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कलाकारों का मंचन देख प्रभावित हुए लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 25 Jan 2015 12:25 AM IST
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नुमाइश मैदान में आयोजित हो रही श्रीरामलीला में
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शनिवार को मनु सतरूपा तप का मंचन किया गया। गोविंद गोपाल लीला संस्थान
वृंदावन के निर्देशक कन्हैयालाल दत्तात्रेय के संयोजन में कलाकारों द्वारा
भावपूर्ण लीला का मंचन किया गया। जिसे देख लोग काफी प्रभावित हुए।
ऐतिहासिक नुमाइश मैदान पर आयोजित रामलीला में मंचन करते हुए कलाकारों ने दिखाया कि महाराजा मनु और सतरूपा राज्य करने के बाद प्रभु के प्रेम में वन में तपस्या करने जाते हैं। कलाकारों ने भगवान को पाने को तपस्या पर बैठे मनु और सतरूपा के चरित्र को बड़े ही वास्तविक ढंग से प्रदर्शित किया।
दीर्घकाल तक तपस्या करने के बाद मनु और सतरूपा को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देव दर्शन देते हैं और मनु और सतरूपा से वरदान मांगने की इच्छा करते हैं, पर मनु और सतरूपा वरदान नहीं लेते हैं और मोछ की इच्छा करते हैं। देवताओं के कहने पर मनु और सतरूपा वरदान लेने के तैयार होते हैं, पर वह भगवान विष्णु से कहते हैं कि यदि उन्हें वरदान दिया जाए तो उनके घर में स्वयं भगवान विष्णु पुत्र के रूप में जन्म लें।
इस पर भगवान एवमस्तु कहकर अर्न्तध्यान हो जाते हैं और इस तरह से अगले जन्म में मनु तथा सतरूपा राजा दशरथ एवं रानी कौशल्या होकर भगवान को पुत्र के रूप में प्राप्त करते है। इस मौके पर मुख्य आयोजक राम प्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र आदि मौजूद थे।
ऐतिहासिक नुमाइश मैदान पर आयोजित रामलीला में मंचन करते हुए कलाकारों ने दिखाया कि महाराजा मनु और सतरूपा राज्य करने के बाद प्रभु के प्रेम में वन में तपस्या करने जाते हैं। कलाकारों ने भगवान को पाने को तपस्या पर बैठे मनु और सतरूपा के चरित्र को बड़े ही वास्तविक ढंग से प्रदर्शित किया।
दीर्घकाल तक तपस्या करने के बाद मनु और सतरूपा को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देव दर्शन देते हैं और मनु और सतरूपा से वरदान मांगने की इच्छा करते हैं, पर मनु और सतरूपा वरदान नहीं लेते हैं और मोछ की इच्छा करते हैं। देवताओं के कहने पर मनु और सतरूपा वरदान लेने के तैयार होते हैं, पर वह भगवान विष्णु से कहते हैं कि यदि उन्हें वरदान दिया जाए तो उनके घर में स्वयं भगवान विष्णु पुत्र के रूप में जन्म लें।
इस पर भगवान एवमस्तु कहकर अर्न्तध्यान हो जाते हैं और इस तरह से अगले जन्म में मनु तथा सतरूपा राजा दशरथ एवं रानी कौशल्या होकर भगवान को पुत्र के रूप में प्राप्त करते है। इस मौके पर मुख्य आयोजक राम प्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र आदि मौजूद थे।