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पानी घटा, आफत बराकरार : 101 गांवों के लोग परेशान
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फोटो 41: सड़क पर डेरा डाले बाढ़ पीड़ित ग्रामीण। संवाद
हरदोई। बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे कम होने लगा हो, लेकिन 101 राजस्व गांवों में ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। खेतों में पानी भरा होने से फसलों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच गया। ग्रामीण मवेशियों को सड़कों पर बांध दिया है। गांवों के आसपास लंबे समय से पानी जमा होने के कारण मकानों और झोपड़ियों के कमजोर होने की आशंका भी बनी हुई है। प्रभावित गांवों में जिंदगी अभी सामान्य नहीं हुई है।
बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कमी से नदियों के जलस्तर में भी कमी देखने को मिली है। फिर भी खेतों में जलभराव, मवेशियों की सुरक्षा, घरों को नुकसान और आवागमन की समस्या ग्रामीणों के सामने बनी हुई है। बाढ़ का पानी कई स्थानों पर आबादी और घरों तक पहुंचा है। घर के आसपास और अंदर पानी भरने से मवेशियों को भी सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों ने मवेशियों को सड़क या ऊंचे स्थानों पर बांधना शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में बड़ी मात्रा में कृषि क्षेत्र जलभराव की चपेट में है।
गांवों के आसपास लंबे समय से पानी भरा होने के कारण कच्चे मकानों और झोपड़ियों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। तहसील बिलग्राम क्षेत्र रविवार को गंगा और गर्रा नदी के पानी में कमी आई। चुन्नी पुरवा में हालात ठीक हुए हैं और गांव से लगभग पानी निकल चुका है। गांव के 107 लोगों को अभी भी एहतियात के तौर पर राहत शिविर में ही रखा गया है। मल्लावां और माधोगंज क्षेत्र के गांवों में बढ़ रहा पानी भी ठहरा है और जलस्तर भी नीचे की ओर है। बिलग्राम और कचंदऊ परगना के गांवों में भी पानी घटा है। जरेला, पुन्ना पुरवा, मदारी पुरवा, मक्कू पुरवा, कटरी परसोला, कटरी छिबरामऊ, कटरी जरसेनामऊ, कटरी महादेवा, कटरी बिलुही में ग्रामीणों से लेकर मवेशियों तक को समस्या बनी हुई है। बिजली कटौती के कारण मोमबत्तियों के सहारे रात कट रही है।
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सोलर प्लेट के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था की जा रही है। गांवों में आवागमन नावों के सहारे ही चल रहा है। एसडीएम एन राम के मुताबिक, 4,700 ग्रामीणों को पका हुआ भोजन और 709 राहत किट वितरित की गईं। 3,300 परिवारों की अब तक राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। हरपालपुर क्षेत्र के अदनिया गांव में बाढ़ का पानी घरों तक भर जाने से कई परिवार गृहस्थी समेटकर सड़क पर आ गए हैं। रामलखन, रामकुमार, वीरपाल, रामकिशोर, हरिश्चंद्र, अमर सिंह व रामशंकर ने बताया कि घरों में बाढ़ का पानी भर गया है। सड़क पर बसेरा बना लिया है। बताया कि वह अपने खाने-पीने की व्यवस्था स्वयं कर रहे हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से उन्हें लंच पैकेट या अन्य कोई मदद नहीं मिली है।
राज्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों को सौंपी राहत किट
तहसील शाहाबाद क्षेत्र के सुखेता नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों के लोगों को उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने तीन गांव के 240 परिवारों में राहत सामग्री का वितरण किया। शर्मा गांव में 100, मिठनापुर और ककरघटा में 140 लोगों को खाद्य किट दी गई। कहा कि बाढ़ से प्रभावित किसी भी परिवार को राहत सामग्री से वंचित नहीं होना पड़ेगा। एसडीएम अवनीश कुमार, तहसीलदार कुलवंत सिंह, श्यामू त्रिवेदी, केन ग्रोवर सोसाइटी के अध्यक्ष रंजीत सिंह, लालाराम राजपूत, गोविंद पाठक, अधिवक्ता संघ के महामंत्री बलराम दीक्षित आदि लोग मौजूद रहे। वहीं सुखेता नदी में अभी भी जलस्तर कम नहीं हुआ है। शर्मा गांव के सभी गलियारे जलमग्न हैं। पैंतीस घरों में घुस है। मिठनापुर, खरगपुर, आंझी, रतनपुर, ककरघटा आदि गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं।
बाण गांव के शिविर 53 लोगों में त्वचा की बीमारी
तहसील बिलग्राम के बाढ़ग्रस्त बाण गांव में रविवार स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। शिविर में 86 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाएं वितरित की गईं। इसमें 53 मरीजों में चर्म रोग की शिकायत पाई गई। छह मरीज बुखार से पीड़ित और 27 मरीज अन्य बीमारियों से पीड़ित मिले। ग्रामीणों को मौसमी बीमारियों, साफ-सफाई और चर्म रोग से बचाव के प्रति टीम ने जागरूक भी किया। सीएचसी अधीक्षक डॉ. हेमंत राजपूत ने बताया कि शिविर लगाए जा रहे हैं।
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बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कमी से नदियों के जलस्तर में भी कमी देखने को मिली है। फिर भी खेतों में जलभराव, मवेशियों की सुरक्षा, घरों को नुकसान और आवागमन की समस्या ग्रामीणों के सामने बनी हुई है। बाढ़ का पानी कई स्थानों पर आबादी और घरों तक पहुंचा है। घर के आसपास और अंदर पानी भरने से मवेशियों को भी सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों ने मवेशियों को सड़क या ऊंचे स्थानों पर बांधना शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में बड़ी मात्रा में कृषि क्षेत्र जलभराव की चपेट में है।
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गांवों के आसपास लंबे समय से पानी भरा होने के कारण कच्चे मकानों और झोपड़ियों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। तहसील बिलग्राम क्षेत्र रविवार को गंगा और गर्रा नदी के पानी में कमी आई। चुन्नी पुरवा में हालात ठीक हुए हैं और गांव से लगभग पानी निकल चुका है। गांव के 107 लोगों को अभी भी एहतियात के तौर पर राहत शिविर में ही रखा गया है। मल्लावां और माधोगंज क्षेत्र के गांवों में बढ़ रहा पानी भी ठहरा है और जलस्तर भी नीचे की ओर है। बिलग्राम और कचंदऊ परगना के गांवों में भी पानी घटा है। जरेला, पुन्ना पुरवा, मदारी पुरवा, मक्कू पुरवा, कटरी परसोला, कटरी छिबरामऊ, कटरी जरसेनामऊ, कटरी महादेवा, कटरी बिलुही में ग्रामीणों से लेकर मवेशियों तक को समस्या बनी हुई है। बिजली कटौती के कारण मोमबत्तियों के सहारे रात कट रही है।
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सोलर प्लेट के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था की जा रही है। गांवों में आवागमन नावों के सहारे ही चल रहा है। एसडीएम एन राम के मुताबिक, 4,700 ग्रामीणों को पका हुआ भोजन और 709 राहत किट वितरित की गईं। 3,300 परिवारों की अब तक राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। हरपालपुर क्षेत्र के अदनिया गांव में बाढ़ का पानी घरों तक भर जाने से कई परिवार गृहस्थी समेटकर सड़क पर आ गए हैं। रामलखन, रामकुमार, वीरपाल, रामकिशोर, हरिश्चंद्र, अमर सिंह व रामशंकर ने बताया कि घरों में बाढ़ का पानी भर गया है। सड़क पर बसेरा बना लिया है। बताया कि वह अपने खाने-पीने की व्यवस्था स्वयं कर रहे हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से उन्हें लंच पैकेट या अन्य कोई मदद नहीं मिली है।
राज्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों को सौंपी राहत किट
तहसील शाहाबाद क्षेत्र के सुखेता नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों के लोगों को उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने तीन गांव के 240 परिवारों में राहत सामग्री का वितरण किया। शर्मा गांव में 100, मिठनापुर और ककरघटा में 140 लोगों को खाद्य किट दी गई। कहा कि बाढ़ से प्रभावित किसी भी परिवार को राहत सामग्री से वंचित नहीं होना पड़ेगा। एसडीएम अवनीश कुमार, तहसीलदार कुलवंत सिंह, श्यामू त्रिवेदी, केन ग्रोवर सोसाइटी के अध्यक्ष रंजीत सिंह, लालाराम राजपूत, गोविंद पाठक, अधिवक्ता संघ के महामंत्री बलराम दीक्षित आदि लोग मौजूद रहे। वहीं सुखेता नदी में अभी भी जलस्तर कम नहीं हुआ है। शर्मा गांव के सभी गलियारे जलमग्न हैं। पैंतीस घरों में घुस है। मिठनापुर, खरगपुर, आंझी, रतनपुर, ककरघटा आदि गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं।
बाण गांव के शिविर 53 लोगों में त्वचा की बीमारी
तहसील बिलग्राम के बाढ़ग्रस्त बाण गांव में रविवार स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। शिविर में 86 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाएं वितरित की गईं। इसमें 53 मरीजों में चर्म रोग की शिकायत पाई गई। छह मरीज बुखार से पीड़ित और 27 मरीज अन्य बीमारियों से पीड़ित मिले। ग्रामीणों को मौसमी बीमारियों, साफ-सफाई और चर्म रोग से बचाव के प्रति टीम ने जागरूक भी किया। सीएचसी अधीक्षक डॉ. हेमंत राजपूत ने बताया कि शिविर लगाए जा रहे हैं।

फोटो 41: सड़क पर डेरा डाले बाढ़ पीड़ित ग्रामीण। संवाद

फोटो 41: सड़क पर डेरा डाले बाढ़ पीड़ित ग्रामीण। संवाद

फोटो 41: सड़क पर डेरा डाले बाढ़ पीड़ित ग्रामीण। संवाद

फोटो 41: सड़क पर डेरा डाले बाढ़ पीड़ित ग्रामीण। संवाद