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हाथरस: सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोपी रामू की जमानत अर्जी को कोर्ट ने किया खारिज
Sat, 30 Jan 2021 03:51 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 30 Jan 2021 03:51 PM IST
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हाथरस गैंगरेप केस।
- फोटो : अमर उजाला
बहुचर्चित बिटिया प्रकरण में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोपी रामू पुत्र राकेश के जमानत प्रार्थना पत्र को विशेष न्यायाधीश (एसटी-एसटी एक्ट) ने निरस्त कर दिया है। रामू ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया था। कोर्ट ने अभियुक्त पर लगाए गए आरोपों को गंभीर प्रकृति का मानते हुए कहा है कि यदि अभियुक्त को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है और साक्षियों को प्रभावित कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि चंदपा क्षेत्र की एक युवती के साथ हुई वारदात के एक आरोपी रामू उर्फ रामकुमार पुत्र राकेश द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में रहते हुए विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) बीडी भारती के न्यायालय में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। इस मामले में संदीप, रामू, लवकुश और रवि के खिलाफ सीबीआई ने धारा 302, 376, 376ए, 376 डी व 3(2)(5) एससी-एसटी एक्ट में आरोपपत्र दाखिल किया था। रामू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा, लक्ष्मीकांत सारस्वत व मुन्ना सिंह पुंढीर और सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक अनुराग मोदी, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता भागीरथ सिंह सोलंकी मौजूद रहे।
जमानत प्रार्थनापत्र में अभियुक्त ने कहा कि उसकी इस परिवार से पुरानी दुश्मनी है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में उसका नाम नहीं है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में केवल संदीप का ही नाम है। 19 सितंबर को भी पीड़िता का धारा 161 दं.प्र.स. के तहत जो बयान दर्ज किया है, उसमें भी उसका नाम नहीं है। जमानत प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियों के प्रवेश कर जाने से यह मामला राष्ट्रीय स्तर का हो गया। मीडिया ने भी टीआरपी बढ़ाने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। इसके बाद सीबीआई की जांच की घोषणा हुई। सीबीआई ने विवेचना के उपरांत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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सीबीआई ने विवेचना में पीड़िता की आयु 23 साल बताई है। नामजद अभियुक्त संदीप के साथ पीड़िता का प्रेम संबंध बताया गया है। इस पर दोनों परिवारों को ऐतराज था। नामजद संदीप व पीड़िता के बीच टेलीफोन पर काफी वार्ता होती थी। इसके कॉल डिटेल को आरोप पत्र का भाग बनाया गया है। दुष्कर्म के संबंध में कोई भी फोरेंसिक साक्ष्य नहीं है। पीड़िता के निजी अंग पर कोई चोट नहीं है। पॉलीग्राफी टेस्ट में भी आपसी दुश्मनी अभियुक्त रामू की बताई गई है। ऐसे में रामू को गलत फंसाया गया है।
सीबीआई के साक्ष्यों को बताया गलत
घटना के दिन रामू मधुसूदन डेयरी चंदपा, जोकि घटनास्थल से दो किमी दूर है, वहां पर था। इसके बाद भी सीबीआई ने उसे अभियुक्त बना दिया। जमानत प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि पीड़िता व प्रत्यक्ष साक्षियों ने बार-बार बयान बदले हैं। इस जमानत प्रार्थना पत्र के विरुद्ध सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक अनुराग मोदी ने आपत्ति प्रस्तुत की और यह भी कहा कि इस केस में अभी अग्रिम विवेचना जारी है। अभियुक्त के वकीलों ने सीबीआई के साक्ष्यों को गलत ठहराते हुए अभियुक्त को निर्दोष बताया और कहा कि राजनीतिक दबाव में अभियुक्त को नामित किया गया है और आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
रामू उर्फ रामकुमार का लिया नाम
न्यायालय ने कहा है सीबीआई ने जो भी साक्ष्य एकत्रित किए हैं, उसकी विवेचना मामले के गुण-दोष के आधार पर की जाएगी, लेकिन अभियुक्त के अधिवक्ताओं के इस तर्क में कोई बल नहीं है कि अभियुक्त को राजनीतिक विद्वेष, राजनीतिक कारणों या धन लाभ के मकसद से नामित किया गया है। सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि पीड़िता के मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर रामू को आरोपित किया गया है। केस डायरी से स्पष्ट है कि पीड़िता के मृत्यु पूर्व बयान अंकित किए गए हैं। इसमें रामू उर्फ रामकुमार का नाम लिया है।
इसके अलावा अभियुक्त रामू को घटना के दिन मधुसूदन डेयरी चंदपा पर उपस्थित होना बताया गया है, जबकि पीड़िता का बयान जोकि धारा 161 दं.प्र.सं, जो 22 सितंबर 2020 को अंकित किया गया है और इस बयान में भी रामू की मधुसूदन डेयरी में उपस्थिति प्रमाणित नहीं होती। यह बयान नायब तहसीलदार कोल जिला अलीगढ़ द्वारा अंकित किया गया। इसके बाद पीड़िता की 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई। पोस्टमार्टम आदि में मौत का कारण पीड़िता को आई चोटें बताया गया है।
ऐसी स्थिति में अभियुक्त पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। जमानत पर छोड़ने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है और साक्षियों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अभियुक्त को जमानत पर छोड़ने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। इधर, आरोपी के वकीलों का कहना है कि वह अब आरोपी की जमानत के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देंगे।
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उल्लेखनीय है कि चंदपा क्षेत्र की एक युवती के साथ हुई वारदात के एक आरोपी रामू उर्फ रामकुमार पुत्र राकेश द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में रहते हुए विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) बीडी भारती के न्यायालय में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। इस मामले में संदीप, रामू, लवकुश और रवि के खिलाफ सीबीआई ने धारा 302, 376, 376ए, 376 डी व 3(2)(5) एससी-एसटी एक्ट में आरोपपत्र दाखिल किया था। रामू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा, लक्ष्मीकांत सारस्वत व मुन्ना सिंह पुंढीर और सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक अनुराग मोदी, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता भागीरथ सिंह सोलंकी मौजूद रहे।
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जमानत प्रार्थनापत्र में अभियुक्त ने कहा कि उसकी इस परिवार से पुरानी दुश्मनी है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में उसका नाम नहीं है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में केवल संदीप का ही नाम है। 19 सितंबर को भी पीड़िता का धारा 161 दं.प्र.स. के तहत जो बयान दर्ज किया है, उसमें भी उसका नाम नहीं है। जमानत प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियों के प्रवेश कर जाने से यह मामला राष्ट्रीय स्तर का हो गया। मीडिया ने भी टीआरपी बढ़ाने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। इसके बाद सीबीआई की जांच की घोषणा हुई। सीबीआई ने विवेचना के उपरांत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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सीबीआई ने विवेचना में पीड़िता की आयु 23 साल बताई है। नामजद अभियुक्त संदीप के साथ पीड़िता का प्रेम संबंध बताया गया है। इस पर दोनों परिवारों को ऐतराज था। नामजद संदीप व पीड़िता के बीच टेलीफोन पर काफी वार्ता होती थी। इसके कॉल डिटेल को आरोप पत्र का भाग बनाया गया है। दुष्कर्म के संबंध में कोई भी फोरेंसिक साक्ष्य नहीं है। पीड़िता के निजी अंग पर कोई चोट नहीं है। पॉलीग्राफी टेस्ट में भी आपसी दुश्मनी अभियुक्त रामू की बताई गई है। ऐसे में रामू को गलत फंसाया गया है।
सीबीआई के साक्ष्यों को बताया गलत
घटना के दिन रामू मधुसूदन डेयरी चंदपा, जोकि घटनास्थल से दो किमी दूर है, वहां पर था। इसके बाद भी सीबीआई ने उसे अभियुक्त बना दिया। जमानत प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि पीड़िता व प्रत्यक्ष साक्षियों ने बार-बार बयान बदले हैं। इस जमानत प्रार्थना पत्र के विरुद्ध सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक अनुराग मोदी ने आपत्ति प्रस्तुत की और यह भी कहा कि इस केस में अभी अग्रिम विवेचना जारी है। अभियुक्त के वकीलों ने सीबीआई के साक्ष्यों को गलत ठहराते हुए अभियुक्त को निर्दोष बताया और कहा कि राजनीतिक दबाव में अभियुक्त को नामित किया गया है और आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
रामू उर्फ रामकुमार का लिया नाम
न्यायालय ने कहा है सीबीआई ने जो भी साक्ष्य एकत्रित किए हैं, उसकी विवेचना मामले के गुण-दोष के आधार पर की जाएगी, लेकिन अभियुक्त के अधिवक्ताओं के इस तर्क में कोई बल नहीं है कि अभियुक्त को राजनीतिक विद्वेष, राजनीतिक कारणों या धन लाभ के मकसद से नामित किया गया है। सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि पीड़िता के मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर रामू को आरोपित किया गया है। केस डायरी से स्पष्ट है कि पीड़िता के मृत्यु पूर्व बयान अंकित किए गए हैं। इसमें रामू उर्फ रामकुमार का नाम लिया है।
इसके अलावा अभियुक्त रामू को घटना के दिन मधुसूदन डेयरी चंदपा पर उपस्थित होना बताया गया है, जबकि पीड़िता का बयान जोकि धारा 161 दं.प्र.सं, जो 22 सितंबर 2020 को अंकित किया गया है और इस बयान में भी रामू की मधुसूदन डेयरी में उपस्थिति प्रमाणित नहीं होती। यह बयान नायब तहसीलदार कोल जिला अलीगढ़ द्वारा अंकित किया गया। इसके बाद पीड़िता की 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई। पोस्टमार्टम आदि में मौत का कारण पीड़िता को आई चोटें बताया गया है।
ऐसी स्थिति में अभियुक्त पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। जमानत पर छोड़ने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है और साक्षियों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अभियुक्त को जमानत पर छोड़ने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। इधर, आरोपी के वकीलों का कहना है कि वह अब आरोपी की जमानत के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देंगे।