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Hardoi News: तालाब नहीं, मिली गेहूं की फसल, वसूली की संस्तुति
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हरदोई। मनरेगा मद के कामों के आंतरिक लेखा परीक्षा से जुड़े करीब एक करोड़ रुपये के 12 मामलों पर शासन ने गंभीरता दिखाई है। साल 2022-23 से 2024-25 में हुए कामों का हिसाब, अभिलेख न मिलने पर ऑडिट में वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़ा की आशंका जताई है। हाई रिस्क बेस्ड इंटरनल ऑडिट के अभी 12 प्रकरण लंबित होने पर आठ खंड विकास अधिकारियों से आख्या तलब की गई है।
मनरेगा में मद में कराए गए कामों और भुगतान का शासन ने हाई रिस्क बेस्ड इंटरनल ऑडिट कराया था। इसमें आठ विकास खंडों में 12 प्रकरणों की अभी ऑडिट परिपालन आख्या प्राप्त न होने पर ग्राम्य विकास आयुक्त ने नाराजगी जाहिर की थी। इस पर आठ कार्यक्रम अधिकारियों निस्तारण और अभिलेख न उपलब्ध न कराए जाने पर जवाब और आख्या तलब की गई है। 12 प्रकरण में करीब मांगा गया है। आयुक्त ग्राम विकास ने भेजे गए पत्र में कहा है कि ऑडिट में अभिलेख और कैशबुक न मिलने की बात कही गई है। बावन की ग्राम पंचायत महोलिया शिवपार और भरखनी की ग्राम पंचायत कनिकापुर उबरिया में तालाब बनवाए गए हैं, लेकिन भौतिक सत्यापन में मछली पालन नहीं होता मिला। ऐसे ही विकास खंड पिहानी में कोटरा और अंबारी में काम में अनियमितता मिली है।
विकास खंड शाहाबाद की ग्राम पंचायत सहादतनगर में तालाब के नाम दर्ज भूमि पर गेहूं की खेती होती मिली। जबकि टोडरपुर, हरियावां, सुरसा और टड़ियावां में कराए गए काम की कैशबुक और अभिलेख न मिलने पर आपत्ति जताई गई है। विकास खंड सुरसा में एक तालाब को बनवाए जाने में 10,86,125 रुपये, कृषि तालाब बनवाए जाने पर 10,04,511 रुपये और रोजगार दिए जाने के नाम पर 7,99,596 रुपये और खरीदारी के नाम पर 3,45,555 रुपये का भुगतान निकाला गया है। यह धोखाधड़ी की श्रेणी में है।
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वर्जन
मनरेगा मद में काम, खरीदारी में ऑडिट के लंबित प्रकरणों पर आठ विकास खंडों के कार्यक्रमों से परिपालन आख्या और अभिलेख तलब किए गए हैं। परिपालन न कराने पर संबंधित कार्यक्रम अधिकारी को वसूली किए जाने की चेतावनी दी गई है।
-अनुनय झा, जिला कार्यक्रम समन्वयक
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मनरेगा में मद में कराए गए कामों और भुगतान का शासन ने हाई रिस्क बेस्ड इंटरनल ऑडिट कराया था। इसमें आठ विकास खंडों में 12 प्रकरणों की अभी ऑडिट परिपालन आख्या प्राप्त न होने पर ग्राम्य विकास आयुक्त ने नाराजगी जाहिर की थी। इस पर आठ कार्यक्रम अधिकारियों निस्तारण और अभिलेख न उपलब्ध न कराए जाने पर जवाब और आख्या तलब की गई है। 12 प्रकरण में करीब मांगा गया है। आयुक्त ग्राम विकास ने भेजे गए पत्र में कहा है कि ऑडिट में अभिलेख और कैशबुक न मिलने की बात कही गई है। बावन की ग्राम पंचायत महोलिया शिवपार और भरखनी की ग्राम पंचायत कनिकापुर उबरिया में तालाब बनवाए गए हैं, लेकिन भौतिक सत्यापन में मछली पालन नहीं होता मिला। ऐसे ही विकास खंड पिहानी में कोटरा और अंबारी में काम में अनियमितता मिली है।
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विकास खंड शाहाबाद की ग्राम पंचायत सहादतनगर में तालाब के नाम दर्ज भूमि पर गेहूं की खेती होती मिली। जबकि टोडरपुर, हरियावां, सुरसा और टड़ियावां में कराए गए काम की कैशबुक और अभिलेख न मिलने पर आपत्ति जताई गई है। विकास खंड सुरसा में एक तालाब को बनवाए जाने में 10,86,125 रुपये, कृषि तालाब बनवाए जाने पर 10,04,511 रुपये और रोजगार दिए जाने के नाम पर 7,99,596 रुपये और खरीदारी के नाम पर 3,45,555 रुपये का भुगतान निकाला गया है। यह धोखाधड़ी की श्रेणी में है।
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मनरेगा मद में काम, खरीदारी में ऑडिट के लंबित प्रकरणों पर आठ विकास खंडों के कार्यक्रमों से परिपालन आख्या और अभिलेख तलब किए गए हैं। परिपालन न कराने पर संबंधित कार्यक्रम अधिकारी को वसूली किए जाने की चेतावनी दी गई है।
-अनुनय झा, जिला कार्यक्रम समन्वयक