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बाइक टैक्सी के नाम पर 1.24 लाख रुपये ठगे
Wed, 26 Jun 2019 12:33 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Wed, 26 Jun 2019 12:33 AM IST
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सिकंदराराऊ। क्षेत्र के गांव नगला कोरिया निवासी युवती से एक फाइनेंस कंपनी ने बाइक टैक्सी योजना में 1.24 लाख रुपया जमा करा लिया। युवती को कुछ लाभ मिलता, उससे पूर्व ही कंपनी अपना बोरिया बिस्तर समेटकर भाग गई। बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना में निवेश कर रखा है। वह सब भी अब इस कंपनी को तलाश रहे हैं। कंपनी ने युवती को एक चेक भी दिया, जो कि बाउंस हो गया।
कोतवाली में शिकायत करते हुए युवती अंजना शर्मा पुत्री मुरारीलाल शर्मा निवासी गांव नगला कोरिया ने बताया कि बुलंदशहर में जीआईपीएल के नाम से एक फाइनेंस कंपनी खुली है। इसकी बाइक टैक्सी योजना में उसने 1.24 लाख रुपया लगा दिया। कंपनी के अनुसार प्रतिमाह योजना के तहत नौ हजार सात सौ रुपये पेंशन के रूप में मिलने थे। निवेशकों का विश्वास बना रहे, इसके लिए सबको जमा रकम से हिसाब से अग्रिम चेक दे दिया गया। उसे 2.25 लाख रुपया किसी सहकारी बैंक का दे दिया गया।
कई महीने इंतजार करने के बाद उसे पेंशन योजना का एक भी पैसा नहीं मिला। वह वर्तमान में गाजियाबाद की एक कंपनी के कॉल सेंटर पर काम रही है। जब वह कंपनी के कार्यालय पर गई तो दफ्तर खाली मिला। उसने चेक को बैंक में डाला तो खाते में पैसा नहीं था। कई लोग कंपनी को तलाशते नजर आए। निवेशकों को चूना लगाकर कंपनी करोड़ों रुपये ठग ले गई। कंपनी ने एक स्थानीय व्यक्ति को नौकरी पर रखा था। उसे लोगों ने ज्यादा परेशान किया तो उसने सरेंडर कर दिया।
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कोतवाली में शिकायत करते हुए युवती अंजना शर्मा पुत्री मुरारीलाल शर्मा निवासी गांव नगला कोरिया ने बताया कि बुलंदशहर में जीआईपीएल के नाम से एक फाइनेंस कंपनी खुली है। इसकी बाइक टैक्सी योजना में उसने 1.24 लाख रुपया लगा दिया। कंपनी के अनुसार प्रतिमाह योजना के तहत नौ हजार सात सौ रुपये पेंशन के रूप में मिलने थे। निवेशकों का विश्वास बना रहे, इसके लिए सबको जमा रकम से हिसाब से अग्रिम चेक दे दिया गया। उसे 2.25 लाख रुपया किसी सहकारी बैंक का दे दिया गया।
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कई महीने इंतजार करने के बाद उसे पेंशन योजना का एक भी पैसा नहीं मिला। वह वर्तमान में गाजियाबाद की एक कंपनी के कॉल सेंटर पर काम रही है। जब वह कंपनी के कार्यालय पर गई तो दफ्तर खाली मिला। उसने चेक को बैंक में डाला तो खाते में पैसा नहीं था। कई लोग कंपनी को तलाशते नजर आए। निवेशकों को चूना लगाकर कंपनी करोड़ों रुपये ठग ले गई। कंपनी ने एक स्थानीय व्यक्ति को नौकरी पर रखा था। उसे लोगों ने ज्यादा परेशान किया तो उसने सरेंडर कर दिया।
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