{"_id":"eba86b923bbc18675660e611103ee3a3","slug":"scientific-approach-needed-in-children-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बच्चों में जरूरत’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बच्चों में जरूरत’
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Tue, 08 Sep 2015 11:55 PM IST
विज्ञापन
महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में
विज्ञापन
मंगलवार को 23वां राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेेस टीचर प्रशिक्षण
कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें डा. रामकुमार मिश्रा ने कहा कि बाल्यकाल से
ही बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होना चाहिए, तभी देश व समाज
की वास्तविक उन्नति नहीं हो सकती है।
बाल विज्ञान की जिला समन्वयक मीना श्रीवास्तव ने कहा कि 10 से 17 वर्ष के बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित करने का एक ऐसा तरीका है, जिससे बच्चे वैज्ञानिक विधि को समझते हैं और उनकी प्रक्रियाओं द्वारा परिणाम तक पहुंचते है। बताया कि विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन हुआ और प्रोेजेक्ट बनाने की भी जानकारी दी गई।
डा. शरद कुमार ने कहा कि मौसम एवं जलवायु का किसी भी स्थान से अधिक सामाजिक एवं सांस्कृ तिक प्रभाव पड़ता है। डा. अमित कुमार ने मौसम जलवायु व पेड़ पौधोें की जानकारी दी। डा. राजेश सोनकर ने मौसम जलवायु के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर डा. मीशू सिंह, डा. पवन चौहान, डा. तारकेश्वर, डा. अभिषेक, डा. उदय प्रकाश आदि मौजूद थे।
बाल विज्ञान की जिला समन्वयक मीना श्रीवास्तव ने कहा कि 10 से 17 वर्ष के बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित करने का एक ऐसा तरीका है, जिससे बच्चे वैज्ञानिक विधि को समझते हैं और उनकी प्रक्रियाओं द्वारा परिणाम तक पहुंचते है। बताया कि विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन हुआ और प्रोेजेक्ट बनाने की भी जानकारी दी गई।
डा. शरद कुमार ने कहा कि मौसम एवं जलवायु का किसी भी स्थान से अधिक सामाजिक एवं सांस्कृ तिक प्रभाव पड़ता है। डा. अमित कुमार ने मौसम जलवायु व पेड़ पौधोें की जानकारी दी। डा. राजेश सोनकर ने मौसम जलवायु के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर डा. मीशू सिंह, डा. पवन चौहान, डा. तारकेश्वर, डा. अभिषेक, डा. उदय प्रकाश आदि मौजूद थे।