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ट्रैफिक बेलगाम... अतिक्रमण का बोलबाला

Thu, 10 Feb 2022 10:24 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 10:24 PM IST
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Traffic unbridled... encroachment dominated
हरदोई। शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से डगमगा चुकी है। हालत ये हैं कि यहां बेलगाम होकर चलने वाले ट्रैफिक और अतिक्रमण ने जाम की समस्या तो आम कर ही दी है, साथ ही पैदल चलने वालों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। सड़कों पर पैदल चलना खतरनाक हो चुका हैै।
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इधर से बचें कि उधर से बचें, इसको लेकर पैदल चलने वालों के लिए बड़ा सवाल है, क्योंकि फुटपाथों पर ई-रिक्शा, टेंपो एवं बस अड्डों ने कब्जा जमा रखा है।
पिछले एक दशक में जिले में वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। सिर्फ शहर में ही 10 हजार से अधिक वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे चौराहों पर एक रास्ते से दूसरे रास्ते तक पहुंचने के लिए पैदल चलने वालों को सर्दी के मौसम में भी पसीना छूट जाता है।
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जरा सी चूक पर कोई दोपहिया वाहन या आटो रिक्शा सीधे ठोक न दे का अंदेशा बना रहता है। ऐसे में पिछले लंबे समय से शहर के प्रमुख एवं सबसे व्यस्ततम चौराहों पर क्रासिंग के लिए ओवरहेेड ब्रिज बनाने की मांग चल रही है, ताकि पैदल चलने वाले आराम से सड़क क्रास कर सकें।
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एक दशक पूर्व तक जिले में करीब दो लाख पंजीकृत वाहन थे और तब शहर में आटो रिक्शा चलने की शुरुआत हो रही थी। इन 10 वर्षों में 20 हजार से अधिक आटो रिक्शा हो गए, जबकि दो लाख से अधिक बाइक हो चुकी हैं।
हर वर्ष औसतन 30 हजार वाहन बढ़ रहे, जिसमें सबसे ज्यादा बाइक, कार एवं आटो- ई रिक्शा की संख्या है।
एक अनुमान के मुताबिक, दो किमी परिधि वाले शहर की सड़कों पर हर 10 हजार से अधिक से वाहन दिन भर फर्राटा भरते रहते हैं, तो रात के समय भारी वाहनों की बड़ी तादाद में आवाजाही रहती है।
ऐसे में जाम की झाम पूरे शहर में आम हो चुकी है और लोगों के पैदल चलने के लिए बनाए जाने वाले फुटपाथों पर आटो-रिक्शा और बस अड्डों का कब्जा रहता है।
कई बार बनी योजना, पर नहीं सकी कामयाब
शहर के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए आटो रूट निर्धारण से लेकर निजी बसों के अड्डों को शहर के की चुंगियों के आस पास स्थानांतरित करने एवं आटो टैक्सी स्टैंडों के लिए स्थान निर्धारित करने के साथ ही फुटपाथों को कब्जा मुक्त कराने व सड़कों पर डिवाइडर बनाकर यातायात कंट्रोल करने की कोशिश हो चुकी है।
नघेटा रोड पर पालिका ने डिवाइडर बनाकर रोल माडल के रूप में प्रयोग किया था, मगर आटो टैक्सी आदि के फुटपाथों पर कब्जा करने वालों के आगे बेबस हुई पालिका की सड़कों पर डिवाइडर बनाने की योजना आगे न बढ़ सकी।
अस्थायी डिवाइडरों को निगल गए भारी वाहन
कुछ समय पूर्व जिला प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सभी प्रमुख चौराहों से जुड़ने वाली सड़कों पर अस्थायी डिवाइडर के रूप में लोहे के पोल एवं पत्थर की पटरी बनवाई थी
जिसमें नुमाइश चौराहे के पास सांडी रोड़ पर लगाए गए लोहे के खंभे भारी वाहनों ने तोड़ दिए। इसके बाद दोबारा नहीं लगाए गए। सोल्जर बोर्ड चौराहे से अस्पताल तिराहे की ओर जाने वाले सड़क के हाल पर भी जिम्मेदार बेखबर बने रहे।
पॉयलेट प्रोजेक्ट भी फेल
जिला प्रशासन ने ट्रैैफिक कंट्रोल के लिए लाइट सिग्नल सिस्टम के तहत पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में लखनऊ चुंगी चौराहे पर व्यवस्था की थी, मगर यह व्यवस्था कामयाब न हो सकी।
लाइटें लगी हैं, मगर उनके संचालन से लेकर नियमों का पालन कराने को लेकर जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं।
...तो नहीं है ट्रैफिक पुलिस का खौफ
ट्रैफिक पुलिस की जिलेभर में कमी है, लिहाजा नागरिक पुलिस के साथ होमगार्ड के सहारे व्यवस्था रहती है।
लोगों में आम धारणा है कि रोके टोके जाने पर असरदारों की बात करा देंगे तो बस मामला निपट जाएगा, कुछ मामलों में ऐसा होते रहने की चर्चाएं भी हुई है। शायद ऐसी ही कुछ वजह है जिसके कारण सख्ती के साथ ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रह्रा।
बोले वरिष्ठ नागरिक
नुमाइश चौराहा सहित भीड़ वाले चौराहों पर पैदल सड़क क्रास करना किसी जोखिम से कम नहीं है। ऐसे में क्रासिंग के लिए ओवरहेड बनाए जाने चाहिए।
- एके मिश्रा, वरिष्ठ नागरिक
जाके पांउ न फटे बिबाई सो का जाने पीर पराई ऐसे में जिम्मेदार विभागों को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे आटो रिक्सा आदि के कब्जे में रहने वाले फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त हो । जाम की समस्या के निस्तारण के साथ ही पैदल चलने वालों के लिए सफर सुगम किया जाना चाहिए ।

-एसके वर्मा
समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान से फुटपाथों को कब्जा मुक्त कराया जाता है। सड़कों पर डिवाइडर एवं ओवरहेड क्रासिंग की तो इसको लेकर जरूरतों का आकलन कराने के साथ संबंधित विभागों की होने वाली बैठक में बात रखी जाएगी। शहर की अधिकांश सड़के पीडब्ल्यूडी की हैं।
- रविशंकर, पालिका ईओ
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