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Hardoi News: केरल से आए अभियंताओं ने शुरू की डिजिटल एक्सरे मशीन की मरम्मत
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फोटो- 35- मेडिकल कॉलेज में डिजिटल मशीन की मरम्मत करते केरल से आए अभियंता। संवाद
- दो माह से खराब है डिजिटल एक्सरे मशीन
- ड्रैग कंट्रोल बोर्ड, ट्रांसफार्मर और एक्सरे ट्यूब में आई थी खराबी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में बीते करीब दो महीने से खराब पड़ी मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन की आखिरकार मरम्मत शुरू हो गई है। मंगलवार को केरल से पहुंची अभियंताओं की टीम ने मशीन की तकनीकी जांच के बाद उसे दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया। मशीन में ड्रैग कंट्रोल बोर्ड, ट्रांसफार्मर और एक्सरे ट्यूब समेत कई हिस्सों में खराबी सामने आई थी। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मशीन को दोबारा चालू कर दिया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में लगी मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन जर्जर और पुरानी हो चुकी है। एक वर्ष में मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन की मरम्मत पर करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च भी हो चुके हैं। इसके बावजूद मशीन खराब हो जाती है। अभी बीती 12 अगस्त को मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड खराब हुआ था। वह बदला गया लेकिन इसके बाद एक्सरे ट्यूब खराब हो गई। इसके बाद से मशीन बंद है, मरीजों की जांच का काम पोर्टेबल एक्सरे मशीन से किया जा रहा है। पोर्टेबल मशीन की क्षमता सीमित होने के कारण एक बार में करीब 50 से 60 एक्सरे करने के बाद उसे कुछ देर के लिए बंद करना पड़ता है। इससे मरीजों को दोबारा जांच मशीन चलने के बाद ही हो पाती है। जबकि मेडिकल कॉलेज में रोजाना 150 से 200 मरीज आते हैं जिनके 300 से 350 तक एक्सरे हो जाते हैं। पोर्टेबल मशीन पर काफी दबाव बढ़ा हुआ है। हालांकि, मंगलवार को केरल से आई अभियंताओं की टीम ने मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज पहुंची टीम में शामिल अभियंता सिब्बी, आसिफ और महेश ने मशीन की तकनीकी जांच करने के बाद मरम्मत का काम शुरू किया है। उन्होंने मशीन में ट्रांसफार्मर खराब होने की बात भी कही है। फिलहाल काम जारी कर दिया गया था।
मरीजों को राहत की उम्मीद
मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन बनने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। रेडियोलॉजी विभाग में 100 एमए की मशीन से एक्सरे हो तो रहे हैं लेकिन अधिक दबाव के कारण मशीन बेहतर ढंग से काम नहीं कर पाती है। इतना ही नहीं पोर्टेबल मशीन में एक्सरे का प्रिंट भी नहीं आता है, मरीजों को मोबाइल फोन पर फोटो लेनी पड़ती है। अब काम शुरू हो गया है तो उम्मीद है कि मुख्य मशीन संचालित हो जाएगी और मरीजों को फिर से एक्सरे कराने में राहत मिल सकेगी।
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वर्जन
बार-बार मशीन खराब होने पर कार्यदायी संस्था सायरिक्स से कड़ी आपत्ति जताई गई थी। केरल से अभियंताओं को भेजा गया है। जल्द मशीन दुरुस्त हो जाएगी और संचालित करवा दी जाएगी। डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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- ड्रैग कंट्रोल बोर्ड, ट्रांसफार्मर और एक्सरे ट्यूब में आई थी खराबी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में बीते करीब दो महीने से खराब पड़ी मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन की आखिरकार मरम्मत शुरू हो गई है। मंगलवार को केरल से पहुंची अभियंताओं की टीम ने मशीन की तकनीकी जांच के बाद उसे दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया। मशीन में ड्रैग कंट्रोल बोर्ड, ट्रांसफार्मर और एक्सरे ट्यूब समेत कई हिस्सों में खराबी सामने आई थी। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मशीन को दोबारा चालू कर दिया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में लगी मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन जर्जर और पुरानी हो चुकी है। एक वर्ष में मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन की मरम्मत पर करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च भी हो चुके हैं। इसके बावजूद मशीन खराब हो जाती है। अभी बीती 12 अगस्त को मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड खराब हुआ था। वह बदला गया लेकिन इसके बाद एक्सरे ट्यूब खराब हो गई। इसके बाद से मशीन बंद है, मरीजों की जांच का काम पोर्टेबल एक्सरे मशीन से किया जा रहा है। पोर्टेबल मशीन की क्षमता सीमित होने के कारण एक बार में करीब 50 से 60 एक्सरे करने के बाद उसे कुछ देर के लिए बंद करना पड़ता है। इससे मरीजों को दोबारा जांच मशीन चलने के बाद ही हो पाती है। जबकि मेडिकल कॉलेज में रोजाना 150 से 200 मरीज आते हैं जिनके 300 से 350 तक एक्सरे हो जाते हैं। पोर्टेबल मशीन पर काफी दबाव बढ़ा हुआ है। हालांकि, मंगलवार को केरल से आई अभियंताओं की टीम ने मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज पहुंची टीम में शामिल अभियंता सिब्बी, आसिफ और महेश ने मशीन की तकनीकी जांच करने के बाद मरम्मत का काम शुरू किया है। उन्होंने मशीन में ट्रांसफार्मर खराब होने की बात भी कही है। फिलहाल काम जारी कर दिया गया था।
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मरीजों को राहत की उम्मीद
मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन बनने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। रेडियोलॉजी विभाग में 100 एमए की मशीन से एक्सरे हो तो रहे हैं लेकिन अधिक दबाव के कारण मशीन बेहतर ढंग से काम नहीं कर पाती है। इतना ही नहीं पोर्टेबल मशीन में एक्सरे का प्रिंट भी नहीं आता है, मरीजों को मोबाइल फोन पर फोटो लेनी पड़ती है। अब काम शुरू हो गया है तो उम्मीद है कि मुख्य मशीन संचालित हो जाएगी और मरीजों को फिर से एक्सरे कराने में राहत मिल सकेगी।
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वर्जन
बार-बार मशीन खराब होने पर कार्यदायी संस्था सायरिक्स से कड़ी आपत्ति जताई गई थी। केरल से अभियंताओं को भेजा गया है। जल्द मशीन दुरुस्त हो जाएगी और संचालित करवा दी जाएगी। डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य