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छह माह के बच्चे से बिछड़कर बिलख उठे दादा-दादी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो,सहपऊ (हाथरस)।
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:48 AM IST
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छह माह के बच्चे को माता-पिता को सौंपते दादा और दादी।
- फोटो : Amar Ujala
क्षेत्र के गांव महरारा निवासी कमरुद्दीन खां एवं उनकी पत्नी को गृह क्लेश के कारण अपने छह माह के नाती को मजबूरन उसके पिता एवं माता को सौंपना पड़ा। नाती को सौंपते समय सभी परिजनों की आंखों में आंसू बह निकले।
कमरुद्दीन के बड़े पुत्र उस्मान की शादी दो वर्ष पूर्व फीरोजाबाद जिले के नगर शिकोहाबाद निवासी छिद्दन अली की बेटी रुकसाद के साथ धूमधाम से हुई थी। कुछ समय तक तो सब ठीक-ठाक रहा, लेकिन शादी के दो माह बाद ही उनकी पुत्रवधू ने घर में क्लेश करना शुरू कर दिया। इस दौरान उसके एक पुत्र भी पैदा हुआ। पैदा होने के बाद से ही इस बच्चे रिहान की देखभाल बाबा और दादी ने की। उस्मान ने भी अपनी पत्नी को काफी समझाया, लेकिन वह मानने तैयार नहीं हुई।
मामला एसपी कार्यालय तक पहुंच गया, जहां पति-पत्नी ने प्रार्थना पत्र देकर उनके पुत्र को उनको दिलाने की मांग की। एसपी कार्यालय ने उस प्रार्थना पत्र को कोतवाली में समाधान के लिए भेज दिया। पुलिस ने सभी को कोतवाली बुला लिया । उनके साथ गांव से अन्य लोग भी आ गए। सभी लोगों ने भी उस्मान की पत्नी को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं मानी तो लिखित में उन लोगों ने बच्चा उनको सौंप दिया। जो सामान उसने अपने सास एवं ससुर से मांगा, वह भी उसे सौंप दिया। जब छह माह के रिहान को उसके मां-बाप को सौंपा जा रहा था तो पूरा परिवार रो पड़ा।
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कमरुद्दीन के बड़े पुत्र उस्मान की शादी दो वर्ष पूर्व फीरोजाबाद जिले के नगर शिकोहाबाद निवासी छिद्दन अली की बेटी रुकसाद के साथ धूमधाम से हुई थी। कुछ समय तक तो सब ठीक-ठाक रहा, लेकिन शादी के दो माह बाद ही उनकी पुत्रवधू ने घर में क्लेश करना शुरू कर दिया। इस दौरान उसके एक पुत्र भी पैदा हुआ। पैदा होने के बाद से ही इस बच्चे रिहान की देखभाल बाबा और दादी ने की। उस्मान ने भी अपनी पत्नी को काफी समझाया, लेकिन वह मानने तैयार नहीं हुई।
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मामला एसपी कार्यालय तक पहुंच गया, जहां पति-पत्नी ने प्रार्थना पत्र देकर उनके पुत्र को उनको दिलाने की मांग की। एसपी कार्यालय ने उस प्रार्थना पत्र को कोतवाली में समाधान के लिए भेज दिया। पुलिस ने सभी को कोतवाली बुला लिया । उनके साथ गांव से अन्य लोग भी आ गए। सभी लोगों ने भी उस्मान की पत्नी को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं मानी तो लिखित में उन लोगों ने बच्चा उनको सौंप दिया। जो सामान उसने अपने सास एवं ससुर से मांगा, वह भी उसे सौंप दिया। जब छह माह के रिहान को उसके मां-बाप को सौंपा जा रहा था तो पूरा परिवार रो पड़ा।
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