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आराधना भाव की भूखी होती, दिखावे की नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 05 May 2015 11:08 PM IST
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नटवीरनपुरवा स्थित मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार
को भक्ति भाव की बारिश से पंडित संजय मिश्रा ने सभी को सराबोर कर दिया।
कई प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने भक्त और भगवान के बीच के नाते को समझाते हुए कहा कि भगवान की भक्ति निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए और मन और श्रद्धा से भक्ति करने पर उसकी शक्ति इतनी प्रबल हो जाती है कि भगवान भक्त के वश में हो जाते हैं। कहा कि आनंदमय जीवन के लिए तीन सिद्धांतों पर चलना जरूरी है।
पुराणों में तीन सिद्धांत बताए गए हैं, जिसमें पहला है नीति यानी हम सभी कार्य नीति पूर्वक करें और अनीति से कोई कार्य न करें। दूसरा है प्रीति यानी भगवान के प्रति सच्ची प्रीति लगाए न कि केवल दिखावे के लिए आडंबर करें, क्योंकि दिखावे के लिए की जाने वाली आराधना नहीं महज प्रचार और अहम का परिचायक होती है, इसलिए प्रभु से सच्ची प्रीति करें।
तीसरा है रीति यानी हमारा व्यवहार रीति परक सद्भाव पूर्ण होना चाहिए। ऐसा होने पर हम जीवन कठिनाइयां आने पर भी उनसे पार पा जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिनके पास धर्म, संतोष, धैर्य के साथ माता पिता का आशीर्वाद और भगवान की भक्ति होती है। दुनिया की कोई भी ताकत उसका अहित नहीं कर सकती है।
इस बारे में उन्होंने नासाग्र महाराज के प्रसंग का वर्णन कर सभी को भावविभोर कर दिया। उन्होंने भगवान के मत्स्य अवतार तथा वामन अवतार का प्रसंग सुनाकर दान के महत्व को बताया। इस मौके पर ज्योति प्रकाश सिन्हा, ममता वर्मा, प्रीति सिन्हा, विद्यावती, ममता सिन्हा और तेजस्वनी आदि मौजूद थे।
कई प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने भक्त और भगवान के बीच के नाते को समझाते हुए कहा कि भगवान की भक्ति निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए और मन और श्रद्धा से भक्ति करने पर उसकी शक्ति इतनी प्रबल हो जाती है कि भगवान भक्त के वश में हो जाते हैं। कहा कि आनंदमय जीवन के लिए तीन सिद्धांतों पर चलना जरूरी है।
पुराणों में तीन सिद्धांत बताए गए हैं, जिसमें पहला है नीति यानी हम सभी कार्य नीति पूर्वक करें और अनीति से कोई कार्य न करें। दूसरा है प्रीति यानी भगवान के प्रति सच्ची प्रीति लगाए न कि केवल दिखावे के लिए आडंबर करें, क्योंकि दिखावे के लिए की जाने वाली आराधना नहीं महज प्रचार और अहम का परिचायक होती है, इसलिए प्रभु से सच्ची प्रीति करें।
तीसरा है रीति यानी हमारा व्यवहार रीति परक सद्भाव पूर्ण होना चाहिए। ऐसा होने पर हम जीवन कठिनाइयां आने पर भी उनसे पार पा जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिनके पास धर्म, संतोष, धैर्य के साथ माता पिता का आशीर्वाद और भगवान की भक्ति होती है। दुनिया की कोई भी ताकत उसका अहित नहीं कर सकती है।
इस बारे में उन्होंने नासाग्र महाराज के प्रसंग का वर्णन कर सभी को भावविभोर कर दिया। उन्होंने भगवान के मत्स्य अवतार तथा वामन अवतार का प्रसंग सुनाकर दान के महत्व को बताया। इस मौके पर ज्योति प्रकाश सिन्हा, ममता वर्मा, प्रीति सिन्हा, विद्यावती, ममता सिन्हा और तेजस्वनी आदि मौजूद थे।