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जब अटलजी बोले, छोटे को नहीं बड़े पंडित की ओर देखो

Thu, 10 Feb 2022 10:20 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 10:20 PM IST
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When Atalji said, look at the elder Pandit, not the younger
शाहाबाद। विधानसभा सीट शाहाबाद का अतीत तमाम चुनावी यादों के साथ ही खास और बड़े राजनीतिज्ञों से जुड़ा हुुआ है। इस समय विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, तो ऐसे में अतीत के चुनावों में कुछ खास को लेकर यादें ताजा हो रही हैं।
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इन्हीं चुनावी यादों में शुमार है 1996 का चुनाव। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने छोटे पंडित की जगह बड़े पंडित का समर्थन करने की अपील की थी। 1996 के विस चुनाव में शाहाबाद सीट से पूर्व प्रधानमंत्री स्व. पंडित अटल बिहारी वाजपेयी की यादें जुड़ी हैं।
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जनसभा में उनके संबोधन के बाद पूर्व राज्यमंत्री व कांग्रेस के कद्दावर नेता व प्रत्याशी रामऔतार दीक्षित के लामबंद सजातीय वोट ताश के पत्ते की तरह बिखर गए थे।
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उस चुनाव में कांग्रेस व बसपा के बीच हुए गठबंधन में जीत की हैट्रिक लगा चुके पूर्व राज्यमंत्री पंडित रामऔतार को पार्टी ने फिर चुनाव के मैदान में उतारा था। क्षेत्र के सजातीय और दलित वोटों का उन्हें भरपूर समर्थन मिल रहा था।
कांग्रेस, सपा व भाजपा के बीच त्रिकोणीय संघर्ष की भूमिका तय हो गयी थी, मगर चुनाव के दौरान बड़ी फील्ड में हुई जनसभा के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी को जानकारी मिली कि क्षेत्र के अधिकांश ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान गठबंधन प्रत्याशी पंडित रामऔतार दीक्षित के पक्ष में है।
इस पर पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने जनसभा को संबोधित करते हुए इशारा करते हुए कहा कि चुनाव में छोटे पंडित को नहीं बड़े पंडित को देखो। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी गंगाभक्त सिंह से अपने प्रगाढ़ संबंधों का भी खुलासा किया।

इसके बाद अपने प्रत्याशी को विस पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताते हुए क्षेत्र में आधा दर्जन ब्राह्मण बहुल स्थानों पर नुक्कड़ सभा की थी।
इसका नतीजा यह हुआ कि अगड़ी जाति के वोटों में बिखराव हो गया और भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। 1991 व 1993 के बाद 1996 में सपा प्रत्याशी बाबू खां ने जीत की हैट्रिक लगाते हुए दोनों कद्दावर नेताओं को पराजित कर दिया था।
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