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बरौली के जवान को दी गई अंतिम विदाई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sat, 06 Jun 2015 12:14 AM IST
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भारत तिब्बत सेना पुलिस के जवान का शुक्रवार को पैतृक
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गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान
ग्रामीणों समेत परिजनों व सैन्य साथियों की आंखें नम दिखीं।
बघौली क्षेत्र के बरौली गांव निवासी आनंद मिश्रा (23) पुत्र मस्तराम मिश्रा मदुरई चेन्नई तमिलनाडु में आईटीबीपी में जवान के पद पर तैनात थे। दो जून को हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई थी। चार जून की रात्रि पौने दस बजे बघौली चौराहे स्थित उनके घर पर जवान का शव लेकर आईटीबीपी के सहायक सेनानायक संतोष कुमार, इंस्पेक्टर महिपाल सिंह व राजनाथ सिंह पहुंचेे।
शुक्रवार को जवान के पैतृक गांव बरौली में आईटीबीपी द्वारा गार्ड आफ आनर देकर शस्त्र सलामी देने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं व पुरुष मौजूद थे। इस दौरान बसपा एमएलसी डा. रामकुमार कुरील, ओम प्रकाश मिश्र, सीओ बघौली तारकेश्वर पांडेय, एसओ जावेद आदि मौजूद थे।
इस बाबत आनंद के परिजनों ने बताया कि 29 मई को आनंद मदुरई जाने को अपने घर से जब निक ले थे तो मां से जल्दी घर आने की बात कही थी, पर होनी को कुछ और ही मंजूर था। उधर, आनंद के पिता मस्तराम बड़े बेटे आनंद को दूल्हा बनाने की तैयारियां जोर शोर से कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एक जगह उसका रिश्ता अंतिम पायदान पर था, पर सब सपने टूट कर बिखर गए।
बघौली क्षेत्र के बरौली गांव निवासी आनंद मिश्रा (23) पुत्र मस्तराम मिश्रा मदुरई चेन्नई तमिलनाडु में आईटीबीपी में जवान के पद पर तैनात थे। दो जून को हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई थी। चार जून की रात्रि पौने दस बजे बघौली चौराहे स्थित उनके घर पर जवान का शव लेकर आईटीबीपी के सहायक सेनानायक संतोष कुमार, इंस्पेक्टर महिपाल सिंह व राजनाथ सिंह पहुंचेे।
शुक्रवार को जवान के पैतृक गांव बरौली में आईटीबीपी द्वारा गार्ड आफ आनर देकर शस्त्र सलामी देने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं व पुरुष मौजूद थे। इस दौरान बसपा एमएलसी डा. रामकुमार कुरील, ओम प्रकाश मिश्र, सीओ बघौली तारकेश्वर पांडेय, एसओ जावेद आदि मौजूद थे।
इस बाबत आनंद के परिजनों ने बताया कि 29 मई को आनंद मदुरई जाने को अपने घर से जब निक ले थे तो मां से जल्दी घर आने की बात कही थी, पर होनी को कुछ और ही मंजूर था। उधर, आनंद के पिता मस्तराम बड़े बेटे आनंद को दूल्हा बनाने की तैयारियां जोर शोर से कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एक जगह उसका रिश्ता अंतिम पायदान पर था, पर सब सपने टूट कर बिखर गए।