शायद लौट आए सांस: कब्र से निकाला शव, नीम के पत्तों और उपलों में दबाकर रखा, झाड़ फूंक कर बायगीर बंधाते रहे आस
परिजन इस अंधविश्वास में आ गए और दफनाने के कुछ देर बाद ही 21 अक्तूबर की दोपहर ग्रामीणों की मदद से शव को कब्र से निकालकर मथुरा ले गए। वहां 23 अक्तूबर तक शव नीम के पत्तों और उपलों में दबाकर रखा गया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
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चार दिन पहले हसायन क्षेत्र के गांव इटरनी निवासी नरेंद्र के बेटे कपिल (12) की सर्पदंश से मौत हो गई, परिजनों ने शव दफना भी दिया। किसी ने बता दिया कि पानी गांव मथुरा के बायगीर उसे जिंदा कर सकते हैं। शायद कपिल की सांस लौट आए, बायगीर पर अंधविश्वास के चलते परिजनों ने शव कब्र से निकाल लिया और झाड़ फूंक कराते रहे।
सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम कराने के बाद शुक्रवार को परिजनों को सौंप दिया है। नरेंद्र मेहनत-मजूदरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन पर दो बेटे व दो बेटियों में कपिल सबसे छोटा था। नरेंद्र के मुताबिक कपिल रविवार रात को उनके पास सोया था। सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन-चार बजे वह अचानक रोने लगा और बाएं हाथ की छोटी अंगुली पर किसी जीव के काटने की बात बताई।
नरेंद्र ने बताया कि उसे सर्प ने डसा था। सुबह तक उसे गले व पेट में जलन होने लगी। परिजन सोमवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसायन पर लेकर गए, जहां उसे चिकित्सक मृत घोषित कर दिया गया। बेटे की सांस लौटने की आस में परिवार ने तीन से चार घंटे गांव में ही बायगीर से इलाज कराया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस पर बच्चे के शव को दफना दिया गया था। इसी बीच किसी ने बताया कि मथुरा में एक बायगीर है, जो उसे जिंदा कर सकता है।
परिजन इस अंधविश्वास में आ गए और दफनाने के कुछ देर बाद ही 21 अक्तूबर की दोपहर ग्रामीणों की मदद से शव को कब्र से निकालकर मथुरा ले गए। वहां 23 अक्तूबर तक शव नीम के पत्तों और उपलों में दबाकर रखा गया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। 23 अक्तूबर शाम परिजन शव गांव ले आए। हसायन पुलिस को भी इसकी सूचना मिल गई थी। शव आते ही एसएचओ गिरीशचंद्र गौतम फोर्स के साथ गांव पहुंच गए। परिजन व ग्रामीणों से पोस्टमार्टम के लिए कहा, लेकिन वे आनाकानी कर रहे थे। पुलिस ने सख्ती की तो 24 अक्तूबर सुबह पोस्टमार्टम कराने की बात कही। इन चार दिनों में शव नीला पड़ चुका था।
यदि किसी चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया है तो उसे जिंदा नहीं किया जा सकता। बायगीरों से इलाज न कराएं, सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचे। एंटी वेनम वैक्सीन ही जान बचा सकती है।-डॉक्टर सूर्यप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल
सर्प दंश से बच्चे की मौत की सूचना पुलिस को बृहस्पतिवार की शाम को मिली थी। इस आधार पर शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।-जेएन अस्थाना, सीओ सिकंदराराऊ
इलाज मिलने में हुई देरी
चिकित्सकों का कहना है कि संर्पदंश के मामलों में तत्काल पीड़ित को अस्पताल ले जाना चाहिए। 30 मिनट से एक घंटे भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। एंटी वेनम इंजेक्शन भी चार घंटे के भीतर ही ज्यादा प्रभावी होता है, जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, परिणाम उतना ही बेहतर होगा, कपिल के मामले में इलाज में देरी हुई है। उसे 20 अक्तूबर को तड़के साढ़े तीन-चार बजे सांप ने डसा। परिजन दिन निकलने का इंतजार करते रहे। सुबह छह बजे उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, आठ बजे चिकित्सक आए तो उन्होंने परीक्षण किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसे मृत घोषित कर दिया।
100 वर्षों में नहीं हुई सर्प दंश से मौत
अंधविश्वास कहें या फिर पुत्र मोह, जिसके चलते परिवार शव लेकर भटकता रहा। नरेंद्र के पड़ोसी बलवीर ने दावा किया पिछले सौ वर्षों में गांव में एक भी मौत सर्प दंश से नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हम बड़े-बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि दूध की धार से गांव को चारों ओर से तंत्र किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में सर्प दंश की घटनाएं हुईं, लेकिन किसी की मृत्यु नहीं हुई। इसी अंधविश्वास के चलते परिजनों को यकीन था कि उनका बेटा पुन: जिंदा हो सकता है।