{"_id":"6ab1baffc6c5579437080913","slug":"indian-professionals-look-beyond-the-us-as-h1b-restrictions-reshape-career-choices-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिका में H-1B की सख्ती का असर: भारतीय पेशेवर यूरोप-एशिया की ओर मुड़े, स्वदेश लौटने का भी विकल्प","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अमेरिका में H-1B की सख्ती का असर: भारतीय पेशेवर यूरोप-एशिया की ओर मुड़े, स्वदेश लौटने का भी विकल्प
Tue, 22 Sep 2026 04:47 AM IST
राकेश कुमार
एजेंसी, शिकागो/सैन फ्रांसिस्को/नई दिल्ली।
एजेंसी, शिकागो/सैन फ्रांसिस्को/नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 22 Sep 2026 04:47 AM IST
सार
अमेरिका में H-1B वीजा नियमों में सख्ती के बीच भारतीय पेशेवरों और शोधकर्ताओं के दूसरे देशों का रुख करने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के मुताबिक अमेरिका से बाहर रहने वाले नए विदेशी फिजिक्स पीएचडी धारकों का अनुपात 2023-24 के 16% से बढ़कर 2024-25 में 29% हो गया। जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश विकल्प बन रहे हैं, जबकि कुछ भारतीय पेशेवर स्वदेश लौटने पर भी विचार कर रहे हैं।
विज्ञापन
एच1बी वीजा शुल्क
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिका में एच-1बी वीजा पर सख्ती और लगातार बदलते नियमों ने भारतीय पेशेवरों और शोधकर्ताओं के कॅरिअर विकल्पों को बुरी तरह प्रभावित किया है। बीते एक साल में वीजा शुल्क और प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के बीच भारतीय पेशेवर जर्मनी व ब्रिटेन जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। कुछ पेशेवर भारत लौटने का मन भी बना चुके हैं।
अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के ताजा आंकड़े इसके स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। भौतिकी में पीएचडी करने वाले विदेशी स्कॉलर्स के अमेरिका छोड़ने की दर 2023-24 के 16% से बढ़कर 2024-25 में 29% हो गई। यह तीन दशक में एक साल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। वहीं, 60% अमेरिकी विवि में विदेशी छात्रों के आवेदन में कमी आई है। चालू वित्त वर्ष के तो शुरुआती नौ महीने में वीजा आवेदन में 10% की बड़ी गिरावट आई है।
पलायन के दर्द तक पहुंची सपनों की जिंदगी
अमेरिकी मीडिया कंपनी बिजनेस इनसाइडर की पड़ताल में सामने आया कि अमेरिका में सपनों की जिंदगी से पलायन का दर्द कई भारतीयों की कहानी बन चुका है। शिकागो में काम कर रहीं वैज्ञानिक अनन्या जोशी को कंपनी ने एच-1बी स्पॉन्सरशिप से इन्कार दिया तो उन्हें जर्मनी शिफ्ट होना पड़ा। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स सुंजना रमना एच-1बी हासिल करने के लिए तीन बार प्रयास कर चुकी थीं। बाद में ब्रिटेन का हाई-पोटेंशियल वीजा हासिल कर लंदन में फिनटेक कंपनी में नौकरी हासिल की। वह कहती हैं, सपने को किसी एक देश से नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं और लक्ष्यों से जोड़ना चाहिए।
विज्ञापन
60% अमेरिकी विवि में विदेशी छात्रों के आवेदन में आई कमी
एच1-बी: भारतीय बड़े लाभार्थी
भारत -69.9% (2,83,772)
चीन-12.1% (49,161)
अन्य देश- 18.0%
विदेशी पेशेवर...नेशनल साइंस फाउंडेशन के मुताबिक अमेरिका के साइंस व इंजीनियरिंग कार्यबल में 22% विदेशी मूल के हैं। मास्टर डिग्री धारकों में 39% और पीएचडी धारकों में 46% वैज्ञानिक विदेशी मूल के हैं। एच-1बी के आवेदनों में 44.5% प्रोफेशनल-तकनीकी सेवाओं से, मैन्युफैक्चरिंग से 12.1%, आईटी से 9.9%, फाइनेंस से 9.0% जुड़े हैं।
एक लाख डॉलर शुल्क से मची अफरातफरी
ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल 20 सितंबर को एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दी थी। इस घोषणा के बाद एच-1बी कर्मचारियों और कंपनियों के बीच यात्रा और नौकरी को लेकर असमंजस पैदा हुआ। बाद की कानूनी प्रक्रिया में इस शुल्क के अमल पर रोक लगी, लेकिन सितंबर, 2026 में ट्रंप प्रशासन ने इस नीति को एक साल और बढ़ा दिया है।
लौटेगी प्रतिभा तो भारत को मिलेगा फायदा
अमेरिका में अवसरों की अनिश्चितता बढ़ने पर भारतीय पेशेवरों के लिए स्वदेश में कॅरिअर और उद्यमिता के विकल्प आकर्षक हो सकते हैं। भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की बड़ी संख्या पहले से ही देश में स्टार्टअप, आईटी, एआई और अनुसंधान क्षेत्रों से जुड़ी है। ऐसे में अवसर बढ़े हैं।
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार, 20 साल में विदेशी प्रतिभाओं का ऐसा पलायन नहीं देखा। शोधकर्ताओं को जोड़ने वाली पाइपलाइन योजनाबद्ध ढंग से कमजोर हो रही है।
विज्ञापन
अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के ताजा आंकड़े इसके स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। भौतिकी में पीएचडी करने वाले विदेशी स्कॉलर्स के अमेरिका छोड़ने की दर 2023-24 के 16% से बढ़कर 2024-25 में 29% हो गई। यह तीन दशक में एक साल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। वहीं, 60% अमेरिकी विवि में विदेशी छात्रों के आवेदन में कमी आई है। चालू वित्त वर्ष के तो शुरुआती नौ महीने में वीजा आवेदन में 10% की बड़ी गिरावट आई है।
विज्ञापन
पलायन के दर्द तक पहुंची सपनों की जिंदगी
अमेरिकी मीडिया कंपनी बिजनेस इनसाइडर की पड़ताल में सामने आया कि अमेरिका में सपनों की जिंदगी से पलायन का दर्द कई भारतीयों की कहानी बन चुका है। शिकागो में काम कर रहीं वैज्ञानिक अनन्या जोशी को कंपनी ने एच-1बी स्पॉन्सरशिप से इन्कार दिया तो उन्हें जर्मनी शिफ्ट होना पड़ा। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स सुंजना रमना एच-1बी हासिल करने के लिए तीन बार प्रयास कर चुकी थीं। बाद में ब्रिटेन का हाई-पोटेंशियल वीजा हासिल कर लंदन में फिनटेक कंपनी में नौकरी हासिल की। वह कहती हैं, सपने को किसी एक देश से नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं और लक्ष्यों से जोड़ना चाहिए।
विज्ञापन
60% अमेरिकी विवि में विदेशी छात्रों के आवेदन में आई कमी
एच1-बी: भारतीय बड़े लाभार्थी
भारत -69.9% (2,83,772)
चीन-12.1% (49,161)
अन्य देश- 18.0%
विदेशी पेशेवर...नेशनल साइंस फाउंडेशन के मुताबिक अमेरिका के साइंस व इंजीनियरिंग कार्यबल में 22% विदेशी मूल के हैं। मास्टर डिग्री धारकों में 39% और पीएचडी धारकों में 46% वैज्ञानिक विदेशी मूल के हैं। एच-1बी के आवेदनों में 44.5% प्रोफेशनल-तकनीकी सेवाओं से, मैन्युफैक्चरिंग से 12.1%, आईटी से 9.9%, फाइनेंस से 9.0% जुड़े हैं।
एक लाख डॉलर शुल्क से मची अफरातफरी
ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल 20 सितंबर को एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दी थी। इस घोषणा के बाद एच-1बी कर्मचारियों और कंपनियों के बीच यात्रा और नौकरी को लेकर असमंजस पैदा हुआ। बाद की कानूनी प्रक्रिया में इस शुल्क के अमल पर रोक लगी, लेकिन सितंबर, 2026 में ट्रंप प्रशासन ने इस नीति को एक साल और बढ़ा दिया है।
लौटेगी प्रतिभा तो भारत को मिलेगा फायदा
अमेरिका में अवसरों की अनिश्चितता बढ़ने पर भारतीय पेशेवरों के लिए स्वदेश में कॅरिअर और उद्यमिता के विकल्प आकर्षक हो सकते हैं। भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की बड़ी संख्या पहले से ही देश में स्टार्टअप, आईटी, एआई और अनुसंधान क्षेत्रों से जुड़ी है। ऐसे में अवसर बढ़े हैं।
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार, 20 साल में विदेशी प्रतिभाओं का ऐसा पलायन नहीं देखा। शोधकर्ताओं को जोड़ने वाली पाइपलाइन योजनाबद्ध ढंग से कमजोर हो रही है।