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Hardoi News: 1500 की जगह 25 से 30 हजार रुपये का बिल देख बढ़ी धुकधुकी

Tue, 11 Mar 2025 12:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Tue, 11 Mar 2025 12:18 AM IST
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Seeing a bill of 25 to 30 thousand rupees instead of 1500 increased the panic
- बदले गए बिजली के स्मार्ट मीटरों की अभी तक नहीं हुई फीडिंग
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- रीडिंग लिए बगैर आ रहे मनमाने बिल, अधिकारी भी नहीं सुनते
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। बिजली विभाग की मनमानी ने उपभोक्ता परेशान हैं। विभाग ने शहर में स्मार्ट मीटर लगाने शुरू कराए हैं। कार्यदायी संस्था को कार्य सौंप कर विभाग के जिम्मेदारों ने इतिश्री कर ली, अब उपभोक्ताओं के बिना रीडिंग मनमाने बिल भेजे जा रहे हैं।
माह का बिल 25 से 30 हजार रुपये के बीच देख उपभोक्ताओं की धुकधुकी बढ़ी हुई है। वहीं विभाग ने इसका समाधान करने के लिए कोई व्यवस्था भी नहीं कर रखी है।
जिले में विद्युत उपभोक्ताओं के लगे मीटरों को बदलकर अब स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। विभाग ने स्मार्ट मीटरों को लगाने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था जीएसएम प्राइवेट लिमिटेड को दी है। कार्यदायी संस्था के कर्मचारी स्मार्ट मीटर तो बदल रहे हैं लेकिन मीटरों को बदलने के बाद से न तो विभाग में फीडिंग कराई जा रही है और न ही सीलिंग रिपोर्ट जमा की गई।
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नतीजा यह है कि अब उपभोक्ताओं को बिना रीडिंग के मनमाने ढंग से बिल भेजे जा रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं का माह में बिल 1500 से 2000 के बीच आता था, वहीं बिल अब 25 से 30 हजार रुपये का दिया जा रहा है। अस्पताल रोड पर कई दुकानदारों को मनमाने ढंग से हजारों रुपये में बिल भेज दिए गए।
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गलत बिल आ गए तो उपभोक्ता संशोधन के लिए कार्यालय पहुंच रहे हैं तो वहां भी सटीक जानकारी देने वाला कोई नहीं है। उपभोक्ता बिल संशोधन कराने उपखंड कार्यालय पहुंचता है तो वहां मीटर कार्यालय भेजा जाता है। वहां भी कोई सही जानकारी नहीं मिल रही है। उपखंड अधिकारी कुलदीप शिवहरे ने बताया कि कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों से बात कर समस्या का समाधान किया जाएगा।

इनसेट
मीटर विभाग में दिए गए नंबरोंं से नहीं होता संपर्क
मीटर विभाग में स्मार्ट मीटरों की फीडिंग करने के संबंध में कुछ कर्मचारियों के नंबर दिए गए हैं लेकिन इन नंबरों पर बात ही नहीं होती है। उपभोक्ता फोन मिलाते हैं तो कॉल ही नहीं उठती है। इस कारण से कोई सही जानकारी हीं नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं अधिकारी भी अपना सीयूजी नंबर नहीं उठाते हैं। उपभोक्ता बिजली का बिल संशोधित कराने के लिए परेशान घूम रहे हैं और विभागीय जिम्मेदार मनमानी कर रहे हैं।
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