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चार साल बाद मिली दिल को तसल्ली

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Hathras
Hathras Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। मुंबई हमले में जिले के एक परिवार का भी चिराग बुझ गया था। चार साल से अपने लाल के हत्यारे को सजा मिलने का इंतजार कर रहे इस परिवार के लिए बुधवार की सुबह न्याय का पैगाम लेकर आई। मुंबई हमले के आरोपी आतंकी कसाब को फांसी दिए जाने की सूचना जैसे ही गांव चंदपा तक पहुंची, गांव के वृद्ध धनपाल शर्मा और उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 80 वर्षीय धनपाल की आंखें अपने नाती की याद में नम हो गई और साथ ही कसाब की फांसी पर वह यही कहते रहे कि आज दिल को तसल्ली मिली है। निकटवर्ती गांव चंदपा निवासी धनपाल शर्मा के दो बेटे हैं। उनके बड़े बेटे विजय कुमार शर्मा नेवी में भर्ती होने के बाद मुंबई चले गए थे और वहीं परिवार सहित रहने लगे थे, जबकि धनपाल के छोटे बेटे देवेश की गांव में ही हलवाई की दुकान है। विजय के छोटे बेटे नीतेश की भी मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले में जान चली गई थी। परिजनों के मुताबिक उस दिन नीतेश अपने पिता विजय के साथ अपनी मां को ट्रेन में बैठाने के लिए स्टेशन आया था। वहां से जब दोनों वापस आ रहे थे, तब आतंकी हमले में गोली लगने से नीतेश की मौत हो गई थी। नीतेश वहां हाईस्कूल का छात्र था।
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नीतेश की मौत के बाद पूरा चंदपा गांव शोक में डूब गया था। वह अवकाश के दिनों मेें अपने गांव आ जाता था और यहां लोगों से काफी घुल-मिल गया था। आतंकी कसाब के पकड़े जाने के बाद उसके परिजनों की दिली तमन्ना थी कि कसाब को जल्द सजा मिले। बुधवार को जब कसाब की फांसी की खबर इन लोगों को मिली तो पहले तो सहज इन लोगों को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन बाद में जब चारों तरफ यह खबर सुनाई दी तो पूरे परिवार में हर्ष की लहर दौड़ गई। उनकी खुशी में ग्रामीण भी शामिल हुए और गांव में जमकर मिठाई बंटी। नीतेश के 80 वर्षीय दादा धनपाल जो जब यह बताया कि कसाब को फांसी दे दी गई है तो वह पुरानी यादों मे खो गए। उनके आंसू भी निकल पड़े। उन्होंने बताया कि नीतेश से उन्हें बेहद लगाव था। जब वह मुंबई जाते तो वह ही उन्हें घुमाता-फिराता था। कसाब की मौत पर उन्होंने कहा कि आज उनके दिल को तसल्ली मिली है। उनका कहना था कि सरकार को चाहिए कि वह कसाब के अलावा उन लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करे जिन्होंने इस हमले की साजिश रची। नीतेश के चाचा देवेश का कहना है कि कसाब को फांसी दिए जाने से उन्हें और पूरे परिवार को बेहद खुशी है। कसाब व उसके साथियों के हमले में उनके भतीजे की जान गई थी। उन्होंने बताया कि पूरा परिवार नीतेश की मौत का गम अभी तक नहीं भुला पाया है।
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