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Hardoi News: लागत से इस्टीमेट और बिल बढ़ाकर बनाया है, भुगतान के लिए देने होंगे 10 लाख रुपये
Tue, 03 Dec 2024 01:46 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Tue, 03 Dec 2024 01:46 AM IST
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नोट : कृपया मुख्य खबर लखनऊ से ले लीजिएगा।
लागत से इस्टीमेट और बिल बढ़ाकर बनाया है, भुगतान के लिए देने होंगे 10 लाख रुपये
- एक लाख रुपये लेते रंगे हाथ पकड़े गए, सतर्कता अधिष्ठान थाने पर दर्ज हुआ मुकदमा
- पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अवर अभियंता ने फर्म संचालक से लागत से इस्टीमेट और बिल बढ़ाकर बनाने के नाम पर 10,00,000 रुपये की रिश्वत मांगी। रिश्वत न मिलने पर बिल भी पास नहीं कर रहा था। सोमवार को 1,00,000 रुपये लेते समय अवर अभियंता को भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। अवर अभियंता की गिरफ्तारी की जानकारी से विभाग में सनसनी फैल गई।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में काम करने वाले फर्म संचालक महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने भुगतान के लिए विभाग में प्रयास किए। निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में तैनात अवर अभियंता सत्येंद्र यादव ने बिल पास किए जाने और सहायक अभियंता को हिस्सा दिए जाने के नाम पर 10,00,000 रुपये की मांग की। ठेकेदार महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बिल पास कराने के नाम पर मांगी जा रही रिश्वत की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन एसएसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी से कर दी। जिसमें उन्होंने कहा है कि अवर अभियंता बिल पास करने के साथ ही सहायक अभियंता के हिस्सा के नाम पर 10,00,000 रुपये मांग रहा है। अवर अभियंता ने कहा है कि 40 लाख रुपये से बनने वाली सड़क के लिए उसने इस्टीमेट पहले से ही बढ़ाकर बनाया है। जिससे उसके हिस्से के रुपये देने होंगे। उन्होंने 1,00,000 रुपये रिश्वत में देने के लिए हामी भर दी है। अवर अभियंता को सोमवार को रिश्वत के रुपये लेने के लिए लखनऊ बुलाया। जहां पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने दुबग्गा से रुपये लेने के बाद रंगे हाथ पकड़ लिया। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के एसएसपी की ओर से बताया गया कि अवर अभियंता को गिरफ्तार किए जाने के साथ ही सतर्कता अधिष्ठान थाने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिशासी अभियंता संजीव भीमराव ने बताया कि टेंडर खुलने के कारण वह लखनऊ गए थे। वहीं भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक ने फोन पर अवर अभियंता को पकड़े जाने की जानकारी दी है। रिपोर्ट मिलने पर विभाग को लिखापढ़ी की जाएगी।
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कार्रवाई का भय और न सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त मंशा का ख्याल
हरदोई। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को न तो कार्रवाई का भय है और न ही भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की मंशा का ख्याल है। अभी हाल ही में मार्गों के निर्माण में गड़बड़ी और लेपित सतह के सैंपल फेल होने पर दो अधिशासी अभियंता समेत 16 अभियंताओं को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से यहां के लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं पर की गई कार्रवाई के बाद अभी अधिशासी अभियंता के पद पर नवीन तैनाती भी नहीं हो पाई है। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क के भुगतान में रिश्वत लिए जाने का मामला सामने आ गया। फर्म संचालक की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में तैनात अवर अभियंता सत्येंद्र यादव ने बिल भुगतान के एवज में 10,00,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर ली। 1,00,000 रुपये रिश्वत लेते समय लखनऊ में ही रंगे हाथ पकड़ गए। विभागीय कर्मियों में चर्चा है कि हाल में ही मुख्यमंत्री की ओर से विभागीय अभियंताओं पर की गई कार्रवाई से ही सबक लिया होता तो, शायद रिश्वत लेने का फर्म संचालक पर दबाव न बनाते और पकड़े जाने से बच जाते।
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लागत से इस्टीमेट और बिल बढ़ाकर बनाया है, भुगतान के लिए देने होंगे 10 लाख रुपये
- एक लाख रुपये लेते रंगे हाथ पकड़े गए, सतर्कता अधिष्ठान थाने पर दर्ज हुआ मुकदमा
- पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अवर अभियंता ने फर्म संचालक से लागत से इस्टीमेट और बिल बढ़ाकर बनाने के नाम पर 10,00,000 रुपये की रिश्वत मांगी। रिश्वत न मिलने पर बिल भी पास नहीं कर रहा था। सोमवार को 1,00,000 रुपये लेते समय अवर अभियंता को भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। अवर अभियंता की गिरफ्तारी की जानकारी से विभाग में सनसनी फैल गई।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में काम करने वाले फर्म संचालक महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने भुगतान के लिए विभाग में प्रयास किए। निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में तैनात अवर अभियंता सत्येंद्र यादव ने बिल पास किए जाने और सहायक अभियंता को हिस्सा दिए जाने के नाम पर 10,00,000 रुपये की मांग की। ठेकेदार महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बिल पास कराने के नाम पर मांगी जा रही रिश्वत की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन एसएसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी से कर दी। जिसमें उन्होंने कहा है कि अवर अभियंता बिल पास करने के साथ ही सहायक अभियंता के हिस्सा के नाम पर 10,00,000 रुपये मांग रहा है। अवर अभियंता ने कहा है कि 40 लाख रुपये से बनने वाली सड़क के लिए उसने इस्टीमेट पहले से ही बढ़ाकर बनाया है। जिससे उसके हिस्से के रुपये देने होंगे। उन्होंने 1,00,000 रुपये रिश्वत में देने के लिए हामी भर दी है। अवर अभियंता को सोमवार को रिश्वत के रुपये लेने के लिए लखनऊ बुलाया। जहां पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने दुबग्गा से रुपये लेने के बाद रंगे हाथ पकड़ लिया। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के एसएसपी की ओर से बताया गया कि अवर अभियंता को गिरफ्तार किए जाने के साथ ही सतर्कता अधिष्ठान थाने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिशासी अभियंता संजीव भीमराव ने बताया कि टेंडर खुलने के कारण वह लखनऊ गए थे। वहीं भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक ने फोन पर अवर अभियंता को पकड़े जाने की जानकारी दी है। रिपोर्ट मिलने पर विभाग को लिखापढ़ी की जाएगी।
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कार्रवाई का भय और न सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त मंशा का ख्याल
हरदोई। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को न तो कार्रवाई का भय है और न ही भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की मंशा का ख्याल है। अभी हाल ही में मार्गों के निर्माण में गड़बड़ी और लेपित सतह के सैंपल फेल होने पर दो अधिशासी अभियंता समेत 16 अभियंताओं को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से यहां के लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं पर की गई कार्रवाई के बाद अभी अधिशासी अभियंता के पद पर नवीन तैनाती भी नहीं हो पाई है। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क के भुगतान में रिश्वत लिए जाने का मामला सामने आ गया। फर्म संचालक की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में तैनात अवर अभियंता सत्येंद्र यादव ने बिल भुगतान के एवज में 10,00,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर ली। 1,00,000 रुपये रिश्वत लेते समय लखनऊ में ही रंगे हाथ पकड़ गए। विभागीय कर्मियों में चर्चा है कि हाल में ही मुख्यमंत्री की ओर से विभागीय अभियंताओं पर की गई कार्रवाई से ही सबक लिया होता तो, शायद रिश्वत लेने का फर्म संचालक पर दबाव न बनाते और पकड़े जाने से बच जाते।
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