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Hathras News: डीएनए रिपोर्ट के इंतजार में कब्र में दफन शव
Thu, 28 May 2026 02:17 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 28 May 2026 02:17 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
सासनी क्षेत्र के गांव लहौर्रा निवासी नौरंगीलाल अपने जवान बेटे सुभाष का शव पाने के लिए भटक रहे हैं। सुभाष का शव 17 दिन पहले गलत शिनाख्त के कारण दफना दिया गया था। मौत के 20 दिन बाद भी उनकी अंत्येष्टि नहीं हो सकी है। पिता थाना, पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
नौरंगीलाल का कहना है कि पोस्टमार्टम, हाथ पर बने टैटू और पहने कड़े से शव के धर्म का पता चल जाना चाहिए था। पुलिस ने गहन छानबीन करने की बजाय प्रकरण को निपटाने का प्रयास किया। सुभाष (32) लहौर्रा के निवासी थे। लापता होने से 10 दिन पहले सासनी में अपनी बहन के यहां रह रहे थे। सुभाष सासनी की एक फैक्टरी में काम करते थे।
पांच मई की सुबह वह फैक्टरी के लिए पैदल निकले, फिर लापता हो गए। सीसीटीवी कैमरे में उन्हें सुबह 7:56 बजे तक पैदल जाते देखा गया था। नौ मई को सीसीटीवी फुटेज में दिखी जगह से लगभग 100 मीटर दूर एक क्षत-विक्षत शव मिला। 10 मई को एक मुस्लिम परिवार ने शव को हाशिम समझकर दफना दिया था। तब से नौरंगीलाल अपने बेटे के शव के लिए भटक रहे हैं।
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डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
नौरंगीलाल का डीएनए सैंपल 15 दिन पहले फॉरेंसिक साइंटिफिक लैबोरेटरी, आगरा भेजा गया था। 15 दिनों में भी डीएनए रिपोर्ट नहीं आ सकी है। परिवार के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है। पुलिस अधीक्षक के आश्वासन के बाद भी शव अभी तक नहीं मिला है।
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे परिजन
डीएनए रिपोर्ट न आने पर सासनी पुलिस ने जिलाधिकारी के आदेश पर कार्रवाई की। शव निकालने के लिए सुभाष के परिवार से गांव के 10-12 लोगों से शपथ पत्र मांगे गए थे। नौरंगीलाल ने बताया कि शपथ पत्र के बाद भी शव नहीं निकाला गया। इस पर बुधवार को परिवार ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। पिता ने बिलखते हुए शव दिलाने की मांग की। डीएम ने बताया कि फाइल मंगलवार शाम को उनके पास पहुंची है और उन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हाशिम हैदराबाद में मिला
शव को गढ़ौआ के साबिर ने अपने बेटे हाशिम का समझकर शिनाख्त की थी। साबिर ने गांव के सात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। बाद में पता चला कि हाशिम हैदराबाद में है और वह जिंदा है। पुलिस को वहां मिली वीडियो फुटेज और कपड़ों से इसकी पुष्टि हो गई। सीओ सिटी हिमांशु माथुर ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर से भी वैधानिक कार्रवाई प्रक्रिया में है।
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नौरंगीलाल का कहना है कि पोस्टमार्टम, हाथ पर बने टैटू और पहने कड़े से शव के धर्म का पता चल जाना चाहिए था। पुलिस ने गहन छानबीन करने की बजाय प्रकरण को निपटाने का प्रयास किया। सुभाष (32) लहौर्रा के निवासी थे। लापता होने से 10 दिन पहले सासनी में अपनी बहन के यहां रह रहे थे। सुभाष सासनी की एक फैक्टरी में काम करते थे।
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पांच मई की सुबह वह फैक्टरी के लिए पैदल निकले, फिर लापता हो गए। सीसीटीवी कैमरे में उन्हें सुबह 7:56 बजे तक पैदल जाते देखा गया था। नौ मई को सीसीटीवी फुटेज में दिखी जगह से लगभग 100 मीटर दूर एक क्षत-विक्षत शव मिला। 10 मई को एक मुस्लिम परिवार ने शव को हाशिम समझकर दफना दिया था। तब से नौरंगीलाल अपने बेटे के शव के लिए भटक रहे हैं।
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डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
नौरंगीलाल का डीएनए सैंपल 15 दिन पहले फॉरेंसिक साइंटिफिक लैबोरेटरी, आगरा भेजा गया था। 15 दिनों में भी डीएनए रिपोर्ट नहीं आ सकी है। परिवार के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है। पुलिस अधीक्षक के आश्वासन के बाद भी शव अभी तक नहीं मिला है।
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे परिजन
डीएनए रिपोर्ट न आने पर सासनी पुलिस ने जिलाधिकारी के आदेश पर कार्रवाई की। शव निकालने के लिए सुभाष के परिवार से गांव के 10-12 लोगों से शपथ पत्र मांगे गए थे। नौरंगीलाल ने बताया कि शपथ पत्र के बाद भी शव नहीं निकाला गया। इस पर बुधवार को परिवार ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। पिता ने बिलखते हुए शव दिलाने की मांग की। डीएम ने बताया कि फाइल मंगलवार शाम को उनके पास पहुंची है और उन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हाशिम हैदराबाद में मिला
शव को गढ़ौआ के साबिर ने अपने बेटे हाशिम का समझकर शिनाख्त की थी। साबिर ने गांव के सात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। बाद में पता चला कि हाशिम हैदराबाद में है और वह जिंदा है। पुलिस को वहां मिली वीडियो फुटेज और कपड़ों से इसकी पुष्टि हो गई। सीओ सिटी हिमांशु माथुर ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर से भी वैधानिक कार्रवाई प्रक्रिया में है।