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शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं लोग
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
Updated Fri, 30 Sep 2016 12:44 AM IST
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- फोटो : demo
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छिबरामऊ। तेंदुए के हमले से सात जानवरों की मौत से बिलग्राम तहसील क्षेत्र के कटियारी गांवों में दहशत है। ज्यादातर महिलाओं ने जंगल जाना छोड़ दिया है, लोग बच्चों को खुद स्कूल छोड़ने और लेने जा रहे हैं। पालतू जानवरों को घरों के अंदर बांधने लगे हैं।
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तहसील के गांव परसोला में जंगली जानवर एक भैंस, एक गाय, चार बकरे मार चुका है। पड़ोसी गांव देवीपुरवा में भी एक भैंस को पंजा मारकर घायल कर दिया था। ग्रामीण जानवर को तेंदुआ बता रहे हैं। वन विभाग, ग्रामीणों की बात नहीं मान रहा है। कटरी के कई गांवों में तेंदुए के पंजे जैसे निशान भी मिल चुके हैं। जंगली जानवर के हमले से मवेशियों की लगातार हो रही मौतों से कटियारी के लोगों में दहशत बढ़ती ही जा रही है।
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कटियारी के गांव तेरवाकुल्ली, इसरापुर, परसोला, शाहपुर, हरैया, जफरपुर, महसोनामऊ, सांपखेड़ा, पन्योड़ा, मड़िया, छिबरामऊ, मोहनपुरवा, सोनारीपुरवा, चौधीपुरवा, जरसेनामऊ आदि गांवों में लोग बच्चों को जंगल नहीं जाने दे रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को घर के बड़े लोग खुद छोड़ने जा रहे हैं। महिलाएं भी जंगल जाने में डर रही हैं। परसोला गांव के बड़े भइया, अक्षय सिंह, टिल्लू, पवन, पंकज, शिवनाथ, राजेश, मुकेश, कपिल, गौरव आदि ने बताया कि गांव में दहशत व्याप्त है। शाम ढलने के बाद गांव से बाहर जाने में डर लगता है। बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने जाते हैं। बच्चों को अकेले खेलने के लिए भी नहीं जाने दिया जा रहा है।
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छिबरामऊ के रामआसरे वर्मा, पपलू सिंह, शारदा बाबा, कल्लू ,महेंद्र प्रताप सिंह, राहुल, मनमोहन, पवन तिवारी, राजेंद्र पाठक, केशनपाल सिंह आदि ने बताया कि डर के कारण रात को फसलों की रखवाली करने भी नहीं जा रहे हैं। इससे आवारा जानवर फसलें बर्बाद कर रहे हैं। दहशत का आलम ये है कि छिबरामऊ चौराहे की दुकानें भी जल्दी बंद होने लगी हैं।
जफरपुर और महसोनामऊ के मंडरीक सिंह, गंगा सिंह, आदित्य त्रिपाठी, शिवाकांत, नीलू सिंह, ज्ञानू सिंह, रावेंद्र, अवधेश, बीपी सिंह, राजेश आदि ने बताया कि पालतू जानवरों को घरों के अंदर बांध रहे हैं। हर तरफ केवल तेंदुए की ही चर्चा हो रही है।
मल्लावां के गांवों में भी दहशत
क्षेत्र के गांव तेरवाकुल्ली के मजरा देवीपुरवा निवासी हरिनाम की भैंस पर भी जंगली जानवर ने हमला कर दिया था। इसके बाद से आसपास के गांवों में तेंदुए की दहशत है। गांव के पूर्व प्रधान देवीशंकर का दावा है कि महिलाओं ने चित्तीदार जंगली जानवर को भागते देखा था। तेरवाकुल्ली निवासी शिवम ने बताया कि पूरे क्षेत्र में दहशत है। बाबटमऊ के दुर्गेश कुमार ने बताया कि डर के चलते लोग शाम से ही घरों में दुबक जाते हैं।
वन विभाग की टीम ने की जंगल में कांबिंग
बिलग्राम क्षेत्र के रेंजर एके सचान ने बताया कि गुरुवार को उन्होंने पूरी टीम के साथ परसौला कटियारी के कई गांवों में कांबिंग की। साथ में कई गांवों के लोग अपने अपने लाइसेंसी हथियारों के साथ उनके साथ थे। फिलहाल कहीं कोई जानवर नहीं दिखा है। रेंजर का कहना था कि गाय और बकरों पर हमला किसी जंगली जानवर ने ही किया है। उन्होंने कहा कि लकड़बग्गा मरे जानवरों को खाता है, भेड़िया इस तरह हमला नहीं करता। तो फिर क्या तेंदुआ ही है, इस पर उनका कहना था कि जब तक तेंदुआ दिख नहीं जाता कैसे कह सकते हैं। उधर, मल्लावां के वनकर्मी हरिनाम सिंह कहते हैं कि क्षेत्र में कांबिंग की जा रही है।