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तीसरी आंख से भी नहीं बदली तस्वीर
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Thu, 30 Apr 2015 11:48 PM IST
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एआरटीओ कार्यालय में बाहरी लोगों पर नजर रखने को
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सीसीटीवी कैमरे तो लग गए, मगर इसके बाद भी कामकाज की तस्वीर वहीं पुरानी
नजर आती है। अभी भी बाहरी लोगों को दबदबा है। उनके बिना कोई कार्य करा पाना
टेढ़ी खीर है। इससे यहां पर आने लोगों को इन बाहरी लोगों पर निर्भरता रहती
है।
विभागाध्यक्ष कर्मियों की कमी की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे है। शहर कोतवाली के सैय्यापुरवा निवासी रामचंद्र एआरटीओ कार्यालय में कार का लाइसेंस लेने के लिए पहुंचे थे। वैसे तो वहां पर लर्निंग की फीस मात्र साठ रुपये है, पर उनसे दो हजार रुपये की मांग की गई।
वह कार्यालय में स्वयं लाइसेंस बनवाने का प्रयास करते रहे, पर अंत में उनको वापस लौटना पड़ा। इसी तरह हरपालपुर थाना क्षेत्र के खसौरा निवासी अनिल गुरुवार को दो पहिया वाहन की लाइसेंस के लिए सुबह से कार्यालय पहुंच गए थे, मगर उनकी फीस ही जमा नहीं हो सकी। इस कारण उनका नंबर नहीं आया।
उनसे शनिवार को पुन: आने के लिए कहा गया। इससे उनको बैरंग कई किलोमीटर वापस लौटना पड़ा। एआरटीओ कार्यालय में प्रतिदिन ऐसे ही सैकड़ों लोग पहुंचते है और अपने कार्य के लिए भटकते रहते हैं, पर उनकी कोई भी सुनने वाला नहीं है।
जब तक वह लोग कार्यालय के बाहरी लोगों से संपर्क नहीं करते, कार्य नहीं होता है। इससे यह आने वाले लोग परेशान है। उधर, एआरटीओ कार्यालय में लर्निंग लाइसेंस बनवाना हो तो उसके लिए लिखित परीक्षा देने का प्रावधान है। वहीं स्थायी लाइसेंस के लिए गाड़ी का चलाकर दिखाना होता है।
इससे पूर्व लोगों को लाइसेंस की फीस जमा करनी होती है। इसके बाद डिजिटल फोटो खींचने के उपरांत लाइसेंस जारी होता है, पर आप दो पहिया वाहन के लिए पांच सौ रुपये दें तो आपको कोई भी परीक्षा नहीं देनी होगी और लाइसेंस बन जाएगा। एआरटीओ कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे लग गए है।
ताकि कार्यालय की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, पर इसके बाद भी कार्यालय में बाहरी लोग इस कदर हावी है कि सामने ही आवेदकों के साथ डील करते रहते है। इसके बावजूद अफसरों को कुछ भी नजर नहीं आता है। उधर, एआरटीओ कार्यालय में वाहनों के मेंटीनेंस के नाम पर भी जमकर गोलमाल किया जाता है।
विभागीय अधिकारी जर्जर वाहन को भी उपयोगी बताकर उसके संचालन की अनुमति दे देते हैं। इस कारण जिले में सैकड़ाें वाहन ऐसे है जो निर्धारित अवधि पूरी कर चुके हैं, पर वह अभी भी सड़कों पर धड़ल्ले से फर्राटा भर रहे हैं।
विभागाध्यक्ष कर्मियों की कमी की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे है। शहर कोतवाली के सैय्यापुरवा निवासी रामचंद्र एआरटीओ कार्यालय में कार का लाइसेंस लेने के लिए पहुंचे थे। वैसे तो वहां पर लर्निंग की फीस मात्र साठ रुपये है, पर उनसे दो हजार रुपये की मांग की गई।
वह कार्यालय में स्वयं लाइसेंस बनवाने का प्रयास करते रहे, पर अंत में उनको वापस लौटना पड़ा। इसी तरह हरपालपुर थाना क्षेत्र के खसौरा निवासी अनिल गुरुवार को दो पहिया वाहन की लाइसेंस के लिए सुबह से कार्यालय पहुंच गए थे, मगर उनकी फीस ही जमा नहीं हो सकी। इस कारण उनका नंबर नहीं आया।
उनसे शनिवार को पुन: आने के लिए कहा गया। इससे उनको बैरंग कई किलोमीटर वापस लौटना पड़ा। एआरटीओ कार्यालय में प्रतिदिन ऐसे ही सैकड़ों लोग पहुंचते है और अपने कार्य के लिए भटकते रहते हैं, पर उनकी कोई भी सुनने वाला नहीं है।
जब तक वह लोग कार्यालय के बाहरी लोगों से संपर्क नहीं करते, कार्य नहीं होता है। इससे यह आने वाले लोग परेशान है। उधर, एआरटीओ कार्यालय में लर्निंग लाइसेंस बनवाना हो तो उसके लिए लिखित परीक्षा देने का प्रावधान है। वहीं स्थायी लाइसेंस के लिए गाड़ी का चलाकर दिखाना होता है।
इससे पूर्व लोगों को लाइसेंस की फीस जमा करनी होती है। इसके बाद डिजिटल फोटो खींचने के उपरांत लाइसेंस जारी होता है, पर आप दो पहिया वाहन के लिए पांच सौ रुपये दें तो आपको कोई भी परीक्षा नहीं देनी होगी और लाइसेंस बन जाएगा। एआरटीओ कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे लग गए है।
ताकि कार्यालय की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, पर इसके बाद भी कार्यालय में बाहरी लोग इस कदर हावी है कि सामने ही आवेदकों के साथ डील करते रहते है। इसके बावजूद अफसरों को कुछ भी नजर नहीं आता है। उधर, एआरटीओ कार्यालय में वाहनों के मेंटीनेंस के नाम पर भी जमकर गोलमाल किया जाता है।
विभागीय अधिकारी जर्जर वाहन को भी उपयोगी बताकर उसके संचालन की अनुमति दे देते हैं। इस कारण जिले में सैकड़ाें वाहन ऐसे है जो निर्धारित अवधि पूरी कर चुके हैं, पर वह अभी भी सड़कों पर धड़ल्ले से फर्राटा भर रहे हैं।