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शंभू शंकर नम: शिवाय, गिरिजा शंकर नम: शिवाय
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Tue, 04 Aug 2015 12:27 AM IST
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सावन माह के पहले सोमवार को समां में घुला हुआ भक्ति
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भाव और कानों में सिर्फ और सिर्फ बम-बम भोले के जयकारे सुनाई दिए। कुल
मिलाकर पहले सोमवार को भगवान शिव को प्रसन्न करने को उनका विधिवत पूजन पाठ
हुआ। घरों से लेकर मंदिरों तक में भोले भंडारी के ही जयकारे सुनाई दिए।
कहना गलत न होगा कि सोमवार को सुबह से लेकर शाम तक मंदिर भक्तों से पटे रहे। जहां से दिन भर बम-बम भोले के जयकारे सुनाई देते रहे। बाबा विश्वनाथ मंदिर, तुरंतनाथ मंदिर, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, बाबा नील कंठेश्वर महादेव, शिव भोले मंदिर, सकाहा मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, मंशानाथ मंदिर, मौनी बाबा मंदिर में भक्तों द्वारा दिन भर पूजन का आयोजन होता रहा।
भक्तों ने भगवान शिव के शिवलिंग पर बेल पत्र, धतूरा, भांग, दूध, गंगा जल आदि चढ़ाकर उनका विधिवत पूजन अर्चन किया। शहर के कई मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं द्वारा भक्तों को प्रसाद का वितरण भी किया गया। उधर, सावन माह में भगवान शिव की पूजा व आराधना विधि-विधान से करने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है।
पर, मान्यता यह भी है कि भोले बाबा की पूजा अलग-अलग विधियों और तौर तरीकों एवं शास्त्रों में बताई गई विधियों से करने पर विशिष्ट लाभ प्राप्त होते हैं। जैसे फूलों के अलग-अलग रंगों से सावन भर भगवान शिव की आराधना करने से भक्त को इसका अलग-अलग लाभ प्राप्त होना भी बताया गया है।
जानकारों का कहना है कि लाल या सफेद फूलों को पूरे सावन भर भोले बाबा पर अर्पित करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति भी होना बताया गया है। भगवान शिव की आराधना की विधियों को भली भांति जानने वालों का कहना है कि समय बदलने के साथ लोगों के पहनावे बदल जाते हैं।
खानपान में भी बदलाव आता है, पर पूजा पाठ एक ऐसी चीज होती है जिसकी विधियां तो बहुत होती है, पर उनको जानने वाले कम होते हैं। यही नहीं इन अलग-अलग विधियों के अलग-अलग विशिष्ट लाभ भी होते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि सावन मास में भगवान शिव का पूजन अर्चन भक्त को किसी तरह से भी निराश नहीं करते।
उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं, पर इसके साथ ही यदि विशिष्ट तरह से पूजन किया जाए तो इसके फायदे भी भक्त को अलग-अलग प्राप्त होते हैं। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि अलग-अलग रंगों के बाबत फूलों के विषय में शास्त्रों में ही बताया गया कि भगवान शिव को यदि सावन मास में लाल या सफेद फूलों को अर्पित किया जाता रहे तो मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इसी तरह चमेली के फूलों से विधिवत पूजन करने से सुख की प्राप्ति होती है। अलसी के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर हर मनोकामना को पूरा किया जा सकता है। बेला के फूलों से पूजन के बाबत बताया जाता है कि श्रद्धालु को पत्नी सर्वगुण संपन्न प्राप्त होगी।
जूही के फूलों का पूजन अन्न की कभी कमी नहीं आने देगा। कनेर के फूलों से भोले बाबा का विधिवत पूजन करने से नवीन वस्त्रों की प्राप्ति समय-समय पर होती रहती है। हर सिंगार के फूलों से सुख समृद्धि आती रहती है। धतूरे को विधिवत चढ़ाने पुत्र की प्राप्ति होती है।
कहना गलत न होगा कि सोमवार को सुबह से लेकर शाम तक मंदिर भक्तों से पटे रहे। जहां से दिन भर बम-बम भोले के जयकारे सुनाई देते रहे। बाबा विश्वनाथ मंदिर, तुरंतनाथ मंदिर, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, बाबा नील कंठेश्वर महादेव, शिव भोले मंदिर, सकाहा मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, मंशानाथ मंदिर, मौनी बाबा मंदिर में भक्तों द्वारा दिन भर पूजन का आयोजन होता रहा।
भक्तों ने भगवान शिव के शिवलिंग पर बेल पत्र, धतूरा, भांग, दूध, गंगा जल आदि चढ़ाकर उनका विधिवत पूजन अर्चन किया। शहर के कई मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं द्वारा भक्तों को प्रसाद का वितरण भी किया गया। उधर, सावन माह में भगवान शिव की पूजा व आराधना विधि-विधान से करने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है।
पर, मान्यता यह भी है कि भोले बाबा की पूजा अलग-अलग विधियों और तौर तरीकों एवं शास्त्रों में बताई गई विधियों से करने पर विशिष्ट लाभ प्राप्त होते हैं। जैसे फूलों के अलग-अलग रंगों से सावन भर भगवान शिव की आराधना करने से भक्त को इसका अलग-अलग लाभ प्राप्त होना भी बताया गया है।
जानकारों का कहना है कि लाल या सफेद फूलों को पूरे सावन भर भोले बाबा पर अर्पित करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति भी होना बताया गया है। भगवान शिव की आराधना की विधियों को भली भांति जानने वालों का कहना है कि समय बदलने के साथ लोगों के पहनावे बदल जाते हैं।
खानपान में भी बदलाव आता है, पर पूजा पाठ एक ऐसी चीज होती है जिसकी विधियां तो बहुत होती है, पर उनको जानने वाले कम होते हैं। यही नहीं इन अलग-अलग विधियों के अलग-अलग विशिष्ट लाभ भी होते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि सावन मास में भगवान शिव का पूजन अर्चन भक्त को किसी तरह से भी निराश नहीं करते।
उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं, पर इसके साथ ही यदि विशिष्ट तरह से पूजन किया जाए तो इसके फायदे भी भक्त को अलग-अलग प्राप्त होते हैं। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि अलग-अलग रंगों के बाबत फूलों के विषय में शास्त्रों में ही बताया गया कि भगवान शिव को यदि सावन मास में लाल या सफेद फूलों को अर्पित किया जाता रहे तो मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इसी तरह चमेली के फूलों से विधिवत पूजन करने से सुख की प्राप्ति होती है। अलसी के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर हर मनोकामना को पूरा किया जा सकता है। बेला के फूलों से पूजन के बाबत बताया जाता है कि श्रद्धालु को पत्नी सर्वगुण संपन्न प्राप्त होगी।
जूही के फूलों का पूजन अन्न की कभी कमी नहीं आने देगा। कनेर के फूलों से भोले बाबा का विधिवत पूजन करने से नवीन वस्त्रों की प्राप्ति समय-समय पर होती रहती है। हर सिंगार के फूलों से सुख समृद्धि आती रहती है। धतूरे को विधिवत चढ़ाने पुत्र की प्राप्ति होती है।