{"_id":"6519af19cfd95253d8043386","slug":"picking-up-shovels-and-pails-to-support-the-family-at-the-fourth-stage-of-age-hardoi-news-c-213-1-hra1001-4467-2023-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: परिवार के पालन-पोषण के लिए उम्र के चौथे पड़ाव पर उठा रहे फावड़ा-डलिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: परिवार के पालन-पोषण के लिए उम्र के चौथे पड़ाव पर उठा रहे फावड़ा-डलिया
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। रविवार को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस भी निपट गया। वैसे तो बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिए कई योजनाएं दी गईं और पात्रता की श्रेणी में आने पर लाभांवित भी हो रहे हैं, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में उम्र के चौथे पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी परिवार के पालन-पोषण के लिए अन्य कामों के साथ ही फावड़ा-डलिया तक उठा रहे हैं। अकेले मनरेगा में ही देखा जाए तो, अब तक 10 हजार से अधिक बुजुर्ग कार्यस्थल पर काम कर चुके हैं।
सरकार ने भी इंसान से काम लेने की आयु 60-62 वर्ष ही तय की है लेकिन यह सरकारी नौकरी तक ही सीमित है। मेहनत-मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करने वाले इंसान के सामने उम्र मायने नहीं रखती है। परिवार की जिम्मेदारियों के आगे न तो उन्हें अपनी उम्र की चिंता रहती है और न ही काम करने में कोई शर्म-लिहाज आता है।
रोजगार की गारंटी देने के लिए चल रही मनरेगा में भी 60 वर्ष इससे अधिक आयु वर्ग के श्रमिक कार्यस्थल पर डलिया-फावड़ा तक उठा रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा में ही अकेले 10,430 बुजुर्गों ने काम किया है।
विज्ञापन
-- -- -- -- --
इंसेट
बच्चों पर बोझ बन रहे माता-पिता
वैसे तो कहा जाता है कि घर में बुजुर्ग का होना जरूरी है। आधुनिकता और परिवारों के बिखराव में बुजुर्ग अपनी ही संतानों को बोझ लगने लगे हैं। यह तथ्य तहसीलों में सुलह अधिकारियों की रिपोर्ट में सामने आए हैं। उम्र के चौथेपन पर पहुंचने वाले माता-पिता को संतान से सेवा और देखभाल की जरूरत होती है पर, मजिस्ट्रेटों के पास आने वाले प्रकरणों में बुजुर्ग अपनी ही संतान पर बोझ लगते दिख रहे हैं। शहर से सटे महोलिया शिवपार व झबरापुरवा के दो मामले तो अभी एक सप्ताह पहले ही सदर एसडीएम के पास आए थे। सदर एसडीएम स्वाति शुक्ला ने बताया कि एक वृद्धा के तीन पुत्र-बहू और एक मामले में इकलौता पुत्र देखभाल से मुकर रहा था।
-- -- -- -- -- -- -- -
1.30 लाख बुजुर्गों को मिल रही पेंशन : सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत समाज कल्याण विभाग की ओर से 60 व इससे अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गाें को भरण-पोषण के लिए एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के तौर पर दी जा रही है। जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि 1.30 लाख बुजुर्ग पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। नवीन आवेदन भी प्राप्त हो रहे हैं।
विज्ञापन
हरदोई। रविवार को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस भी निपट गया। वैसे तो बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिए कई योजनाएं दी गईं और पात्रता की श्रेणी में आने पर लाभांवित भी हो रहे हैं, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में उम्र के चौथे पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी परिवार के पालन-पोषण के लिए अन्य कामों के साथ ही फावड़ा-डलिया तक उठा रहे हैं। अकेले मनरेगा में ही देखा जाए तो, अब तक 10 हजार से अधिक बुजुर्ग कार्यस्थल पर काम कर चुके हैं।
सरकार ने भी इंसान से काम लेने की आयु 60-62 वर्ष ही तय की है लेकिन यह सरकारी नौकरी तक ही सीमित है। मेहनत-मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करने वाले इंसान के सामने उम्र मायने नहीं रखती है। परिवार की जिम्मेदारियों के आगे न तो उन्हें अपनी उम्र की चिंता रहती है और न ही काम करने में कोई शर्म-लिहाज आता है।
विज्ञापन
रोजगार की गारंटी देने के लिए चल रही मनरेगा में भी 60 वर्ष इससे अधिक आयु वर्ग के श्रमिक कार्यस्थल पर डलिया-फावड़ा तक उठा रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा में ही अकेले 10,430 बुजुर्गों ने काम किया है।
विज्ञापन
इंसेट
बच्चों पर बोझ बन रहे माता-पिता
वैसे तो कहा जाता है कि घर में बुजुर्ग का होना जरूरी है। आधुनिकता और परिवारों के बिखराव में बुजुर्ग अपनी ही संतानों को बोझ लगने लगे हैं। यह तथ्य तहसीलों में सुलह अधिकारियों की रिपोर्ट में सामने आए हैं। उम्र के चौथेपन पर पहुंचने वाले माता-पिता को संतान से सेवा और देखभाल की जरूरत होती है पर, मजिस्ट्रेटों के पास आने वाले प्रकरणों में बुजुर्ग अपनी ही संतान पर बोझ लगते दिख रहे हैं। शहर से सटे महोलिया शिवपार व झबरापुरवा के दो मामले तो अभी एक सप्ताह पहले ही सदर एसडीएम के पास आए थे। सदर एसडीएम स्वाति शुक्ला ने बताया कि एक वृद्धा के तीन पुत्र-बहू और एक मामले में इकलौता पुत्र देखभाल से मुकर रहा था।
1.30 लाख बुजुर्गों को मिल रही पेंशन : सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत समाज कल्याण विभाग की ओर से 60 व इससे अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गाें को भरण-पोषण के लिए एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के तौर पर दी जा रही है। जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि 1.30 लाख बुजुर्ग पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। नवीन आवेदन भी प्राप्त हो रहे हैं।