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अदृश्य शक्ति करती शिवलिंग का पूजन
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:03 AM IST
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शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मल्लावां। शारदा नहर के किनारे स्थित अति प्राचीन कपिलेश्वर मंदिर भक्तों की आस्था का प्रतीक बना हुआ है। इस शिवलिंग की स्थापना हिरण्य कश्यप के कहने पर कपिलमुनि ने की थी। मान्यता है कि शिवलिंग का पूजन कोई अदृश्य शक्ति करती है। और यहां पर सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है।
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विकास खंड के गांव कटिया भिखारीपुर गांव के निकट स्थित कपिलेश्वर मंदिर के पुजारी सिद्धे बाबा कहते हैं कि इस शिवलिंग की स्थापना कपिलमुनि ने की थी। उन्हीं के नाम से इस मंदिर का नाम कपिलेश्वर मंदिर पड़ा है। हजारों साल पहले जंगल में लोग जानवर चराने जाते थे। एक चरवाहे की गाय का नाम कपिला था। वह गाय जिस दिन कपिलेश्वर मंदिर के स्थान पर जाती थी उसके स्तनों से दूध गायब हो जाता था। अक्सर दूध गायब होने पर लोगों ने गाय का पीछा किया तो देखा के कपिलेश्वर मंदिर के स्थान पर गाय के चारों स्तनों से दूध गिर रहा था। लोगों ने इस जगह को साफ करके देखा तो शिवलिंग था, गांव के अंदर स्थापित करने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने शिवलिंग को खोदने का प्रयास किया। लेकिन जब खोदने में नाकाम हो गए, तो मंदिर का निर्माण कराया और लोग पूजन अर्चन करने लगे।
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पुजारी ने बताया कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा अदृश्य शक्ति करती है। इसी चमत्कार की वजह से लोगों में आस्था जुड़ी है। मंदिर के जर्जर होने पर गंज जलालाबाद निवासी डंडी स्वामी बसंत लाल मिश्रा ने सन् 1977 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
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इस मंदिर में क्षेत्र में अलावा बाहरी जिलों से भी लोग दर्शन करने आते हैं और सावन के सोमवार को मेला लगता है। मंदिर परिसर से सटी बड़ी झील में कलकल करता जल मंदिर को और भी खूबसूरती प्रदान करता है।
भक्तों के लिए मुसीबत बना एक किलोमीटर जर्जर मार्ग
मल्लावां। गंज जलालाबाद निवासी अखिलेश कटियार, परमी निवासी अमरीश शुक्ला, राजेंद्र ने बताया की क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से मंदिर को भव्यता प्रदान की जा रही है। गंज सराय सुलतान मुख्य मार्ग से मंदिर की दूरी करीब एक किमी है उस पर डामरीकरण न होने से बरसात में भक्तों को मंदिर में पहुंचने के लिए मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं।