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Hardoi News: नाबालिग से किया प्रेम विवाह, बेटे का जन्म... अब अभियुक्त को दस साल की सजा
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- नौ साल पहले हुई थी घटना, अब परिवार की तरह रह रही पीड़िता और अभियुक्त
- विशेष न्यायाधीश दिनेश गौड़ ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। नौ साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट कोर्ट नंबर-14 ) दिनेश गौड़ ने पाक्सो एक्ट के आरोपी पति काे दोषी करार दिया है। अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाते हुए पचास हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। किशोरी (घटना के समय) से प्रेम प्रसंग, मंदिर में शादी, बेटे का जन्म और अब भी पति पत्नी के रूप में रहने की दलील भी अभियुक्त को नहीं बचा सकी।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 29 मई 2017 को उसकी बेटी (13) लापता हो गई थी। कुछ पता न चलने पर पुलिस ने अपहरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। विवेचना में पता चला था कि गांव का ही एक युवक चंडीगढ़ में रहता था। किशोरी अकेले ही युवक के पास चली गई थी।
पुलिस ने उसे चंडीगढ़ से खोज लिया था। मेडिकल कराने पर किशोरी गर्भवती मिली थी। मामले की सुनवाई के दौरान किशोरी ने कहा कि वह अपनी मर्जी से चंडीगढ़ गई थी। युवक से प्रेम प्रसंग होने और मंसादेवी मंदिर में शादी कर लेने की बात भी किशेारी ने न्यायालय में कही थी। बाद में किशोरी ने बेटे को जन्म दिया। किशोरी (तब) अब भी आरोपी के साथ पत्नी के रूप में रहती है। बेटा भी साढ़े छह साल का हो चुका है। मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाली किशोरी की मां ने भी न्यायालय में इसी बात की पुष्टि की।
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अदालत ने साक्ष्यों और विधिक प्रावधानों का परीक्षण करते हुए माना कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। पॉक्सो कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है। लिहाजा प्रेम, शादी या सहमति से संबंध बनाने की दलील अभियुक्त को दायित्व से मुक्त नहीं कर सकती। यह कहकर विशेष न्यायाधीश ने अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से आठ गवाह और 11 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए।
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- विशेष न्यायाधीश दिनेश गौड़ ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। नौ साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट कोर्ट नंबर-14 ) दिनेश गौड़ ने पाक्सो एक्ट के आरोपी पति काे दोषी करार दिया है। अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाते हुए पचास हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। किशोरी (घटना के समय) से प्रेम प्रसंग, मंदिर में शादी, बेटे का जन्म और अब भी पति पत्नी के रूप में रहने की दलील भी अभियुक्त को नहीं बचा सकी।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 29 मई 2017 को उसकी बेटी (13) लापता हो गई थी। कुछ पता न चलने पर पुलिस ने अपहरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। विवेचना में पता चला था कि गांव का ही एक युवक चंडीगढ़ में रहता था। किशोरी अकेले ही युवक के पास चली गई थी।
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पुलिस ने उसे चंडीगढ़ से खोज लिया था। मेडिकल कराने पर किशोरी गर्भवती मिली थी। मामले की सुनवाई के दौरान किशोरी ने कहा कि वह अपनी मर्जी से चंडीगढ़ गई थी। युवक से प्रेम प्रसंग होने और मंसादेवी मंदिर में शादी कर लेने की बात भी किशेारी ने न्यायालय में कही थी। बाद में किशोरी ने बेटे को जन्म दिया। किशोरी (तब) अब भी आरोपी के साथ पत्नी के रूप में रहती है। बेटा भी साढ़े छह साल का हो चुका है। मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाली किशोरी की मां ने भी न्यायालय में इसी बात की पुष्टि की।
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अदालत ने साक्ष्यों और विधिक प्रावधानों का परीक्षण करते हुए माना कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। पॉक्सो कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है। लिहाजा प्रेम, शादी या सहमति से संबंध बनाने की दलील अभियुक्त को दायित्व से मुक्त नहीं कर सकती। यह कहकर विशेष न्यायाधीश ने अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से आठ गवाह और 11 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए।