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जिला पंचायत में फिर लहराया नीला परचम
अमर उजाला ब्यूूराे/हाथ्ारस
Updated Mon, 02 Nov 2015 11:28 PM IST
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जिला पंचायत चुनाव में लगातार तीसरी बार बसपा का परचम लहराया है। जिले के 25 में से 13 वार्डों में बसपा समर्थित उम्मीदवादरों ने जीत हासिल की है, जोकि बहुमत के लिए पर्याप्त संख्या है। चुनाव में भाजपा ने भी संतोषजनक प्रदर्शन किया है और पांच सीटों पर जीत हासिल की है। सत्ताधारी सपा ने भी पांच सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि एक-एक सीट राष्ट्रीय लोकदल और निर्दलीय प्रत्याशी ने झटकी है। कांग्रेस इस बार भी जिला पंचायत में अपना खाता नहीं खोल सकी।
लगातार तीसरी बार बसपा जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने जा रही है। विधानसभा चुनाव से पहले मिली इस जीत ने जहां बसपाइयों को उत्साह से लबरेज कर दिया है, वहीं भाजपा, सपा, रालोद और कांग्रेस खेमों को इस हार से तगड़ा झटका लगा है। हर बार की तरह बसपा की इस जीत के नायक पूर्व ऊर्जा मंत्री और सिकंदराराऊ के विधायक रामवीर उपाध्याय ही रहे हैं। उनके परिवार के चारों सदस्यों को इस चुनाव में शानदार जीत मिली है। वार्ड 11 से उनके भाई और जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रबल दावेदार रामेश्वर उपाध्याय, वार्ड 12 से उनकी पत्नी कल्पना उपाध्याय, वार्ड 19 से उनके दूसरे भाई विनोद उपाध्याय और वार्ड 21 से उनकी पत्नी सरोज उपाध्याय ने भी फतेह हासिल की है। यही नहीं विधायक गेंदालाल चौधरी ने अपने बेटे पंकज चौधरी को भी चुनाव जिताकर पार्टी में अपनी अहमियत साबित कर दी है।
ये भी जीते बसपा के समर्थन से
इसके अलावा बसपा के समर्थन से वार्ड 25 से ललिता देवी, वार्ड 22 से मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष रामवती बघेल, वार्ड नंबर एक से सुनीता कुमारी, वार्ड तीन से सुरेंद्र बघेल, वार्ड 10 से इंद्रजीत कुशवाहा, वार्ड 17 से राज चौधरी, वार्ड 14 से बृजमोहन राही और वार्ड 15 से प्रमोद उर्फ संजय कुमार ने भी जीत हासिल की है। इनके अलावा एक निर्दलीय उम्मीदवार भी बसपा के संपर्क में आ चुका है।
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सादाबाद विधायक को नतीजों से बड़ा झटका
सत्ताधारी सपा को इन चुनाव नतीजों ने तगड़ा झटका दिया है। विधायक देवेंद्र अग्रवाल की पत्नी लता अग्रवाल वार्ड संख्या 19 और 12 से चुनाव हार गईं। दोनों ही जगह उन्हें बसपा प्रत्याशियों के मुकाबले करारी हार का सामना करना पड़ा। उनके भतीजे अतुल अग्रवाल को भी वार्ड 18 से करारी हार मिली है। विधायक की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर लगी थी।
सिर्फ पांच सीटें जीत सकी सत्ताधारी सपा
सपा खेमे के लिए संतोष की बात यह रही कि पांच सीटों से उसके समर्थित प्रत्याशी जीते हैं। वार्ड दो से राजाराम, वार्ड चार से ओमवती यादव, वार्ड 13 से श्याम सिंह प्रधान, वार्ड संख्या 20 से पूर्व सपा जिलाध्यक्ष मनोज यादव की पत्नी मीनू यादव, वार्ड 23 से सीमा अहेरिया चुनाव जीतने में कामयाब रही हैं।
भाजपा को भी मिली पांच सीटें
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर मजबूत दावा ठोक रही भाजपा को भी इस चुनाव में करारी शिकस्त मिली है। उसे भी पांच सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। उसके समर्थन से वार्ड सात से आशा देवी, वार्ड आठ से सत्यपाल, वार्ड 18 से सतेंद्र फौजी, वार्ड पांच से मुन्नी देवी, वार्ड 24 से निर्मला बघेल चुनाव जीती हैं।
गुड्डू चौधरी ने बचाई रालोद की लाज
जिला पंचायत में पिछली बार सबसे बड़े विपक्ष की भूमिका में रहे राष्ट्रीय लोकदल को मुंह की खानी पड़ी है। इस पार्टी के समर्थन से वार्ड 16 से प्रदीप चौधरी उर्फ गुड्डू ही चुनाव जीतने में सफल हो सके हैं, जबकि बाकी जगहों पर रालोद प्रत्याशियों को करारी हार देखनी पड़ी है।
कांग्रेस की सबसे ज्यादा दुर्गति
कांग्रेस की इस चुनाव में सबसे ज्यादा दुर्गति हुई है। इस बार भी पार्टी समर्थित कोई प्रत्याशी अपना खाता नहीं खोल सका है। हालांकि पार्टी ने भी इस बार किसी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव नतीजे कांग्रेस खेमे के लिए बड़ा सबक तो हैं हीं।
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लगातार तीसरी बार बसपा जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने जा रही है। विधानसभा चुनाव से पहले मिली इस जीत ने जहां बसपाइयों को उत्साह से लबरेज कर दिया है, वहीं भाजपा, सपा, रालोद और कांग्रेस खेमों को इस हार से तगड़ा झटका लगा है। हर बार की तरह बसपा की इस जीत के नायक पूर्व ऊर्जा मंत्री और सिकंदराराऊ के विधायक रामवीर उपाध्याय ही रहे हैं। उनके परिवार के चारों सदस्यों को इस चुनाव में शानदार जीत मिली है। वार्ड 11 से उनके भाई और जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रबल दावेदार रामेश्वर उपाध्याय, वार्ड 12 से उनकी पत्नी कल्पना उपाध्याय, वार्ड 19 से उनके दूसरे भाई विनोद उपाध्याय और वार्ड 21 से उनकी पत्नी सरोज उपाध्याय ने भी फतेह हासिल की है। यही नहीं विधायक गेंदालाल चौधरी ने अपने बेटे पंकज चौधरी को भी चुनाव जिताकर पार्टी में अपनी अहमियत साबित कर दी है।
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ये भी जीते बसपा के समर्थन से
इसके अलावा बसपा के समर्थन से वार्ड 25 से ललिता देवी, वार्ड 22 से मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष रामवती बघेल, वार्ड नंबर एक से सुनीता कुमारी, वार्ड तीन से सुरेंद्र बघेल, वार्ड 10 से इंद्रजीत कुशवाहा, वार्ड 17 से राज चौधरी, वार्ड 14 से बृजमोहन राही और वार्ड 15 से प्रमोद उर्फ संजय कुमार ने भी जीत हासिल की है। इनके अलावा एक निर्दलीय उम्मीदवार भी बसपा के संपर्क में आ चुका है।
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सादाबाद विधायक को नतीजों से बड़ा झटका
सत्ताधारी सपा को इन चुनाव नतीजों ने तगड़ा झटका दिया है। विधायक देवेंद्र अग्रवाल की पत्नी लता अग्रवाल वार्ड संख्या 19 और 12 से चुनाव हार गईं। दोनों ही जगह उन्हें बसपा प्रत्याशियों के मुकाबले करारी हार का सामना करना पड़ा। उनके भतीजे अतुल अग्रवाल को भी वार्ड 18 से करारी हार मिली है। विधायक की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर लगी थी।
सिर्फ पांच सीटें जीत सकी सत्ताधारी सपा
सपा खेमे के लिए संतोष की बात यह रही कि पांच सीटों से उसके समर्थित प्रत्याशी जीते हैं। वार्ड दो से राजाराम, वार्ड चार से ओमवती यादव, वार्ड 13 से श्याम सिंह प्रधान, वार्ड संख्या 20 से पूर्व सपा जिलाध्यक्ष मनोज यादव की पत्नी मीनू यादव, वार्ड 23 से सीमा अहेरिया चुनाव जीतने में कामयाब रही हैं।
भाजपा को भी मिली पांच सीटें
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर मजबूत दावा ठोक रही भाजपा को भी इस चुनाव में करारी शिकस्त मिली है। उसे भी पांच सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। उसके समर्थन से वार्ड सात से आशा देवी, वार्ड आठ से सत्यपाल, वार्ड 18 से सतेंद्र फौजी, वार्ड पांच से मुन्नी देवी, वार्ड 24 से निर्मला बघेल चुनाव जीती हैं।
गुड्डू चौधरी ने बचाई रालोद की लाज
जिला पंचायत में पिछली बार सबसे बड़े विपक्ष की भूमिका में रहे राष्ट्रीय लोकदल को मुंह की खानी पड़ी है। इस पार्टी के समर्थन से वार्ड 16 से प्रदीप चौधरी उर्फ गुड्डू ही चुनाव जीतने में सफल हो सके हैं, जबकि बाकी जगहों पर रालोद प्रत्याशियों को करारी हार देखनी पड़ी है।
कांग्रेस की सबसे ज्यादा दुर्गति
कांग्रेस की इस चुनाव में सबसे ज्यादा दुर्गति हुई है। इस बार भी पार्टी समर्थित कोई प्रत्याशी अपना खाता नहीं खोल सका है। हालांकि पार्टी ने भी इस बार किसी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव नतीजे कांग्रेस खेमे के लिए बड़ा सबक तो हैं हीं।