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ब्रज संत गयाप्रसाद जी को एक फूल ने बना दिया था कृष्ण भक्त
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संत प.गयाप्रसाद का चित्र।
- फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
ब्रज संत पं. गयाप्रसाद जी महाराज रामभक्त थे। शहर के घंटाघर पर हुई कृष्णलीला में फूलों की होली के दौरान ब्रज संत गया प्रसाद जी महाराज के ऊपर एक फूल गिर गया था। जिससे बाबा का हृदय हिलोरे लेने लगा। वह ठाकुर जी के स्वरूप सजे बच्चे के आगे बोले प्राणनाथ मेरे लिए आपके चरणों में जगह है। यह देखकर ठाकुर जी स्वरूप में बच्चे ने बाबा को अपनी बाहों में भर लिया।
जानकार बताते है कि ब्रजसंत गयाप्रसाद जी का जन्म कानपुर के पास कल्याणीपुर में हुआ था। पिता पंडित रामाधीन मिश्र व माता कौशाल्या देवी थीं। बाबा हाथरस आकर रहने लगे थे। वह पहले रामभक्त थे। कृष्णलीला में उनके ऊपर जो फूल गिरा उसी के साथ बाबा का मन बदल गया था। तभी से बाबा कृष्ण भक्त हो गए। एक बार जगन्नाथ जी में कृष्ण मंडली गई थी। वहां भी बाबा पहुंच गए।
उसके बाद कृष्णलीला के संचालक वहां से वापसी के बाद ब्रज संत गयाप्रसाद जी महाराज को अपने साथ लेकर उड़िया बाबा के पास पहुंचे। कृष्णलीला संचालक ने उड़िया बाबा को पूरी बात बताई। उड़िया बाबा ने कहा कि आपका स्थान तो गिरिराज जी में है। उसके बाद बाबा गिरिराज जी चले गए। वहां करीब 55 वर्षों तक रहे। ठाकुर जी की पूजा सेवा करते हुए वहीं शरीर को त्याग दिया। शुक्रवार को ब्रज संत का 128 वां जन्मोत्सव शहर के गोपालधाम व श्रीकृष्ण गोशाला में धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।
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ब्रज संत पं. गयाप्रसाद जी महाराज रामभक्त थे। शहर के घंटाघर पर हुई कृष्णलीला में फूलों की होली के दौरान ब्रज संत गया प्रसाद जी महाराज के ऊपर एक फूल गिर गया था। जिससे बाबा का हृदय हिलोरे लेने लगा। वह ठाकुर जी के स्वरूप सजे बच्चे के आगे बोले प्राणनाथ मेरे लिए आपके चरणों में जगह है। यह देखकर ठाकुर जी स्वरूप में बच्चे ने बाबा को अपनी बाहों में भर लिया।
जानकार बताते है कि ब्रजसंत गयाप्रसाद जी का जन्म कानपुर के पास कल्याणीपुर में हुआ था। पिता पंडित रामाधीन मिश्र व माता कौशाल्या देवी थीं। बाबा हाथरस आकर रहने लगे थे। वह पहले रामभक्त थे। कृष्णलीला में उनके ऊपर जो फूल गिरा उसी के साथ बाबा का मन बदल गया था। तभी से बाबा कृष्ण भक्त हो गए। एक बार जगन्नाथ जी में कृष्ण मंडली गई थी। वहां भी बाबा पहुंच गए।
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उसके बाद कृष्णलीला के संचालक वहां से वापसी के बाद ब्रज संत गयाप्रसाद जी महाराज को अपने साथ लेकर उड़िया बाबा के पास पहुंचे। कृष्णलीला संचालक ने उड़िया बाबा को पूरी बात बताई। उड़िया बाबा ने कहा कि आपका स्थान तो गिरिराज जी में है। उसके बाद बाबा गिरिराज जी चले गए। वहां करीब 55 वर्षों तक रहे। ठाकुर जी की पूजा सेवा करते हुए वहीं शरीर को त्याग दिया। शुक्रवार को ब्रज संत का 128 वां जन्मोत्सव शहर के गोपालधाम व श्रीकृष्ण गोशाला में धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।
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