{"_id":"595153824f1c1b805b8b46b8","slug":"51498502018-hathras-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी ठेकेदारों पर सिर्फ दो फीसदी कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी ठेकेदारों पर सिर्फ दो फीसदी कर
Updated Tue, 27 Jun 2017 12:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
पहली जुलाई से लागू होने जा रहे गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में टैक्स की प्रस्तावित दरों ने बेशक आम लोगों और व्यापारियों की नींद उड़ा रखी है, लेकिन सरकारी विभागों को सामान सप्लाई करने वाले ठेकेदारों के लिए यह कानून राहत की सौगात लेकर आ रहा है। नए कानून के हिसाब से अब सरकारी विभागों के ठेकेदारों को सिर्फ दो फीसदी ही टैक्स चुकाना पड़ेगा।
यह टैक्स दो तरह से करदाताओं से वसूला जाएगा। इसमें एक फीसदी जीएसटी होगा और एक फीसदी पुराना टीडीएस, जबकि अब तक सरकारी ठेकेदारों से चार फीसदी टीडीएस की कटौती वाणिज्य कर कानून के हिसाब से की जा रही थी।
सबसे बड़ा फायदा तो इन ठेकेदारों को सरकार ने यह दिया है कि वह अगर यूपी के अंदर से ही माल की खरीद कर उसे बेचेंगे तो उन्हें सिर्फ दो फीसदी ही कर चुकाना होगा, जबकि प्रदेश के बाहर से माल खरीदकर बेचेंगे तो भी उन्हें दो फीसदी ही कर देना होगा, लेकिन यह कर उनसे इंटीग्रेटेड जीएसटी की शक्ल में लिया जाएगा।
विज्ञापन
जल्द ही इस कर की कटौती के बारे में जिले के सभी विभागों के आहरण-वितरण अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। डीएम की अध्यक्षता में इनकी बैठक कराई जाएगी और उन्हें जीएसटी के हिसाब से कर की कटौती करने के तौर-तरीके बताए जाएंगे। सरकार के इस नए नियम से सरकारी विभागों को सामान आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी।
हालांकि इसके पीछे सरकार का मकसद अपने विभागों को ठेकेदारों के जरिए सस्ती दरों पर सामान मुहैया कराने की है। मतलब, सरकार ने नए कर कानून में जनता से ज्यादा अपने फायदे के बारे में सोचा है। उसका पूरा जोर सरकारी खजाने का ज्यादा से ज्यादा पैसा बचाने पर रहा है।
- सरकारी विभागों को सामान आपूर्ति करने वाले ठेेकेदारों से एक फीसदी जीएसटी और एक फीसदी टीडीएस काटा जाएगा। आहरण-वितरण अधिकारियों को जीएसटी के तहत कर की कटौती के बारे में जल्द प्रशिक्षण दिया जाएगा। नई व्यवस्था में उन्हें दो तरह से कर कटौती करनी होगी।
- संजय कुमार, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर
विज्ञापन
पहली जुलाई से लागू होने जा रहे गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में टैक्स की प्रस्तावित दरों ने बेशक आम लोगों और व्यापारियों की नींद उड़ा रखी है, लेकिन सरकारी विभागों को सामान सप्लाई करने वाले ठेकेदारों के लिए यह कानून राहत की सौगात लेकर आ रहा है। नए कानून के हिसाब से अब सरकारी विभागों के ठेकेदारों को सिर्फ दो फीसदी ही टैक्स चुकाना पड़ेगा।
यह टैक्स दो तरह से करदाताओं से वसूला जाएगा। इसमें एक फीसदी जीएसटी होगा और एक फीसदी पुराना टीडीएस, जबकि अब तक सरकारी ठेकेदारों से चार फीसदी टीडीएस की कटौती वाणिज्य कर कानून के हिसाब से की जा रही थी।
विज्ञापन
सबसे बड़ा फायदा तो इन ठेकेदारों को सरकार ने यह दिया है कि वह अगर यूपी के अंदर से ही माल की खरीद कर उसे बेचेंगे तो उन्हें सिर्फ दो फीसदी ही कर चुकाना होगा, जबकि प्रदेश के बाहर से माल खरीदकर बेचेंगे तो भी उन्हें दो फीसदी ही कर देना होगा, लेकिन यह कर उनसे इंटीग्रेटेड जीएसटी की शक्ल में लिया जाएगा।
विज्ञापन
जल्द ही इस कर की कटौती के बारे में जिले के सभी विभागों के आहरण-वितरण अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। डीएम की अध्यक्षता में इनकी बैठक कराई जाएगी और उन्हें जीएसटी के हिसाब से कर की कटौती करने के तौर-तरीके बताए जाएंगे। सरकार के इस नए नियम से सरकारी विभागों को सामान आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी।
हालांकि इसके पीछे सरकार का मकसद अपने विभागों को ठेकेदारों के जरिए सस्ती दरों पर सामान मुहैया कराने की है। मतलब, सरकार ने नए कर कानून में जनता से ज्यादा अपने फायदे के बारे में सोचा है। उसका पूरा जोर सरकारी खजाने का ज्यादा से ज्यादा पैसा बचाने पर रहा है।
- सरकारी विभागों को सामान आपूर्ति करने वाले ठेेकेदारों से एक फीसदी जीएसटी और एक फीसदी टीडीएस काटा जाएगा। आहरण-वितरण अधिकारियों को जीएसटी के तहत कर की कटौती के बारे में जल्द प्रशिक्षण दिया जाएगा। नई व्यवस्था में उन्हें दो तरह से कर कटौती करनी होगी।
- संजय कुमार, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर