Hathras: नहीं मिली मंजूरी, 190 मार्गों के निर्माण के लिए करना होगा इंजजार, प्रस्ताव भेजे 250-पास हुए 60
पीडब्ल्यूडी ने हाथरस के करीब 250 जर्जर मार्गों के निर्माण एवं पुनर्निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। इसमें 49 लावारिस रास्ते भी शामिल थे। शासन स्तर से 190 मार्गों के नव निर्माण से इन्कार कर दिया गया है।
विस्तार
हाथरस जनपद में एक किलोमीटर से कम लंबाई वाले जर्जर रास्तों के पुनर्निर्माण की उम्मीदों को फिलहाल झटका लग गया है। पीडब्ल्यूडी द्वारा करीब 250 जर्जर मार्गों के निर्माण एवं पुनर्निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें 49 लावारिस रास्ते भी शामिल थे। शासन स्तर से एक किलोमीटर से कम लंबे लगभग 190 मार्गों के नव निर्माण से इन्कार कर दिया गया है।
कुल प्रस्तावित सड़कों में से केवल 60 मार्गों को ही स्वीकृति मिली है। इनमें भी लावारिस श्रेणी के 49 रास्तों में से मात्र 17 को कार्य योजना में शामिल किया गया है। एक लावारिस मार्ग के नव निर्माण की अनुमति दी गई है। शेष 31 लावारिस रास्तों सहित लगभग 190 छोटे जर्जर मार्गों को अब अगले बजट या नई योजना का इंतजार करना पड़ेगा।
इन छोटे मार्गों की स्थिति बेहद खराब है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, तो कहीं सड़क बची ही नहीं है, जिससे आवागमन में जबरदस्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में ये रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं। दोपहिया वाहन पर या पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को अस्पताल ले जाने में बहुत परेशानी होती है।
काफी समय से सड़क खराब है। परेशान होकर चुनाव बहिष्कार की घोषणा की गई थी, लेकिन सड़क आज भी खराब ही है। सड़क को सही नहीं किया गया है।-प्रमोद कुमार, निवासी नगला काठ।
सड़क से आने-जाने वाले वाहनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश में पानी भर जाता है, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।-संजय कुमार, निवासी नगला काठ।
गांव की सड़क के निर्माण को लेकर क्या नहीं किया, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। चुनाव बहिष्कार की घोषणा पर वोट डलवाने के लिए अधिकारी दौड़ पड़े थे।-सतेंद्र ठाकुर, निवासी चिंतापुर बदन।
बड़ी सड़कों का निर्माण हो रहा है, लेकिन छोटी सड़कों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। लगातार मांग, विरोध करने के बाद भी कुछ नहीं हुआ है।-हरेंद्र सिंह सिसौदिया निवासी चिंतापुर बदन।
अब तो शादी वाले भी रिश्ते करने नहीं आते, क्योंकि गांव की सड़क की हालत खराब है। आसपास के गांवों में तो स्थिति और अधिक चिंताजनक है।-अनूप यादव निवासी गांव नया नगला।
गांवों की टूटी-फूटी सड़कें बनवाने के लिए क्या करना चाहिए, कुछ समझ नहीं आ रहा है। चुनाव में अफसरों ने झूठे वादे कर वोट डलवा लिए, इसके बाद कुछ नहीं किया।-राजवीर माहौर निवासी चिंतापुर बदन।
शासन द्वारा लंबाई के मानकों के आधार पर प्राथमिकता तय की गई है, जिसके चलते एक किलोमीटर से कम लंबाई वाले मार्ग फिलहाल सूची से बाहर कर दिए गए हैं। कुछ सड़कों को स्वीकृति दे दी गई है, एक लावारिस सड़क के निर्माण की भी स्वीकृति मिल गई हैं।-संजीव कुमार शर्मा, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी।
जो भी लावारिस या छोटी सड़कें हमें दी जाएंगी, उन्हें आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। जिला पंचायत के पास बजट होगा तो निश्चित रूप से इन सड़कों को बनवाया जाएगा।-उमेश चंद्र पटेल, एएमओ जिला पंचायत।
केस-1-चिंतापुर बदन का रास्ता आज भी बदहाल
हाथरस विधानसभा क्षेत्र के गांव चिंतापुर बदन का रास्ता आज भी बदहाल है। इस रास्ते को लेकर लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान केंद्र पर चुनाव बहिष्कार की घोषणा की गई थी। मजरा त्रिलोकपुर को मिलाकर कुल 749 मतदाता होने के बाद भी कई घंटे तक एक भी व्यक्ति ने मतदान नहीं किया था। लोगों का कहना था कि सड़क की हालत बेहद खराब है। जनप्रतिनिधि गांव में नहीं आते तो उनके लिए मतदान क्यों करें।
केस-2-शेरपुर में नहीं रास्ता, लौट जाते हैं शादी वाले
हाथरस विधानसभा के गांव शेरपुर में अंदर जाने के लिए रास्ता नहीं है। हालात ये हैं कि बेटी वाले अपनी बेटियां गांव में नहीं ब्याह रहे। शादी की बात करने आने वाले भी रास्ता देखकर लौट जाते हैं तो वोट क्यों दें। यहां मतदाताओं की संख्या 671 है। रास्ता न होने के चलते यहां के मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव 2024 में चुनाव बहिष्कार किया था। मतदाताओं का कहना था कि उनके गांव का विकास नहीं हो रहा। कई साल बाद भी रास्ता नहीं है। यहां आश्वासन के बाद मतदान हुआ, लेकिन रास्ता आज तक नहीं बना।
केस-3-गढ़ी धारू में जर्जर सड़क बनी सिरदर्द
हाथरस विधानसभा के गांव गढ़ी धारू में सड़क निर्माण न होने पर लोकसभा चुनाव में बहिष्कार किया गया। मतदाताओं ने यहां मतदान शुरू होने के घंटों बाद तक बहिष्कार जारी रखा। लोगों का कहना था कि कई साल से सड़क खराब हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर मतदान शुरू हुआ, लेकिन सड़क की हालत आज भी खराब ही है।
केस-4- नया नगला में सड़क खराब
हाथरस विधानसभा के गांव नया नगला में लगभग 800 मतदाता हैं। यहां कई किलोमीटर की सड़क खराब होने के कारण लोगों ने लोकसभा मतदान का बहिष्कार कर अपना गुस्सा जताया। उनका कहना था कि रोड नहीं तो वोट नहीं। यहां मतदान कराने पहुंचे अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने अपनी समस्या रखी, लेकिन आज तक सड़क की समस्या जस की तस है।
यहां भी सड़क की समस्या पर हुआ था बहिष्कार
- सासनी के गांव नगला सेवा के बूथ संख्या-109 पर कुल मतदाता 453 थे। सड़क की समस्या पर सुबह से दोपहर तीन बजे तक मतदान का बहिष्कार किया गया था।
- सासनी के गांव ऊतरा के मतदान केंद्र पर कुल 1028 मतदाता थे। शाम 4:50 तक मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया था। एक बूथ पर तो मात्र चार मत डाले गए।
- सासनी के गांव सीकुर में भी सड़क की समस्या को लेकर लोकसभा चुनाव में दोपहर बाद बूथ संख्या 118 पर 12 मत पड़े थे एवं बूथ संख्या 119 पर 16 मत पड़े थे। यहां भी विरोध जताया गया था।
- सासनी के गांव खिटौली के बूथ संख्या 24 पर 1206 मतदाता थे। बूथ संख्या 25 पर 1166 मतदाता हैं। लोकसभा मतदान के दौरान दोपहर 3:30 बजे अधिकारियों के समझाने पर मतदान हुआ।
- सासनी के गांव छौक ततारपुर के बूथ संख्या 40 पर 747 मतदाता थे। यहां प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा लगा। दोपहर बाद दो मत डाले गए थे।