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फसल अवशेष जलाने पर होगी कार्रवाई, वसूला जाएगा जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
पिछले कुछ वर्षों से धान की फसल को कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई/मड़ाई होेने के कारण कुछ क्षेत्रों में किसानों द्वारा फसल अवशेष/पराली को जला दिया जाता है। इस कारण वातावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी में पोषक तत्वों की अत्यधिक क्षति होती है। मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि फसल अवशेष को मिट्टी में मिलाया जा सकता है। यहां तक कि खाद के रूप में व गोशालाओं में पराली को चारे के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। अब इस मामले में शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश के परिपालन में कृषि अवशेषों को जलाए जाने पर किसान से जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि दो एकड़ जोत तक 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ से अधिक जोत पर 15 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। इसके बाद पुनरावृत्ति की जाती है तो कारावास व अर्थदंड दोनों की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा संचालित फसल अवशेष प्रबंधन की योजना के तहत फसल अवशेष नष्ट करने या मिट्टी में मिलाने के लिए 14 प्रकार के कृषि यंत्रों को 50 प्रतिशत अनुदान पर चिन्हित किया गया है। कटाई के लिए प्रयोग होने वाली कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ रीपर अथवा स्ट्रॉ रेक व बेलर का प्रयोग किया जा सकता है। जिले की सीमा में एक भी फसल अवशेष जलाने की घटना न हो, इसके लिए नोडल अधिकारी नामित कर दिए गए हैं।
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पिछले कुछ वर्षों से धान की फसल को कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई/मड़ाई होेने के कारण कुछ क्षेत्रों में किसानों द्वारा फसल अवशेष/पराली को जला दिया जाता है। इस कारण वातावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी में पोषक तत्वों की अत्यधिक क्षति होती है। मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि फसल अवशेष को मिट्टी में मिलाया जा सकता है। यहां तक कि खाद के रूप में व गोशालाओं में पराली को चारे के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। अब इस मामले में शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश के परिपालन में कृषि अवशेषों को जलाए जाने पर किसान से जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि दो एकड़ जोत तक 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ से अधिक जोत पर 15 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। इसके बाद पुनरावृत्ति की जाती है तो कारावास व अर्थदंड दोनों की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा संचालित फसल अवशेष प्रबंधन की योजना के तहत फसल अवशेष नष्ट करने या मिट्टी में मिलाने के लिए 14 प्रकार के कृषि यंत्रों को 50 प्रतिशत अनुदान पर चिन्हित किया गया है। कटाई के लिए प्रयोग होने वाली कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ रीपर अथवा स्ट्रॉ रेक व बेलर का प्रयोग किया जा सकता है। जिले की सीमा में एक भी फसल अवशेष जलाने की घटना न हो, इसके लिए नोडल अधिकारी नामित कर दिए गए हैं।
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