर फायर कर दिया। जो हवाई हो गया। दूसरा फायर मंदिर की तरफ कर दिया, जो रास्ते में खड़े रसीद, मुरारी, बसीरन व नेत्रपाल की लड़की गुड्डी को लगा। रसीद मौके पर ही गिर गया।
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सुभाष ने अपने पिता से बंदूक छीन ली। इतने में हल्ला हुआ कि दाताराम ने गोली मार दी है। तभी नोहले पुत्र अल्लादीन ने कहा कि अब देख क्या रहे हो मेरे रसीद को मार दिया तथा पूरन तुम्हारी लड़की को भी गोली लगी है। जगिया ने कहा कि मारो साले को और पूरन पुत्र डालचंद्र, नोहले पुत्र अल्लादीन व जगिया पुत्र अब्दुल शकूर ने अपने हाथों में लिए चाकू, छुरी व ईंटों मारा-पीटा और सुभाष के पिता को मरा समझ कर छोड़कर सुभाष को जान से मारने की धमकी देकर चले गए। उसके बाद कुछ फकीर, छोटे, सलीम आदि रसीद को ले गए। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
पुलिस वहां से घायल अवस्था में दाताराम के अलावा अन्य घायलों को ले गई। रिपोर्ट के मुताबिक रसीद उसी दिन रात में मर गया, जबकि दाताराम की मौत 11 अप्रैल 1998 को आगरा के एसएन अस्पताल में हो गई। सुभाष ने अपने पिता की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस ने विवेचना की और विवेचनाधिकारी ने विवेचना के उपरांत जगिया, पूरन व नोहले के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेशचंद्र के न्यायालय में हुई। जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों जगिया, पूरन और नोहले को दोषी मानते हुए इन्हें आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर इन्हें अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी अनुराग शर्मा ने पैरवी की।