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Hardoi News: बेहतर सफाई के लिए 72 करोड़ रुपये से बने आरआरसी खुद हो गए कूड़ा, ताले खुलने तक के लाले

Tue, 19 Aug 2025 11:29 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Aug 2025 11:29 PM IST
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RRCs built with Rs 72 crore for better cleanliness have themselves become garbage dumps, there is difficulty in opening the locks
हरदोई। बीते दिनों एक शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी अनुनय झा ने हरियावां विकास खंड के मरई में बने आरआरसी की जांच कराई। जांच के लिए पहुंचे मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके सिंह को यहां मुर्गीपालन होता मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने ग्राम पंचायत का संचालन करने वाली तीन सदस्यीय समिति और सचिव से जवाब तलब कर लिया।
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जनपद में आरआरसी के निर्माण पर अब तक लगभग 72 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह बजट स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत खर्च किया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद संवाद न्यूज एजेंसी ने अलग-अलग ग्राम पंचायतों में बने आरआरसी की पड़ताल की। इस दौरान एक भी आरआरसी का संचालन होते नहीं मिला। हर आरआरसी के निर्माण पर अलग-अलग बजट खर्च किया गया। पेश है एक रिपोर्ट -
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केस-1
भरावन विकास खंड की अतरौली ग्राम पंचायत में साढ़े सात लाख रुपये की लागत से आरआरसी का निर्माण हुआ था। यह कार्य वर्ष 2022-23 में कराया गया था। निर्माण कार्य तो पूरा है लेकिन काम पूरा होने के बाद भी अब तक एक बार भी इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। यहां ताला पड़ा रहता है। मुख्य द्वार पर भी झाड़ियां उग आई हैं। क्योंकि इसका ताला ही कभी नहीं खुलता। यहां का टिनशेड भी क्षतिग्रस्त हो चुका है।
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केस-2
कोथावां विकास खंड के गिरधरपुर में भी आरआरसी का निर्माण हुआ है। निर्माण पूरा होने का दावा करने के साथ ही इसके संचालित होने का दावा भी विभागीय अधिकारी करते हैं। मौके पर आरआरसी में ताला लटका हुआ था। परिसर के अंदर बड़ी-बड़ी घास उगी हुई हैं। अधिकारियों ने दावा जरूर कर दिया लेकिन शायद मौके पर जाकर कभी हाल देखा ही नहीं। यहां हर घर से कूड़ा एकत्र कर आर आरसी पहुंचाने के लिए ई-रिक्शा भी खरीदा गया था। प्रधान पुत्र राहुल मौर्य कहते हैं कि कोई कर्मचारी ही इनका संचालन करने के लिए तैनात नहीं है।

केस-3
कोथावां विकास खंड के नगवा गांव में 7.49 लाख रुपये खर्च कर आरआरसी का निर्माण कराया गया था। वर्ष 2023-24 में इसका निर्माण पूरा हो गया था। हर घर से कूड़ा एकत्र करने के लिए एक ई-रिक्शा भी खरीदा गया था। यहां भी आरआरसी का इस्तेमाल अब तक एक बार भी नहीं हुआ। परिसर में बने शौचालय में पल्ले नहीं हैं। शौचालय की दशा खराब हो चुकी है। ग्राम प्रधान जंग बहादुर बताते हैं कि इसका संचालन करने के लिए कोई कर्मचारी ही नहीं है।

केस-4
भरावन विकास खंड के ही माझगांव में भी साढ़े सात लाख रुपये खर्च कर आरआरसी का निर्माण कराया गया था। वर्ष 2023-24 में यह निर्माण हुआ था। निर्माण होने के बाद से अन्य जगहों की तरह यहां भी इसका कोई इस्तेमाल नहीं हुआ। हाल यह है कि इसका ताला ही कभी नहीं खोला गया। ताले में भी जंग लग गई।


72 करोड़ से बनवाए गए 960 आरआरसी
गांवों में सार्वजनिक स्थानों और घरों से निकलने वाले कूड़ा के निस्तारण के लिए सभी ग्राम पंचायतों में आरआरसी बनवाए जाने हैं। जिले में 1,293 में से 960 ग्राम पंचायतों में आरआरसी बनवा लिए गए हैं। औसतन एक आरआरसी पर करीब 7,50,000 रुपये की लागत आई है। उस हिसाब से 960 आरआरसी बनवाए जाने पर 72 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं जबकि अन्य ग्राम पंचायतों में आरआरसी बनवाए जा रहे हैं।





इसलिए बनवाए गए थे आरआरसी
गांवों में आरआरसी की स्थापना का उद्देश्य निकायों की भांति गांवों में भी कूड़ा का निस्तारण कराया जाना है। आरआरसी पर गांवों के घरों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कूड़ा का एकत्रीकरण, उसकी छटनी किया जाना। प्लास्टिक, लोहा और पॉलीथिन आदि को निकालने के बाद बचे कूड़ा से खाद तैयार कराया जाना है।
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