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...कोरोना ने बदल दिया शादियों का ट्रेंड
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हरदोई। कोरोना काल ने जनजीवन को जहां पटरी से उतार दिया है। वहीं मांगलिक कार्यों के ट्रेंड को भी काफी हद तक बदल दिया है। इस बार तो मांगलिक कार्यों के कार्ड भी जहां मोबाइलों पर डिजिटल रूप में भेजे जा रहे हैं, तो वर वधू भी ऑनलाइन शापिंग को ही विवश हैं।
शहर के लखनऊ रोड निवासी अनुराग मिश्रा की पुत्री अंकिता की शादी लखीमपुर के आशीष के साथ तय हुई है। विवाह 22 मई को है। लॉकडाउन बढ़ने की उम्मीद के चलते इस बार कोरोना काल में कार्ड भी छपवाने की स्थिति नहीं बनी।
जिसके बाद अंकिता के परिवार वालों ने डिजिटल कार्ड बनवाने का फैसला लिया और अपने सगे संबंधियों को जिसको भी बुलाना है उसे उसके मोबाइल पर ही डिजिटल कार्ड ही भेजने का निर्णय लिया।
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पिता ने कहा कि कोरोना काल में किसी के यहां कार्ड जाकर देना भी उचित नहीं है। इसलिए कार्ड मोाबइल पर ही भेजना ज्यादा उचित है। दूसरा प्रकरण सिनेमा चौराहे के निकट अनुज का है।
अनुज का भी विवाह तय है और जून माह में तिथि निर्धारित की जा रही है लेकिन तब तक कपड़े आदि सिलवाने के लिए न तो कपड़ों की दुकान खुली और न ही टेलर की। जिसके बाद ऑनलाइन शॉपिंग करने की ही बाध्यता है। अनुज ने बताया कि कोरोना काल में शादियां बदले ट्रेंड में ही संभव हैं।
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शहर के लखनऊ रोड निवासी अनुराग मिश्रा की पुत्री अंकिता की शादी लखीमपुर के आशीष के साथ तय हुई है। विवाह 22 मई को है। लॉकडाउन बढ़ने की उम्मीद के चलते इस बार कोरोना काल में कार्ड भी छपवाने की स्थिति नहीं बनी।
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जिसके बाद अंकिता के परिवार वालों ने डिजिटल कार्ड बनवाने का फैसला लिया और अपने सगे संबंधियों को जिसको भी बुलाना है उसे उसके मोबाइल पर ही डिजिटल कार्ड ही भेजने का निर्णय लिया।
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पिता ने कहा कि कोरोना काल में किसी के यहां कार्ड जाकर देना भी उचित नहीं है। इसलिए कार्ड मोाबइल पर ही भेजना ज्यादा उचित है। दूसरा प्रकरण सिनेमा चौराहे के निकट अनुज का है।
अनुज का भी विवाह तय है और जून माह में तिथि निर्धारित की जा रही है लेकिन तब तक कपड़े आदि सिलवाने के लिए न तो कपड़ों की दुकान खुली और न ही टेलर की। जिसके बाद ऑनलाइन शॉपिंग करने की ही बाध्यता है। अनुज ने बताया कि कोरोना काल में शादियां बदले ट्रेंड में ही संभव हैं।