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दिन भर बूंदाबांदी होने से बढ़ी ठंड
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sat, 03 Jan 2015 12:55 AM IST
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बूंदाबांदी के साथ हुए नव वर्ष के आगमन के बाद नए साल
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के दूसरे दिन शुक्रवार को बूंदाबांदी होती रही। बूंदाबांदी होने से पारे
का अधिकतम स्तर गत दिन के मुकाबले तीन डिग्री लुढ़क कर 16 डिग्री पर आ गया
जिससे दिन के समय में भी ठंड काफी बढ़ गई।
दिन भर रुक रुक कर हुई बूंदाबांदी के साथ पड़ी फुहारों से करीब 4 मिमी पानी बरस गया। आज तापमान का अधिकतम स्तर 16 एवं न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस रहा। ज्ञात हो कि नए साल का आगमन बादलों की गरज तथा बूंदाबांदी से हुई थी और उसके बाद दिनभर बूंदाबांदी हुई, जिसके बाद दूसरे दिन आज कोहरे एवं बूंदाबांदी के बीच हुई सुबह काफी ठंडी हो गई, जिससे आज भी लोगों की गुड़ मार्निंग कोल्ड मार्निंग रही।
ऐसे में कड़ाके की ठंड से लोग खासे परेशान रहे तथा इधर उधर अलाव खोजते नजर आए। ठंड बढ़ने के कारण लोगोें की दिनचर्या पर खासा असर पड़ा और शाम होते ही लोग घरों में दुबकने लगे। ठंड से बचने के लिए लोगों ने अलाव का सहारा लिया, वहीं घरों में भी अंगीठी आदि जलाकर ठंड से मुकाबला करने का प्रयास किया गया।
हल्की फुहारों जैसी बारिश रुक रुक कर दिन भर होने से लोगों को घरों से बाहर निकलने को लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसी ने छातों का सहारा लिया तो कोई रैन कोट आदि पहन कर निकले और अपने जरूरी कार्यों को निपटाया। दिन भर लोगों को परेशान होना पड़ा।
दिन भर रुक रुक कर हुई बूंदाबांदी के साथ पड़ी फुहारों से करीब 4 मिमी पानी बरस गया। आज तापमान का अधिकतम स्तर 16 एवं न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस रहा। ज्ञात हो कि नए साल का आगमन बादलों की गरज तथा बूंदाबांदी से हुई थी और उसके बाद दिनभर बूंदाबांदी हुई, जिसके बाद दूसरे दिन आज कोहरे एवं बूंदाबांदी के बीच हुई सुबह काफी ठंडी हो गई, जिससे आज भी लोगों की गुड़ मार्निंग कोल्ड मार्निंग रही।
ऐसे में कड़ाके की ठंड से लोग खासे परेशान रहे तथा इधर उधर अलाव खोजते नजर आए। ठंड बढ़ने के कारण लोगोें की दिनचर्या पर खासा असर पड़ा और शाम होते ही लोग घरों में दुबकने लगे। ठंड से बचने के लिए लोगों ने अलाव का सहारा लिया, वहीं घरों में भी अंगीठी आदि जलाकर ठंड से मुकाबला करने का प्रयास किया गया।
हल्की फुहारों जैसी बारिश रुक रुक कर दिन भर होने से लोगों को घरों से बाहर निकलने को लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसी ने छातों का सहारा लिया तो कोई रैन कोट आदि पहन कर निकले और अपने जरूरी कार्यों को निपटाया। दिन भर लोगों को परेशान होना पड़ा।