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Shootout in Train: सौम्य व्यवहार का है चेतन, आखिर क्यों की ट्रेन में गोलीबारी, हर जुबां पर ये सवाल

Mon, 31 Jul 2023 09:05 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 31 Jul 2023 09:05 PM IST
सार

लोगों ने मथुरा में चेतन के परिजनों से भी संपर्क करना शुरू कर दिया। चेतन के दोस्तों को फोन करके भी इस घटना के बारे में जानकारी हासिल करने में जुट गए। लोग यही जानने चाह रहे थे कि चेतन को इतना गुस्सा आखिर किस बात पर आया कि उसने ट्रेन में यात्रियों की जान की परवाह न करते हुए गोलीबारी कर दी।

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Chetan is of gentle behavior, why the firing in the train
फुटबॉल खिलाड़ी रहे चेतन का फोटो - फोटो : परिवार

विस्तार

जयपुर-मुंबई एक्सप्रेस ट्रेन में आरपीएफ कांस्टेबल चेतन द्वारा की गई घटना की खबर जैसे ही उसके पैतृक गांव मीतई पहुंची तो वहां इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यही चर्चा करते नजर आए कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जो सौम्य व्यवहार के चेतन ने गोलीबारी कर दी। हर कोई इसके पीछे की वजह जानने को आतुर नजर आया। लोग अपने अपने माध्यमों से चेतन के बारे में जानने में जुट गए। 

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चेतन जाट के पैत्रिक गांव मीतई में जानकारी करती कोतवाली चन्दपा  कोतवाल संजय सिंह
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लोगों ने मथुरा में चेतन के परिजनों से भी संपर्क करना शुरू कर दिया। चेतन के दोस्तों को फोन करके भी इस घटना के बारे में जानकारी हासिल करने में जुट गए। लोग यही जानने चाह रहे थे कि चेतन को इतना गुस्सा आखिर किस बात पर आया कि उसने ट्रेन में यात्रियों की जान की परवाह न करते हुए गोलीबारी कर दी। उसने यात्रियों की जान जाने के बारे में नहीं सोचा।इस तरह के तमाम सवाल लोगों के जेहन में उठ रहे थे। परिजन भी इस घटना को लेकर वजह जानने के लिए आतुर हैं।
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पिता की मृत्यु के बाद लगी थी चेतन की नौकरी
हाथरस। चेतन के पिता बच्चू सिंह भी आरपीएफ रतलाम में एसआई के पद पर तैनात थे। वर्ष 2007 में बच्चू सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इसके बाद बड़े बेटे चेतन को वर्ष 2009 में पिता की जगह मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिली। चेतन का एक बेटा और एक बेटी है। चेतन का बेटा सारांश (8 वर्ष) और बेटी काव्या (6 वर्ष) चेतन की मां और पत्नी रेनू के साथ मथुरा में रहते हैं। पिता की मौत के बाद चेतन अपने परिवार के साथ मथुरा में आकर रहने लगा। चेतन का छोटा भाई लोकेश है और बड़ी बहन बबली है। लोकेश गाड़ी चालक है। वह निजी गाड़ी चलाता है।

मीतई में रहते हैं चेतन के ताऊ-चाचा

चेतन के पैतृक गांव मीतई में ताऊ दिनेश सिंह और भगवान सिंह रहते हैं। दोनों रेलवे से रिटायर्ड हैं। चाचा महेंद्रपाल सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं। वह भी मीतई में रहते हैं। सेना से सेवानिवृत्त एक और चाचा मुकेश बाबू मथुरा में रहते हैं। एक चाचा दलपत सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। चेतन के पिता बच्चू सिंह नौकरी की अवधि में अपने गांव से रतलाम जाकर रहने लग गए थे।

ट्रेन में गोलीबारी के आरोपी चेतन के पैतृक गांव मीतई में उसके ताऊ भगवान सिंह से जानकारी करते चंदपा कोतवाल संजय सिंह।

गांव में अब चेतन का महज एक प्लॉट
चेतन के पिता गांव की करीब ढाई बीघा जमीन को बेचकर रतलाम में परिवार सहित शिफ्ट हो गए थे। हालांकि गांव में अभी चेतन का एक सड़क किनारे करीब 70 वर्ग गज का प्लॉट है। यह प्लॉट खाली पड़ा है।

फुटबॉल खिलाड़ी था चेतन
चेतन फुटबॉल का बेहतरीन खिलाड़ी था। चेतन रेलवे की ओर से कई खेलों में खेलने के लिए कई स्थानों पर गया था। यहां तक कि खेल मंत्रालय की ओर से होने वाले खेलों में चेतन ने अपना प्रदर्शन दिया था। कई खेलों से चेतन ने मेडल जीतकर गांव के साथ साथ रेलवे का भी मान रखा था। 

डेढ़ साल पहले पैतृक गांव आया था चेतन
कांस्टेबल चेतन पैतृक गांव कम ही आया करता था। चाचा के बेटे की शादी में भी चेतन गांव में नहीं आ पाया था। परिजनों ने बताया कि शायद छुट्टी न मिल पाने के कारण चेतन नहीं आ पाया था। ताऊ भगवान सिंह ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले चेतन गांव आया था। चेतन का स्वभाव मृदुल था। जब डेढ़ साल पहले वह आया तो उसने आते ही उनके और परिवार के सभी बुजुर्गों के पांव छुए थे।

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