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Hardoi News: नहाय-खाय के साथ छठ मइया का पूजन और व्रत शुरू

Sat, 25 Oct 2025 10:41 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Oct 2025 10:41 PM IST
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The worship and fasting of Chhath Maiya begins with Nahai-Khaay.
फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृ​त्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद
हरदोई। दिवाली के बाद छठ मइया की पूजा-अर्चना शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गई है।
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लोक आस्था के महापर्व को लेकर पूजा से जुड़े परिवारों में उल्लास और उत्साह है। परिवार में सात्विक भावना के साथ व्रत रखने वाले सदस्य के साथ परिवार के अन्य सदस्य भी श्रद्धा और विश्वास से छठ मइया से अपनी मनोकामना के साथ ही लोक कल्याण की कामना कर रहे हैं।
लोक आस्था और श्रद्धा के महापर्व छठ मइया का पूजन-अर्चन शहर और संडीला नगर में धूमधाम से किए जाने की परिवारों ने तैयारी की है। संडीला नगर और औद्योगिक क्षेत्र में छठ मइया का व्रत बड़ी संख्या में महिलाओं की तरफ से रखा गया है। छठ मइया का पूजन-अर्चन और व्रत बिहार प्रांत और पूर्वांचल से जुड़े परिवारों में बड़ी आस्था और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। नहाय-खाय के साथ ही चार दिवसीय महापर्व का शनिवार से शुभारंभ हो गया।
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नगर के शीतला माता मंदिर के सरोवर और औद्योगिक क्षेत्र में मुरारनगर के मां दुर्गा पंडाल के पास पूजन और अर्घ्य के लिए कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। वहीं पर बेदी भी बनाई गई हैं। श्रद्धालु महिलाएं रविवार को खरना व्रत रखकर गन्ने के रस और चावल और गुड़-चावल की खीर बनाकर भोग-प्रसाद अर्पित करेंगी। इसके बाद सोमवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य और मंगलवार सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण के साथ भोग-प्रसाद अर्पित करेंगी। उसी के साथ व्रत का समापन होगा।
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पूजन-अर्चन कर छठ मइया की महिमा का गुणगान किया जाता है और उनसे कृपा की कामना करती हैं। मान्यता है कि व्रत करने पर सूर्य देव और छठ मइया सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। संतान, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नगर के घाटों की सफाई, सजावट, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा बंदोबस्त प्रशासन और श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जा रहा है। महिलाएं घरों में पारंपरिक गीतों और भजनों से छठ मइया को मनाने के लिए आराधना में लीन हैं।
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जमसारा निवासी लता सिंह ने बताया कि छठ मइया ने उनकी मनोकामना पूरी की है। उन्होंने मनोकामना तो नहीं बताई लेकिन बताया कि इस साल से उन्होंने छठ मइया के व्रत का संकल्प लिया है।
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बलिया जनपद की मूल निवासी मीना यादव करीब दो दशक से संडीला में परिवार के साथ रह रही हैं। बताया कि उनके जेठ अशोक कुमार करीब 20 साल पहले संडीला एफसीआई गोदाम में तैनात हुए थे। तब से उनका परिवार मुरारनगर में रहकर छठ पूजा करता आ रहा है।
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बिहार प्रांत के गोपालगंज जनपद की मूल निवासी सीता देवी ने बताया कि उनके पति 1983 में कताई मिल काम कराने आए थे। तभी से उनका परिवार यहीं रह रहा है। परिवार हर साल छठ मइया का पूजन-अर्चन करता आ रहा है। बताया कि बहू बिंदु के भाई विवेक की भी मनोकामना छठ मइया ने पूरी की। मनोकामना पूरी होने पर इस साल बहू बिंदू पहली बार व्रत रख रही हैं। छठ पूजन के साथ ही घर पर श्रीराम चरित मानस पाठ भी कराया जा रहा है।
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कस्बा निवासी डॉ. विवेक सिंह के साथ विवाह कर बनारस से आईं ज्योति सिंह भी छठ मइया का पूजन-अर्चन करती हैं। बताया कि ससुराल में छठ मइया के पूजन के लिए सभी लोग उनका साथ देते हैं। वह शीतला माता मंदिर के सरोवर पर छठ मइया का पूजन करती हैं।
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पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से पीतल के बर्तन में बनता है भोग-प्रसाद
दिवाली के बाद छठ पूजन को लेकर जुड़े परिवारों में उत्साह-उल्लास रहता है। परिवार की महिलाओं के साथ ही अन्य सदस्य भी व्रत रखते हैं। छठ मइया से अपनी मनोकामना के साथ ही लोक कल्याण की कामना करते हैं। छठ पूजन में पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों और पीतल के बर्तनों का महत्व दिखता है। छठ पूजन से जुड़े परिवार के सदस्यों ने बताया कि छठ मइया के पूजन, भोग-प्रसाद के साथ ही व्रत-उपवास के फलाहार को भी मिट्टी के चूल्हों पर आम की लकड़ी से तैयार आग से पीतल के बर्तन में ही पकाया जाता है। बताया कि इसी के साथ दिवाली त्योहार से ही छठ पूजा वाले परिवारों में लहसुन और प्याज, मांस-मंदिरा का सेवन भी निषिद्ध हो जाता है। व्रती के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी सात्विक भोजन ही बनाया और परोसा जाता है।

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डीएम आवास में भी छठ मइया के पूजन की जुटाई गईं व्यवस्थाएं
छठ मइया के पूजन के लिए इस साल जिलाधिकारी आवास में भी व्यवस्थाएं जुटाई गईं हैं। जिलाधिकारी अनुनय झा मूलरूप से बिहार प्रांत के हैं। उनकी मां अलका झा अपनी बहन आभा झा के साथ इन दिनों अपने आईएएस बेटे अनुनय झा के पास आई हैं। बताया कि मां-बेटे दोनों की छठ मइया में विशेष आस्था है। इसके चलते डीएम ने अपने आवास में ही छठ मइया के पूजन के लिए सभी व्यवस्थाओं को जुटाया है।

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

फोटो 18: संडीला के मुरारनगर में बनाया गया कृत्रिम तालाब व बनी बेदी। संवाद

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