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Hathras News: उज्जैन के पैडलर ने सॉफ्टवेयर डालकर आरोपियों को दिए थे मोबाइल

Sun, 26 Jul 2026 01:51 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sun, 26 Jul 2026 01:51 AM IST
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A paddler from Ujjain had provided mobile phones to the accused after installing software on them.
प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
जिले में शुक्रवार को पकड़े गए चारों साइबर ठग अंतरराज्यीय गिरोह की सबसे निचली कड़ी हैं। पड़ताल में सामने आया कि उज्जैन के पैडलर ने साॅफ्टवेयर डालकर आरोपियों को मोबाइल फोन दिए थे।
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पुलिस अब उज्जैन में बैठे पैडलर (साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला बिचौलिया) तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। ठगे गए करोड़ों रुपये बैंक खातों में कई लेयर में ठिकाने लगाए जाते थे, जिन तक पहुंचने में पुलिस को समय लगेगा।
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शुक्रवार को पुलिस के हाथ आया चमरुआ मुरसान का माधव शर्मा पैडलर के संपर्क में था। उसे ही चालू बैंक खाते लाने का लक्ष्य मिला था। पूछताछ में माधव ने बताया कि वह छह माह से पैडलर के संपर्क में था, जबकि पुलिस को आशंका है कि वह लंबे समय से गेमिंग एप साइबर फ्रॉड का हिस्सा है।
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महज 27 साल की उम्र में लाखों रुपये कमा चुका माधव अब करोड़पति बनने की चाह में नेटवर्किंग की तरह लोगों को जोड़ता जा रहा था। इसी क्रम में उसने दुर्गेश, कन्हैया और दीपक को जोड़ा तथा उनके नाम से खाते भी खुलवाए। इसके एवज में उसे मोटा कमीशन मिल रहा था।



उज्जैन से भेजे गए मोबाइल

उज्जैन में बैठे पैडलर ने माधव को स्मार्ट फोन उपलब्ध कराए थे। वहां से एक युवक मोबाइल देने मुरसान आता था। इन मोबाइल फोन में एक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया था, जिसमें कोड डला हुआ था। ऐसे चार मोबाइल पुलिस ने बरामद किए हैं, जो कि पैडलर ने दिए थे। पुलिस ने इन्हें खोलने का प्रयास किया तो माधव ने सफाई दी कि कोड उसे नहीं पता।



मोबाइल से खुलेंगे ठगी के राज

ठगी की रकम खातों से निकालने के लिए दिए गए मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता था। इस ओटीपी को ये लोग पैडलर को बताते थे। इसके बाद अलाउ का नोटिफिकेशन डिस्पले होता था। उस पर क्लिक करते ही खाते से रुपये निकल जाते थे। माधव का कहना है कि दिए गए मोबाइल में वे चारों केवल इतना ही कर सकते थे। पुलिस अब इन मोबाइलों के कोड क्रैक करने का प्रयास कर रही है। आशंका है कि माधव झूठ बोल रहा है तथा वह भी एपीके फाइल व गलत लिंक भेजकर लोगों को ठगी के जाल में फंसाता था। इन मोबाइलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।



एक खाते में आए 99 लाख, बाकी की तलाश

माधव ने कुछ ही महीनों में 15 बैंक खाते खुलवाए थे। इनमें से सात खाते नैनिताल बैंक आगरा में हाल ही में खुले हैं। जिनकी जानकारी पैडलर तक पहुंच चुकी थी। इनमें रकम आना बाकी था। एक पुराने खाते की जांच में 99 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन मिले हैं। पुलिस अन्य खातों की जानकारी जुटाने में लगी है। इन्हीं खातों के जरिए पुलिस ठगी के शिकार हुए लोगों तक पहुंचेगी, जिन्हें गवाह बनाने का प्रयास किया जाएगा।


यह नेटवर्क काफी बड़ा है। आशंका है कि उज्जैन में बैठे पेडलर के भी पैडलर हैं। जांच में इस प्रकरण की परतें खुल रहीं हैं। एक कड़ी हाथ लग गई है, जिसके जरिये पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा ताकि साइबर ठगी के मामलों को कम किया जा सके।

चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी।
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