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निजी स्कूलों की मनमानी पर फूटा गुस्सा
अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
Updated Sat, 08 Apr 2017 11:37 PM IST
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बीएलएस स्कूल में अभिभावकों के साथ बैठक करते प्रबंधक।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शनिवार को अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। यूनिवर्सल ह्यूमन राइट्स काउंसिल के बैनरतले हुए विरोध प्रदर्शन में अभिभावकों ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई। अभिभावकों ने पीड़ा के साथ आक्रोश भी जाहिर किया।
विरोध प्रदर्शन के तहत काफी अभिभावकों ने बीएलएस स्कूल पर एकत्रित होकर अपनी पीड़ा और आक्रोश जाहिर किया। जिला महासचिव शैलेंद्र सांवलिया ने बताया कि स्कूल प्रबंधक का व्यवहार तानाशाहीभरा रहा। वह एनसीआरटी की किताबें लगाने को तैयार ही नहीं हैं। अभिभावक सेंट फ्रांसिस स्कूल में भी पहुंचे, लेकिन स्कूल में पेपर होने की वजह से फादर से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके अलावा अन्य कई स्कूलों में अंदर किताबों की बिक्री होने पर भी आक्रोश जाहिर किया गया। राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि शिक्षा को उद्योग बना दिया है। गरीब बच्चों को सही शिक्षा नहीं मिल पा रही।
शिक्षा में समानता का अधिकार खत्म हो गया है। वर्तमान में अधिकतर अभिभावक जोड़ तोड़ कर बच्चों को पब्लिक और कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। स्कूल इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। प्रति वर्ष फीस बढ़ाई जा रही है। अभिभावकों को चिह्नित प्रकाशकों की महंगी किताबें और तय दुकानों से यूनिफार्म खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। यह भी नहीं, अभिभावक किसी स्कूल में बच्चे का एक बार दाखिला करा दें आगे की कक्षाओं में सहूलियत मिल जाए। एक ही स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से प्रत्येक कक्षा में प्रवेश लेने पर शुल्क लिया जा रहा है। जबकि प्रवेश शुल्क एक बार ही लिया जाना चाहिए।
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इसके अलावा स्लेवस, फीस, यूनिफॉर्म, बैग, जूते, डोनेशन, खेल, फिटनेस, मनारंजन एवं टूर के नाम पर मनमाने तरीके से अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। एनसीईआरटी की किताबें न लगाकर प्राइवेट प्रकाशकों से डील कर मोटा कमीशन लेकर चुनिंदा दुकानदारों से सिलेबस की बिक्री करवाई जा रही है। इस मौके पर सतीश सोलंकी, विजय सिंह प्रेमी, संजीव कुमार वार्ष्णेय, विमलेश बंसल, बाल प्रकाश, आयोग दीपक, लव वार्ष्णेय, भानु प्रकाश वार्ष्णेय, सौरभ सिंघल, अमित गर्ग, गोरांग सहित काफी अभिभावक मौजूद थे।
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विरोध प्रदर्शन के तहत काफी अभिभावकों ने बीएलएस स्कूल पर एकत्रित होकर अपनी पीड़ा और आक्रोश जाहिर किया। जिला महासचिव शैलेंद्र सांवलिया ने बताया कि स्कूल प्रबंधक का व्यवहार तानाशाहीभरा रहा। वह एनसीआरटी की किताबें लगाने को तैयार ही नहीं हैं। अभिभावक सेंट फ्रांसिस स्कूल में भी पहुंचे, लेकिन स्कूल में पेपर होने की वजह से फादर से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके अलावा अन्य कई स्कूलों में अंदर किताबों की बिक्री होने पर भी आक्रोश जाहिर किया गया। राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि शिक्षा को उद्योग बना दिया है। गरीब बच्चों को सही शिक्षा नहीं मिल पा रही।
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शिक्षा में समानता का अधिकार खत्म हो गया है। वर्तमान में अधिकतर अभिभावक जोड़ तोड़ कर बच्चों को पब्लिक और कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। स्कूल इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। प्रति वर्ष फीस बढ़ाई जा रही है। अभिभावकों को चिह्नित प्रकाशकों की महंगी किताबें और तय दुकानों से यूनिफार्म खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। यह भी नहीं, अभिभावक किसी स्कूल में बच्चे का एक बार दाखिला करा दें आगे की कक्षाओं में सहूलियत मिल जाए। एक ही स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से प्रत्येक कक्षा में प्रवेश लेने पर शुल्क लिया जा रहा है। जबकि प्रवेश शुल्क एक बार ही लिया जाना चाहिए।
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इसके अलावा स्लेवस, फीस, यूनिफॉर्म, बैग, जूते, डोनेशन, खेल, फिटनेस, मनारंजन एवं टूर के नाम पर मनमाने तरीके से अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। एनसीईआरटी की किताबें न लगाकर प्राइवेट प्रकाशकों से डील कर मोटा कमीशन लेकर चुनिंदा दुकानदारों से सिलेबस की बिक्री करवाई जा रही है। इस मौके पर सतीश सोलंकी, विजय सिंह प्रेमी, संजीव कुमार वार्ष्णेय, विमलेश बंसल, बाल प्रकाश, आयोग दीपक, लव वार्ष्णेय, भानु प्रकाश वार्ष्णेय, सौरभ सिंघल, अमित गर्ग, गोरांग सहित काफी अभिभावक मौजूद थे।