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Hardoi News: जानबूझकर नहीं किया गया था पेंशन और वेतन की फाइलों का निस्तारण, घर में रखवा लेते थे फाइलें

Sun, 21 Jun 2026 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:09 PM IST
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Pension and salary files were not processed deliberately; files used to be kept at home.
फोटो-32-बीएसए कार्यालय में शनिवार को फाइलें खंगालते नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार व मौजूद कर्मचारी।
हरदोई। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़ी जांच पूरी कर ली है। शनिवार आधीरात के बाद टीम ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। डीएम अनुनय झा ने यही रिपोर्ट शासन भेजी है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को निलंबित कर विभागीय जांच कराने की संस्तुति शासन से की गई है। बीएसए कार्यालय में पेंशन, वेतन, भत्ते आदि से जुड़ी पत्रावलियां लंबे समय से जानबूझकर लंबित रखे जाने की पुष्टि हुई है। जरूरी फाइलों को घर पर रखने और लिपिकों से फाइल लेने के बाद वापस न करने की बात भी सामने आई है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को लेकर मिल रही शिकायतों का संज्ञान डीएम अनुनय झा ने लिया था। शुक्रवार सुबह नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रमेंद्र सिंह की कमेटी बनाकर जांच के लिए बीएसए ऑफिस भेजा था। यहां शनिवार को एक कक्ष का ताला तोड़कर अभिलेख खंगालने के बाद देर शाम तक जांच चली थी। जांच के दौरान न्यायालय के आदेश पर मार्च में हुई 61 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ी मूल पत्रावली न मिलने से वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्रा, कनिष्ठ सहायक प्रवीण मिश्रा और प्रधान सहायक शिव निवास मिश्रा से जांच टीम ने पूछताछ की।
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इस दौरान तीनों ने एक-दूसरे पर बात टाली लेकिन अंततः निष्कर्ष यह निकला कि मूल पत्रावली बीएसए के पास है और बीएसए ही इसके बारे में जानकारी दे सकते हैं। अनुपम मिश्रा ने पत्रावली अपने पास होने से स्पष्ट इन्कार किया तो प्रवीण और शिव निवास ने भी कुछ इसी तरह के बयान दिए। जांच रिपोर्ट में पत्रावलियों को जानबूझकर लंबित रखने, नियम के विपरीत पत्रावलियां अपने पास आवास पर रखने समेत कई बिंदुओं पर बीएसए को दोषी ठहराया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि टीम ने जांच रिपोर्ट दे दी है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट पर कार्रवाई को लेकर निर्णय शासन स्तर से होगा।
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कैश से भरा बैग दिया था प्रधान अध्यापक को, कर दिया था वापस
जांच टीम ने टड़ियावां विकास खंड के एक प्रधानाध्यापक से भी पूछताछ की। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि प्रधानाध्यापक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मधुर संबंध होने की बात स्वीकारी है। यह भी बताया कि व्यक्तिगत कार्य या परेशानी होने पर बीएसए उन्हें बुला लेते थे। 18 जून को भी ऑफिस से अस्पताल जाते समय बीएसए ने बुलाया था। दावा है कि इस दौरान काले रंग का एक छोटा बैग बीएसए ने प्रधानाध्यापक को दिया था। इसमें कुछ जरूरी अभिलेख और कैश होने की जानकारी बीएसए ने दी थी। कैश होने का पता चलने पर प्रधानाध्यापक ने बैग लेने से इन्कार कर दिया था।



वेतन वृद्धि से लेकर पेंशन तक की 46 पत्रावलियां मिलीं लंबित
जिलाधिकारी से लेकर शासन तक के निर्देश हैं कि कर्मचारियों के देयकों से संबंधित कोई भी पत्रावली अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। इन निर्देशों की भी धज्जियां बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने उड़ा दीं। जांच टीम ने जब अभिलेख खंगाले तो पता चला कि वेतन वृद्धि की 29, पारिवारिक पेंशन की 13 और पेंशन संबंधी 14 पत्रावलियां कई माह से लंबित हैं। इनमें से 10 पत्रावलियों का निस्तारण जून में कर दिया गया लेकिन 46 मामलों का निस्तारण नहीं किया गया। इनमें से ज्यादातर पत्रावलियों का परीक्षण करने के लिए भी वित्त एवं लेखाधिकारी ने बीएसए को भेजी थीं लेकिन यह सब अटकी रहीं। इस मामले में जांच टीम ने तत्कालीन लिपिक मनोज मिश्रा और मौजूदा कनिष्ठ लिपिक सज्जाद हुसैन के बयान भी दर्ज किए हैं।




सेवानिवृत्त खंड शिक्षा अधिकारी तक की पत्रावली एक साल से लंबित
सेवानिवृत्त खंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी की देयकों और पेंशन से संबंधित पत्रावली जांच टीम को बीएसए की मेज पर रखी मिली। जांच में पता चला कि आरपी त्रिपाठी 30 नवंबर 2020 को सेवानिवृत्त हुए थे। बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने 28 मार्च 2025 को जारी आदेशों में आरपी त्रिपाठी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने का निर्णय लिए जाने की जानकारी भेजी थी। इस पत्रावली पर बाकी पूरी प्रक्रिया हो चुकी थी लेकिन बीएसए के पास हस्ताक्षर के लिए लंबित थी। इस मामले को भी बेहद गंभीर माना गया है।



डीएम के निरीक्षण से पहले बीएसए के घर पर भेज दी गई थीं फाइलें, अब तक नहीं आईं

जांच टीम ने बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालय पटल प्रभारी प्रवीण कुमार मिश्रा से भी पूछताछ की। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि बीएसए डॉ. अजित सिंह के कार्यकाल में कुछ महत्वपूर्ण पत्रावलियां खासी चर्चित रहीं। इनमें प्रधानाध्यापक सूरजपाल, सहायक अध्यापक रोशन जहां और शमीम जहां के निलंबन व बहाली से जुड़ी पत्रावली चर्चित हैं। यह पत्रावली और अभिलेख बीएसए ने प्रवीण मिश्रा से लिए थे। यह भी पता चला कि मई में जब डीएम अनुनय झा निरीक्षण करने बीएसए कार्यालय गए तो उससे दो तीन दिन पहले ही कई महत्वपूर्ण पत्रावलियां बीएसए के घर पर भेज दी गई थीं जो अब तक वापस नहीं आईं।




खंड शिक्षा अधिकारियों के तबादला भत्ता से लेकर बकाया वेतन बिल तक मिले लंबित
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वित्तीय कार्यों को लेकर भी खूब मनमानी की जा रही थी। जांच टीम को इसके पुख्ता प्रमाण मिले हैं। चार खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन अलग-अलग वजहों से रोका गया था। बाद में यह वेतन जारी कर दिया जाता है लेकिन यहां वेतन बिल बनने के बाद भी पत्रावली को लंबित रखा गया। खंड शिक्षा अधिकारी प्रभावती, रतनलाल, अशोक कुमार, संतोष कुमार सिंह का बकाया वेतन अब भी जारी नहीं हुआ। संतोष कुमार सिंह का एनपीएस बिल भी लंबित है। इन लंबित बिलों की कुल राशि 5.80 लाख रुपये है। इसी तरह तबादला होने पर खंड शिक्षा अधिकारियों को तबादला भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता तैनाती के एक साल के अंदर मिल जाना चाहिए। यह पत्रावलियां भी लंबित मिलीं। लगभग तीन लाख रुपये के बिल लंबित मिले हैं। इनमें नौ खंड शिक्षा अधिकारियों के बिल शामिल हैं।





सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक की शिकायत पर भी हुई जांच

सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक मनोज कुमार ने भी डीएम से शिकायत की थी। इसमें बताया कि उनकी पेंशन पत्रावली बनाने के नाम पर 20 हजार रुपये मांगे गए। इसी बिंदु पर डीएम ने सबसे पहले जांच कमेटी बनाई थी। खास बात यह है कि मनोज कुमार की भी पत्रावली न तो बीएसए कार्यालय में मिली और न ही किसी लिपिक के पास। ऐसे में इस प्रकरण की जांच अभी पूरी नहीं हो पाई है।
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