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Hathras Ground Report: हींग कारोबार से बदली किस्मत तो स्टेडियम तराश रहा हुनर, हाथरस में विकास की जमीनी हकीकत
Thu, 03 Sep 2026 04:04 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Thu, 03 Sep 2026 04:04 PM IST
सार
Hathras Ground Report: यूपी सक्षम अभियान के तहत अमर उजाला की टीम हाथरस पहुंची और एसटीपी प्रोजेक्ट, ओडीओपी में शामिल हींग कारोबार, स्टेडियम में बढ़ी खेल सुविधाओं की जमीनी पड़ताल की। स्थानीय लोगों और अधिकारियों से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की गई कि इन विकास कार्यों से रोजगार, आवागमन, स्वच्छता और खेल सुविधाओं पर कितना असर पड़ा है।
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Hathras Ground Report
- फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
Hathras Ground Report: यूपी सक्षम अभियान के तहत अमर उजाला की टीम कई जिलों से होते हुए हाथरस पहुंची। इस दौरान शहर में गंदे पानी की समस्या से निपटने के लिए शुरू हुए एसटीपी प्रोजेक्ट, ओडीओपी के तहत हींग कारोबार, सड़क और कनेक्टिविटी के कामों के साथ स्टेडियम में बढ़ी खेल सुविधाओं की ग्राउंड पड़ताल की गई। स्थानीय लोगों, कारोबारियों, खिलाड़ियों और अधिकारियों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की गई कि विकास की इन योजनाओं का आम लोगों की जिंदगी पर कितना असर पड़ा है और सरकारी योजनाओं का लाभ जमीन पर किस हद तक पहुंच रहा है। आइए, विस्तार से पढ़ते हैं ग्राउंड रिपोर्ट।
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हाथरस में गंदे पानी की समस्या पर लगेगी लगाम
हाथरस में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्रोजेक्ट के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है और इस पर काम भी शुरू हो गया है। इससे शहर के लोगों को होने वाले लाभ को लेकर अमर उजाला की टीम ने जिलाधिकारी अतुल वत्स से बातचीत की। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान सरकार सफाई और स्वच्छता को लेकर गंभीर है। एसटीपी के जरिए गंदे पानी को शोधित किया जा सकेगा और उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही, परियोजना के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
हाथरस में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्रोजेक्ट के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है और इस पर काम भी शुरू हो गया है। इससे शहर के लोगों को होने वाले लाभ को लेकर अमर उजाला की टीम ने जिलाधिकारी अतुल वत्स से बातचीत की। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान सरकार सफाई और स्वच्छता को लेकर गंभीर है। एसटीपी के जरिए गंदे पानी को शोधित किया जा सकेगा और उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही, परियोजना के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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प्रेम पोद्दार ने हींग कारोबार से बदली किस्मत
हाथरस में हींग कारोबार को ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) योजना में शामिल किया गया है। योजना के तहत कारोबारियों को मिल रही मदद और इससे उद्योग को हुए लाभ को लेकर अमर उजाला की टीम ने व्यापारियों से बातचीत की। हींग व्यापारी प्रेम पोद्दार ने बताया कि ओडीओपी योजना के तहत सरकार की ओर से लोन और अन्य प्रकार की सहायता मिल रही है, जिससे कारोबारियों को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में 25 लाख रुपये का लोन लिया था। इस राशि की मदद से उन्होंने कारोबार को बड़े स्तर पर शुरू किया और उसे आगे बढ़ाने में मदद मिली।
हाथरस में हींग कारोबार को ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) योजना में शामिल किया गया है। योजना के तहत कारोबारियों को मिल रही मदद और इससे उद्योग को हुए लाभ को लेकर अमर उजाला की टीम ने व्यापारियों से बातचीत की। हींग व्यापारी प्रेम पोद्दार ने बताया कि ओडीओपी योजना के तहत सरकार की ओर से लोन और अन्य प्रकार की सहायता मिल रही है, जिससे कारोबारियों को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में 25 लाख रुपये का लोन लिया था। इस राशि की मदद से उन्होंने कारोबार को बड़े स्तर पर शुरू किया और उसे आगे बढ़ाने में मदद मिली।
सड़क बनी तो बदली गांवों की तस्वीर
हाथरस जिले में सड़क और कनेक्टिविटी की स्थिति में हुए बदलाव को लेकर अमर उजाला की टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। स्थानीय निवासी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पहले हाथरस-जलेसर रोड की चौड़ाई करीब तीन मीटर थी। अब इसे बढ़ाकर सात मीटर किया गया है, जिससे लोगों के लिए आवागमन आसान हुआ है।
स्थानीय निवासी वरुण ने बताया कि पहले सड़क पर जगह-जगह गड्ढे थे और आए दिन हादसे होते थे। सड़क के चौड़ीकरण और सुधार के बाद स्थिति में काफी बदलाव आया है। अब लोगों को आने-जाने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है और गांवों की कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई है।
हाथरस जिले में सड़क और कनेक्टिविटी की स्थिति में हुए बदलाव को लेकर अमर उजाला की टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। स्थानीय निवासी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पहले हाथरस-जलेसर रोड की चौड़ाई करीब तीन मीटर थी। अब इसे बढ़ाकर सात मीटर किया गया है, जिससे लोगों के लिए आवागमन आसान हुआ है।
स्थानीय निवासी वरुण ने बताया कि पहले सड़क पर जगह-जगह गड्ढे थे और आए दिन हादसे होते थे। सड़क के चौड़ीकरण और सुधार के बाद स्थिति में काफी बदलाव आया है। अब लोगों को आने-जाने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है और गांवों की कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई है।
करोड़ों के प्रोजेक्ट से बदला स्टेडियम का रूप
हाथरस में खेल सुविधाओं को बढ़ाने और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण का अवसर देने के लिए स्टेडियम में कई विकास कार्य कराए गए हैं। यहां खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं और इनसे हुए बदलाव को लेकर अमर उजाला की टीम ने खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों से बातचीत की।
सौरभ बंसल ने बताया कि स्टेडियम में इंटरलॉकिंग और सिंथेटिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे खिलाड़ियों को काफी सहूलियत मिली है। फुटबॉल कोच वर्षा रानी ने बताया कि यहां करीब 45 बच्चे प्रशिक्षण के लिए आते हैं। स्टेडियम में मल्टीपरपज हॉल का निर्माण भी चल रहा है। इसके अलावा शूटिंग रेंज तैयार की गई है और वेटलिफ्टिंग हॉल समेत कई अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में अलग-अलग खेलों की तैयारी और प्रशिक्षण का बेहतर अवसर मिल रहा है।
हाथरस में खेल सुविधाओं को बढ़ाने और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण का अवसर देने के लिए स्टेडियम में कई विकास कार्य कराए गए हैं। यहां खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं और इनसे हुए बदलाव को लेकर अमर उजाला की टीम ने खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों से बातचीत की।
सौरभ बंसल ने बताया कि स्टेडियम में इंटरलॉकिंग और सिंथेटिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे खिलाड़ियों को काफी सहूलियत मिली है। फुटबॉल कोच वर्षा रानी ने बताया कि यहां करीब 45 बच्चे प्रशिक्षण के लिए आते हैं। स्टेडियम में मल्टीपरपज हॉल का निर्माण भी चल रहा है। इसके अलावा शूटिंग रेंज तैयार की गई है और वेटलिफ्टिंग हॉल समेत कई अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में अलग-अलग खेलों की तैयारी और प्रशिक्षण का बेहतर अवसर मिल रहा है।