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अस्पताल की लापरवाही से हुआ एड्स, आठ साल से नहीं मिला न्याय

Thu, 13 Sep 2018 12:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस। Updated Thu, 13 Sep 2018 12:01 AM IST
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AIDS from hospital's carelessness, justice not found for eight years
एचआईवी एड्स
अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल की लापरवाही से एक एचआईवी पाजिटिव महिला जिंदगी और मौत से लड़ रही है। प्रसव के दौरान संक्रमित ब्लड चढ़ने से महिला एचआईवी संक्रमित हो गई। पति अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगा चुका है, लेकिन उसकी अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।  
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विकास खंड मुरसान के एक गांव की एक महिला ने आठ वर्ष पहले अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। यहां उसे ब्लड भी चढ़ाया गया। यहां से वह अपने घर आ गई, लेकिन स्वास्थ्य लगातार गिरता गया।
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जब महिला के स्वास्थ्य में कोई सुधार होते नजर नहीं आया तो पति उसे आगरा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां एचआईवी की जांच के लिए ब्लड सैंपल मुंबई भेजे गए, जिसमें महिला के एचआईवी पाजिटिव होने की पुष्टि हुई। इसके बाद परिवार के अन्य सभी सदस्यों की भी जांच कराई गई, जोकि निगेटिव पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि अलीगढ़ में महिला को जो ब्लड चढ़ाया गया, वह एचआईवी संक्रमित था, जिससे महिला को एड्स हो गया था।  
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पति ने शुरू से किया संघर्ष 
जब महिला के एचआईवी पाजिटिव होने की पुष्टि हुई तो पति ने उस अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई कराए जाने के लिए पहल शुरू कर दी, जहां उसे प्रसव के दौरान ब्लड चढ़ाया गया, कई साल तक लड़ाई लड़ने के बाद भी आरोपी अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं उसके पक्ष में पूरा गांव एकजुट हुआ। वे भी उसे न्याय दिलाना चाहते हैं। 

अनशन पर बैठा, फिर भी खाली हाथ 
अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के लिए महिला का पति एडी हेल्थ ऑफिस पर अनशन तक पर बैठा, लेकिन उसके बाद भी अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कोई कार्रवाई किसी भी अधिकारी के स्तर से नहीं हुई, जिसके बाद वे यह सोचकर बैठ गए कि इसका न्याय ऊपर वाला करेगा।  


पैसे का भी आया ऑफर 
महिला के पति ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से पैसे का भी ऑफर आया था, लेकिन मुझे पैसे नहीं लेने। उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने उसके पूरे परिवार का जीवन अंधकारमय बना दिया। उसके हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। ऐसे लापरवाह लोगों के खिलाफ आखिर आठ साल में कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
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