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Hathras News: कोरोना का अलर्ट जारी और वेंटिलेटर नींद में
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प्रदेश के साथ जिले में कोरोना के जेएन वन संक्रमण का अलर्ट जारी हुए पूरा एक पखवाड़ा बीत चुका है। बीती 25 दिसंबर को जारी हुए इस अलर्ट में कोरोना संक्रमण से बचाव के सभी उपाय तेजी से करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण जिला अस्पताल में लगे वेंटीलेटर धूल फांक रहे हैं।
अत्याधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिन मरीजों को वेंटिलेटर की मदद से बचाया जा सकता है। उनको जिला अस्पताल से आगरा और अलीगढ़ के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।
बागला जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते हैं। कोरानाकाल में जिला अस्पताल को चार वेंटीलेटर मिले थे। विभाग ने अस्पताल को वेंटीलेटर तो दे दिए, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ नहीं दिया। जिला अस्पताल में बेहोशी का चिकित्सक भी नहीं है।
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वेंटिलेटर पर मरीज को चिकित्सा मुहैया कराने के लिए बेहोशी के चिकित्सक की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। इससे जिला अस्पताल में मरीजों को वेंटीलेटर की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद आगरा और अलीगढ़ के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा शहर के एक मात्र निजी अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा है।
आगरा में मिला है कोरोना का मरीज
आगरा में चीन से लौटे युवक को हाल ही में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी, इसलिए पड़ोसी जिले हाथरस में भी अलर्ट जारी हुआ था, जिसमें कोविड हेल्प डेस्क चालू करने को कहा गया था। यह भी कहा गया था कि मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करना है। अस्पतालों में वेंटिलेटर और आक्सीजन के इंतजाम किए जाने हैं। निर्देश के बाद भी अभी तक विभागीय अधिकारी नींद में है, इसलिए इंतजाम पूरे नहीं किए गए हैं।
कोरानाकाल में चार वेंटीलेटर अस्पताल में लगाए गए थे। इन्हें संचालित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ नहीं मिला है। आधी-अधूरी तैयारी से मरीज को वेंटीलेटर पर रखना घातक साबित हो सकता है। यही कारण है कि गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
-डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस बागला जिला अस्पताल हाथरस।
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अत्याधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिन मरीजों को वेंटिलेटर की मदद से बचाया जा सकता है। उनको जिला अस्पताल से आगरा और अलीगढ़ के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।
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बागला जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते हैं। कोरानाकाल में जिला अस्पताल को चार वेंटीलेटर मिले थे। विभाग ने अस्पताल को वेंटीलेटर तो दे दिए, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ नहीं दिया। जिला अस्पताल में बेहोशी का चिकित्सक भी नहीं है।
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वेंटिलेटर पर मरीज को चिकित्सा मुहैया कराने के लिए बेहोशी के चिकित्सक की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। इससे जिला अस्पताल में मरीजों को वेंटीलेटर की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद आगरा और अलीगढ़ के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा शहर के एक मात्र निजी अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा है।
आगरा में मिला है कोरोना का मरीज
आगरा में चीन से लौटे युवक को हाल ही में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी, इसलिए पड़ोसी जिले हाथरस में भी अलर्ट जारी हुआ था, जिसमें कोविड हेल्प डेस्क चालू करने को कहा गया था। यह भी कहा गया था कि मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करना है। अस्पतालों में वेंटिलेटर और आक्सीजन के इंतजाम किए जाने हैं। निर्देश के बाद भी अभी तक विभागीय अधिकारी नींद में है, इसलिए इंतजाम पूरे नहीं किए गए हैं।
कोरानाकाल में चार वेंटीलेटर अस्पताल में लगाए गए थे। इन्हें संचालित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ नहीं मिला है। आधी-अधूरी तैयारी से मरीज को वेंटीलेटर पर रखना घातक साबित हो सकता है। यही कारण है कि गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
-डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस बागला जिला अस्पताल हाथरस।