फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   they need their own treatment

इनको खुद के इलाज की दरकार

Sat, 26 Feb 2022 11:47 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 11:47 PM IST
विज्ञापन
they need their own treatment
सवायजपुर। कस्बा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय का भवन जर्जर हो चुका है। कई दशक पुराने भवन में यह अस्पताल संचालित हो रहा है। इस पशु अस्पताल में कार्यरत स्टाफ हादसे की आशंका से हमेशा सशंकित रहते हैं।
विज्ञापन

1980 में बने अस्पताल का भवन 42 साल पुराना है। जिसका कार्य क्षेत्र आसपास के इलाके में है। खस्ताहाल भवन से यहां कार्यरत कर्मियों के सिर पर खतरा मंडरा रहा है।
विज्ञापन

एक दशक पूर्व ही इस भवन की हालत खस्ता हो चुकी थी और गिरने के कगार पर पहुंची गई थी, लेकिन यहां तैनात उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा शासन को अवगत कराने के बाद भी कार्य नहीं कराया जा सका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अस्पताल में बाउंड्रीवाल तक नहीं है, जिससे दिनभर सूअर व अन्य जानवर अस्पताल परिसर में रहते हैं। छत के प्लास्टर टूटकर नीचे गिर रहे हैं। सरिया दिखाई दे रही हैं। रंगाई-पुताई का कार्य नहीं किया गया है।
लोग यहां अपने पशुओं के इलाज व टीकाकरण के लिए पहुंचते हैं। जर्जर बिल्डिंग में ही पशुओं का इलाज होता है। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र वर्मा ने कहा कि पशु अस्पताल के निर्माण के प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है।
कहा कि बजट आने के बाद निर्माण कार्य कराया जाएगा। उन्होंने अस्पताल की जमीन पर स्थानीय लोगों पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कई बार मौखिक व लिखित शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
अस्पताल में तैनात रहे डॉक्टर बच्चा सिंह के गैर जनपद स्थानांतरण के पांच माह बीतने के बाद भी चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं की गई है।
पाली के चिकित्सक को प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है, जो शायद ही कभी आते हैं। अस्पताल में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मी संदीप व विमलेश बाजपेई ही आने वाले पशुओं का इलाज करते हैं।

क्षेत्र के दत्त नगर निवासी बृजेश, जैतापुर निवासी विशुन दयाल ने बताया कि यहां सुविधाएं न होने से दिक्कतें होती हैं।
कस्बा के अलावा मदनापुर, गौरखेड़ा, खितौली, सिमरिया, सिलवारी बसेलिया, खम्हरिया सहित चार न्याय पंचायतों के लगभग 40 गांवों के पशुपालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेएन पांडेय ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed