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कोरोना संक्रमण से अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज परेशान
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद हैं और कई नर्सिंग होम में भी चिकित्सकों ने मरीजों को देखना भी बंद कर दिया है। ऐसे में अन्य बीमारियों से परेशान मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना कर्फ्यू और बढ़ते संक्रमण के चलते वह बाहर भी नहीं जा पा रहे। बड़े शहरों में प्राइवेट अस्पताल इस समय हाउसफुल हैं। इन मरीजों को वहां भर्ती नहीं किया जा रहा।
वर्तमान में कोरोना के साथ अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या भी कहीं ज्यादा है। काफी मरीजों का तो दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, आगरा और गुरुग्राम के बड़े अस्पतालों में इलाज भी चल रहा है। इसमें हार्ट, किडनी, कैंसर, निमोनिया और रुमेटी बीमारी के मरीज काफी ज्यादा हैं।
समय-समय पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीज चिकित्सक से समय लेकर वहां दिखाने जाते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण और कोरोना कर्फ्यू की वजह से यह मरीज वहां नहीं जा पा रहे। शहर के भी कई नामचीन चिकित्सकों के यहां ओपीडी बंद हैं और सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी नहीं खुल रही। ऐसे में इन गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई है।
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केस नंबर 1
चिकित्सक से नहीं मिल पा रहा समय
स्थानीय मुरसान गेट काका वाली गली निवासी 54 वर्षीय एक कारोबारी ने करीब एक माह पहले गुरुग्राम के एक बड़े अस्पताल में हार्ट का ऑपरेशन कराया था। उसके बाद चिकित्सक ने उन्हें हर 15 दिन बाद बुलाया, ताकि उनकी जांच हो सके और परामर्श दिया जा सके। इसके बाद वह एक बार तो गए, लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते वह फिर नहीं जा पा रहे। वैसे भी इस अस्पताल में इस समय एक भी बिस्तर उपलब्ध नहीं है और न ही चिकित्सक से उन्हें समय मिल रहा।
केस नंबर 2
स्थानीय रुई की मंडी निवासी 62 वर्षीय वृद्ध की किडनी खराब हैं। लंबे समय से वह सरकारी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। इस बार उन्होंने नोएडा के एक अस्पताल में खुद को दिखाने के लिए सभी जांच भी कराईं। चिकित्सक से मिलने का समय भी ले लिया, लेकिन कोरोना का संक्रमण इतना फैल गया कि अब वह मजबूरी में वहां नहीं जा पा रहे।
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सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद हैं और कई नर्सिंग होम में भी चिकित्सकों ने मरीजों को देखना भी बंद कर दिया है। ऐसे में अन्य बीमारियों से परेशान मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना कर्फ्यू और बढ़ते संक्रमण के चलते वह बाहर भी नहीं जा पा रहे। बड़े शहरों में प्राइवेट अस्पताल इस समय हाउसफुल हैं। इन मरीजों को वहां भर्ती नहीं किया जा रहा।
वर्तमान में कोरोना के साथ अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या भी कहीं ज्यादा है। काफी मरीजों का तो दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, आगरा और गुरुग्राम के बड़े अस्पतालों में इलाज भी चल रहा है। इसमें हार्ट, किडनी, कैंसर, निमोनिया और रुमेटी बीमारी के मरीज काफी ज्यादा हैं।
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समय-समय पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीज चिकित्सक से समय लेकर वहां दिखाने जाते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण और कोरोना कर्फ्यू की वजह से यह मरीज वहां नहीं जा पा रहे। शहर के भी कई नामचीन चिकित्सकों के यहां ओपीडी बंद हैं और सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी नहीं खुल रही। ऐसे में इन गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई है।
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केस नंबर 1
चिकित्सक से नहीं मिल पा रहा समय
स्थानीय मुरसान गेट काका वाली गली निवासी 54 वर्षीय एक कारोबारी ने करीब एक माह पहले गुरुग्राम के एक बड़े अस्पताल में हार्ट का ऑपरेशन कराया था। उसके बाद चिकित्सक ने उन्हें हर 15 दिन बाद बुलाया, ताकि उनकी जांच हो सके और परामर्श दिया जा सके। इसके बाद वह एक बार तो गए, लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते वह फिर नहीं जा पा रहे। वैसे भी इस अस्पताल में इस समय एक भी बिस्तर उपलब्ध नहीं है और न ही चिकित्सक से उन्हें समय मिल रहा।
केस नंबर 2
स्थानीय रुई की मंडी निवासी 62 वर्षीय वृद्ध की किडनी खराब हैं। लंबे समय से वह सरकारी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। इस बार उन्होंने नोएडा के एक अस्पताल में खुद को दिखाने के लिए सभी जांच भी कराईं। चिकित्सक से मिलने का समय भी ले लिया, लेकिन कोरोना का संक्रमण इतना फैल गया कि अब वह मजबूरी में वहां नहीं जा पा रहे।