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Hardoi News: जलभराव में डूब गए नाला सफाई पर खर्च हुए 38 लाख रुपये
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फोटो 16: ममरेजपुर मे धान लगवाते झरोइया निवासी आशुतोष सिंह। संवाद
हरदोई। मानसून की पहली बरसात से हुए जलभराव में निकाय के नाला सफाई के दावे डूब गए। शहर के कई मार्गों पर पानी भर गया। लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। कई स्थानों पर सड़क सहित फुटपाथ तक हुए जलभराव से नाले-नालियों की सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई। सड़क और फुटपाथ जलमग्न होने से राहगीरों के साथ ही दुकानदारों को भी दिक्कतें हुईं। वहीं उमस से भी राहत नहीं मिली।
मानसून की पहली बरसात मंगलवार सुबह हुई। बरसात ने निकाय के नाला सफाई के दावों की हकीकत सामने ला दी। निकाय की ओर से खुद के संसाधनों के साथ ही मुख्य नालों की सफाई के लिए 38 लाख रुपये का ठेका उठाया गया था। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सड़क सहित फुटपाथ तक जलभराव हो गया। बरसात से नघेटा रोड सहित शहर के कई मार्ग और फुटपाथ जलमग्न हो गए। इससे पैदल चलने वालों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं सर्कुलर रोड, झबरापुरवा ड्रेन, महोलिया ड्रेन आदि कई नालों में अब भी कूड़ा-करकट जमा है जिससे पानी निकासी प्रभावित हो रही है।
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नाले-नालियों के निकाय के संसाधनों के साथ ही ठेके से भी साफ-सफाई कराई गई और अभी भी कराई जा रही है। सिल्ट के कारण कम बल्कि प्लास्टिक, पॉलीथिन और कूड़ा-करकट आदि डाले जाने से नालियां चोक हो रही हैं। इससे जलभराव की स्थिति बन जाती है। निकाय का प्रयास है कि नाले-नालियों को साफ कराते हुए जलनिकासी सुचारु कराई जाएगी। -रामेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी
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किसानों ने शुरू की धान की पौध रोपाई
हरदोई। जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों ने गति पकड़ ली है। मौसम की अनिश्चितता और समय से पर्याप्त बरसात न होने के कारण किसान केवल मानसून के भरोसे नहीं बैठे हैं। किसानों ने सिंचाई संसाधनों की मदद से खेतों में पलेवा कर धान की पौध रोपाई शुरू कर दी है। खेतों में इन दिनों किसानों की व्यस्तता बढ़ गई है और गांवों में कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं।
मानसून की पहली बरसात से खेती-किसानी पर कोई बड़ा असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। किसान मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं। समय पर बरसात न होने और कम बारिश की स्थिति में फसल प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नलकूप और अन्य सिंचाई संसाधनों के माध्यम से खेतों में पलेवा कर धान की पौध की रोपाई की जा रही है। बरसात से खेतों की मिट्टी की गर्मी नम हुई है। बरसात ऐसी नहीं हुई कि खेतों में पानी भर गया हो, ऐसे में धान की रोपाई के लिए अन्य संसाधनों से ही पानी जुटाकर पलेवा किया जा रहा है। बेनीगंज, कछौना, बेहटागोकुल, कोथावां, हरियावां और टड़ियावां आदि क्षेत्रों के किसान परिवार के सदस्यों और मजदूरों के माध्यम से धान की पौध की रोपाई कराने में जुटे हैं। अधिकतर किसान खेतों में पलेवा के बाद कतारबद्ध तरीके से पौध लगाने का काम करा रहे हैं।
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इस साल मौसम में अनिश्चितता साफ देखी जा सकती है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम बरसात हुई है इससे खेती-किसानी के लिए विपरीत स्थितियां बन रही हैं। मौसम और मानसून को देखते हुए कम बरसात की आशंका है। किसानों को नहरों, नलकूप आदि माध्यमों से खेतों में पलेवा कर धान पौध की रोपाई की सलाह दी गई है। वहीं कम पानी से होने वाली फसलों की बुआई के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
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मानसून की पहली बरसात मंगलवार सुबह हुई। बरसात ने निकाय के नाला सफाई के दावों की हकीकत सामने ला दी। निकाय की ओर से खुद के संसाधनों के साथ ही मुख्य नालों की सफाई के लिए 38 लाख रुपये का ठेका उठाया गया था। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सड़क सहित फुटपाथ तक जलभराव हो गया। बरसात से नघेटा रोड सहित शहर के कई मार्ग और फुटपाथ जलमग्न हो गए। इससे पैदल चलने वालों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं सर्कुलर रोड, झबरापुरवा ड्रेन, महोलिया ड्रेन आदि कई नालों में अब भी कूड़ा-करकट जमा है जिससे पानी निकासी प्रभावित हो रही है।
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नाले-नालियों के निकाय के संसाधनों के साथ ही ठेके से भी साफ-सफाई कराई गई और अभी भी कराई जा रही है। सिल्ट के कारण कम बल्कि प्लास्टिक, पॉलीथिन और कूड़ा-करकट आदि डाले जाने से नालियां चोक हो रही हैं। इससे जलभराव की स्थिति बन जाती है। निकाय का प्रयास है कि नाले-नालियों को साफ कराते हुए जलनिकासी सुचारु कराई जाएगी। -रामेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी
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किसानों ने शुरू की धान की पौध रोपाई
हरदोई। जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों ने गति पकड़ ली है। मौसम की अनिश्चितता और समय से पर्याप्त बरसात न होने के कारण किसान केवल मानसून के भरोसे नहीं बैठे हैं। किसानों ने सिंचाई संसाधनों की मदद से खेतों में पलेवा कर धान की पौध रोपाई शुरू कर दी है। खेतों में इन दिनों किसानों की व्यस्तता बढ़ गई है और गांवों में कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं।
मानसून की पहली बरसात से खेती-किसानी पर कोई बड़ा असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। किसान मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं। समय पर बरसात न होने और कम बारिश की स्थिति में फसल प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नलकूप और अन्य सिंचाई संसाधनों के माध्यम से खेतों में पलेवा कर धान की पौध की रोपाई की जा रही है। बरसात से खेतों की मिट्टी की गर्मी नम हुई है। बरसात ऐसी नहीं हुई कि खेतों में पानी भर गया हो, ऐसे में धान की रोपाई के लिए अन्य संसाधनों से ही पानी जुटाकर पलेवा किया जा रहा है। बेनीगंज, कछौना, बेहटागोकुल, कोथावां, हरियावां और टड़ियावां आदि क्षेत्रों के किसान परिवार के सदस्यों और मजदूरों के माध्यम से धान की पौध की रोपाई कराने में जुटे हैं। अधिकतर किसान खेतों में पलेवा के बाद कतारबद्ध तरीके से पौध लगाने का काम करा रहे हैं।
इस साल मौसम में अनिश्चितता साफ देखी जा सकती है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम बरसात हुई है इससे खेती-किसानी के लिए विपरीत स्थितियां बन रही हैं। मौसम और मानसून को देखते हुए कम बरसात की आशंका है। किसानों को नहरों, नलकूप आदि माध्यमों से खेतों में पलेवा कर धान पौध की रोपाई की सलाह दी गई है। वहीं कम पानी से होने वाली फसलों की बुआई के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी

फोटो 16: ममरेजपुर मे धान लगवाते झरोइया निवासी आशुतोष सिंह। संवाद

फोटो 16: ममरेजपुर मे धान लगवाते झरोइया निवासी आशुतोष सिंह। संवाद