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Hardoi News: एक ही भूमि के दो-दो मालिक, 5,948 किसान ले रहे थे सम्मान निधि, भुगतान पर रोक
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हरदोई। जिले में एक ही भूमि के दो-दो स्वामी चिह्नित किए गए हैं। यह दो-दो भूस्वामी एक ही भूमि पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि लेते रहे। जिले में एक ही भूमि के दो-दो स्वामी के रूप में 5,948 किसान चिह्नित किए गए हैं। इन किसानों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। वहीं डेटा में अन्य गड़बड़ी पर कुल 35,533 किसानों की पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त पर रोक लगाई गई है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि साल 2019 में शुरू की गई थी। पीएम किसान सम्मान निधि में पात्र किसानों को साल में 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्त आधार से जुड़े बैंक खाते में दी जाती हैं। किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त दिए जाने के साथ ही मृतक किसान के स्थान पर उनके वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में वरासत होने पर नवीन स्वीकृति दी जाती है। वहीं भूमि की खरीद-फरोख्त में भी भूमि की खरीदारी करने वाले किसान को लाभ दिए जाने का प्रावधान है।
जिले में 19वीं किस्त के बाद डेटा के परीक्षण में 5,948 किसान ऐसे चिह्नित किए गए हैं जो एक भूमि के दो-दो स्वामी के रूप में दर्ज हैं। एक ही भूमि के वर्तमान और पूर्व भूस्वामी के तौर पर चिह्नित किए गए किसानों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। वहीं बताया कि नोडल विभाग, कृषि विभाग ने साल-2019 के बाद वरासत के अतिरिक्त भूमि प्राप्त करने वाले 3,550 किसानों का भी डेटा नहीं मिला है जबकि 25,035 किसानों ने जिस भूमि को दर्शाकर पीएम किसान का लाभ लिया है, उनके पूर्व भूस्वामी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। ऐसे में कुल 34,533 किसानों की पीएम किसान सम्मान निधि के भुगतान को रोका गया है।
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कुछ इस तरह होता खेल
पीएम किसान सम्मान निधि पाने की पात्रता के लिए किसान के पास भूमि होना अनिवार्य है। आयकरदाता, चार पहिया वाहन और दंपती को लाभ नहीं दिया जा सकता है। भूमि की खरीद-फरोख्त में दाखिल-खारिज की व्यवस्था है। लोग बैनामा कराने के बाद दाखिल-खारिज करा लेते हैं लेकिन राजस्व अभिलेखों में ऑनलाइन खतौनी में नाम आने तक पूर्व भूमि स्वामी ही दर्ज रहता है।
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पीएम किसान के डेटा में गड़बड़ी मिली है। साल 2019 के बाद वरासत के अतिरिक्त भूमि पाने वाले किसान, भूमि पाने वाले किसान का कोई विवरण न मिलना और एक ही भूमि पर वर्तमान और पूर्व भूस्वामी के लाभ पाने वाले किसान चिह्नित किए गए हैं। भुगतान पर रोक लगा दी गई है, हो सकता है कि इनमें से कुछ किसान सही हो और डेटा मिसिंग में चला गया हो। ऐसे में किसानों को अपना डेटा दुरुस्त करा लेना चाहिए फिर भी यदि डेटा में गड़बड़ी की पुष्टि हुई तो ऐसे किसानों को भविष्य में सभी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। -सतीश कुमार पांडेय, उप निदेशक कृषि
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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि साल 2019 में शुरू की गई थी। पीएम किसान सम्मान निधि में पात्र किसानों को साल में 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्त आधार से जुड़े बैंक खाते में दी जाती हैं। किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त दिए जाने के साथ ही मृतक किसान के स्थान पर उनके वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में वरासत होने पर नवीन स्वीकृति दी जाती है। वहीं भूमि की खरीद-फरोख्त में भी भूमि की खरीदारी करने वाले किसान को लाभ दिए जाने का प्रावधान है।
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जिले में 19वीं किस्त के बाद डेटा के परीक्षण में 5,948 किसान ऐसे चिह्नित किए गए हैं जो एक भूमि के दो-दो स्वामी के रूप में दर्ज हैं। एक ही भूमि के वर्तमान और पूर्व भूस्वामी के तौर पर चिह्नित किए गए किसानों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। वहीं बताया कि नोडल विभाग, कृषि विभाग ने साल-2019 के बाद वरासत के अतिरिक्त भूमि प्राप्त करने वाले 3,550 किसानों का भी डेटा नहीं मिला है जबकि 25,035 किसानों ने जिस भूमि को दर्शाकर पीएम किसान का लाभ लिया है, उनके पूर्व भूस्वामी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। ऐसे में कुल 34,533 किसानों की पीएम किसान सम्मान निधि के भुगतान को रोका गया है।
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पीएम किसान सम्मान निधि पाने की पात्रता के लिए किसान के पास भूमि होना अनिवार्य है। आयकरदाता, चार पहिया वाहन और दंपती को लाभ नहीं दिया जा सकता है। भूमि की खरीद-फरोख्त में दाखिल-खारिज की व्यवस्था है। लोग बैनामा कराने के बाद दाखिल-खारिज करा लेते हैं लेकिन राजस्व अभिलेखों में ऑनलाइन खतौनी में नाम आने तक पूर्व भूमि स्वामी ही दर्ज रहता है।
पीएम किसान के डेटा में गड़बड़ी मिली है। साल 2019 के बाद वरासत के अतिरिक्त भूमि पाने वाले किसान, भूमि पाने वाले किसान का कोई विवरण न मिलना और एक ही भूमि पर वर्तमान और पूर्व भूस्वामी के लाभ पाने वाले किसान चिह्नित किए गए हैं। भुगतान पर रोक लगा दी गई है, हो सकता है कि इनमें से कुछ किसान सही हो और डेटा मिसिंग में चला गया हो। ऐसे में किसानों को अपना डेटा दुरुस्त करा लेना चाहिए फिर भी यदि डेटा में गड़बड़ी की पुष्टि हुई तो ऐसे किसानों को भविष्य में सभी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। -सतीश कुमार पांडेय, उप निदेशक कृषि