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एक माह, एक मरीज... और खर्च एक लाख
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हरदोई। जिले के सरकारी अस्पतालों के हाल बेहद खराब हैं। कहीं तो संसाधनों का टोटा है, तो कहीं पर संसाधन होने के बावजूद काफी कम संख्या में मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला 100 शैया अस्पताल का भी है। यहां पर संसाधन मुहैया होने के बावजूद जमकर दुरुपयोग भी किया जा रहा है। यहां एक मरीज पर औसतन एक लाख रुपये हर माह खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों का जमघट नहीं लगता है।
कहने का मतलब यह है कि 100 शैया अस्पताल में जरूरत से ज्यादा संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है, या यूं कहें कि स्वास्थ्य विभाग महंगे संसाधनों का दुरुपयोग कर रहा है।
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सामान्य रोग से ग्रसित एक मरीज पर स्वास्थ्य महकमा एक माह में लगभग एक लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन पिछले लगभग सवा चार माह में यहां केवल दो हजार 717 मरीजों की ही भर्ती हुई है।
यानी औसतन एक दिन में 20 मरीज यहां भर्ती होते हैं। यहां पर स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के इलाज के लिए आठ डॉक्टर और चार टेक्नीशियन समेत स्वास्थ्य कर्मियों की भारी फौज तैनात कर रखी है।
खास बात यह है कि एक तरफ जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या के अनुपात में डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पा रहे और मरीजों व तीमारदारों को इलाज के लिए घंटों का इंतजार करना पड़ता है।
दूसरी तरफ ट्रामा सेंटर में संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। कोतवाली देहात के नयागांव स्थित शैया अस्पताल में आठ डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
इनमें मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अलावा एक फिजीशियन, तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक ईएनटी सर्जन, एक बेहोशी का विशेषज्ञ और एक डेंटिस्ट हैं। इसके अलावा दो एक्स-रे टेक्नीशियन, एक ईसीजी टेक्नीशियन और एक लैब टेक्नीशियन भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगाए गए हैं।
मरीजों की सहायता के लिए चार वार्ड ब्वाय की भी नियुक्ति है। इसके अलावा फार्मासिस्ट भी सेवाएं दे रहे, लेकिन मजेदार बात यह है कि यह सब जिन मरीजों के लिए हो रहा, उनकी संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक है।
सितंबर से शुरू हुए इस अस्पताल में पहले महीने में 384, अक्तूबर में 588, नवंबर में 706 और दिसंबर में 832 मरीज भर्ती हुए। जनवरी में 10 तारीख तक 207 मरीजों को भर्ती कराया गया था।
नए मरीजों को नहीं कर रहे भर्ती
कोविड सेंटर बनाए जाने के कारण नए मरीजों की भर्ती बंद कर दी गई थी।
मजेदार बात यह है कि अब तक यहां दो हजार 717 मरीजों की ही भर्ती हुई है।
इस लिहाज से प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों की औसत संख्या 20 है, जबकि विभाग प्रतिदिन एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत आठ डॉक्टर और चार तकनीशियनों के वेतन समेत लगभग 20 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च कर रहा है।
100 शैया अस्पताल में इन डॉक्टरों की तैनाती
डॉ. मनोज श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. प्रतीक नलवा, फिजीशियन, डॉ. अजय वर्मा, हड्डी रोग, डॉ. मुरलीधर, हड्डी रोग, डॉ. देवार्षि गुप्ता, हड्डी रोग, डॉ. प्रतीक पोडवाल, नाक, कान, गला (ईएनटी) सर्जन, डॉ. विनोद शाहनी, बेहोशी, डॉ. स्वाती, दांत रोग विशेषज्ञ।
कहीं सूखा तो कहीं आई बाढ़
एक ओर 100 शैया अस्पताल को जरूरत से कहीं ज्यादा संसाधन उपलब्ध करा दिए हैं, तो दूसरे ओर जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज ओपीडी पहुंचते हैं। मरीजों की संख्या के अनुपात में चिकित्सक कम पड़ते हैं। यही वजह है कि मरीज और उनके तीमारदार परामर्श और दवा के लिए कतारों में पूरा दिन निकाल देते हैं।
मरीज हैं नहीं, ड्यूटी कर रहे तीन डाक्टर
100 शैया अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी कम है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने यहां तीन आर्थोपैडिक डॉक्टरों को तैनात कर रखे हैं। डॉ. अजय वर्मा, डॉ. मुरलीधर और डॉ. देवार्षि गुप्ता तीनों ही आर्थोपैडिक डॉक्टर हैं।
सवाल यह है कि जिस सब्जेक्ट के मरीज सबसे कम हैं, उन्हीं के विशेषज्ञ सबसे ज्यादा तैनात क्यों किए गए हैं।
तो डाक्टरों को खुश करने को हुई तैनाती
स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ में 100 शैया अस्पताल में डॉक्टरों की बेवजह भर्ती को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं।
यहां के लोग यह भी कयास लगाने से पीछे नहीं हट रहे कि डॉक्टर्स को आराम देने के लिए विभाग के अधिकारियों ने उन्हें यहां तैनाती दी है, ताकि मरीजों की कम संख्या का फायदा उठाकर वह घर पर आराम कर सकें।
कोविड मरीजों के आने से बंद हुई ओपीडी
जनवरी माह में कोरोना वायरस के संक्रमण के 13 मरीजों के भर्ती होने से 100 शैया अस्पताल की ओपीडी बंद कर दी गई थी। केवल 10 जनवरी तक यहां पर सामान्य रोगों से ग्रसित मरीजों को भर्ती किया गया।
इसके बाद से ओपीडी की सेवाएं स्थगित हैं। 100 शैया अस्पताल में इलाज होने की जानकारी कम लोगों को है।
आसपास के ही कुछ मरीज यहां आते हैं। धीरे-धीरे लोगों को इसकी जानकारी हो रही थी और यहां मरीजों की संख्या भी बढ़ रही थी, लेकिन तीसरी लहर के प्रभाव ने फिर इस अस्पताल की उपयोगिता शून्य कर दी है।
कोविड के कारण ओपीडी बंद है। शासन से निर्देश मिलते ही ओपीडी में मरीजों की जांच और इलाज शुरू करा दिया जाएगा।
- मनोज श्रीवास्तव, सीएमएस, 100 शैया अस्पताल
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ऐसा ही एक मामला 100 शैया अस्पताल का भी है। यहां पर संसाधन मुहैया होने के बावजूद जमकर दुरुपयोग भी किया जा रहा है। यहां एक मरीज पर औसतन एक लाख रुपये हर माह खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों का जमघट नहीं लगता है।
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कहने का मतलब यह है कि 100 शैया अस्पताल में जरूरत से ज्यादा संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है, या यूं कहें कि स्वास्थ्य विभाग महंगे संसाधनों का दुरुपयोग कर रहा है।
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सामान्य रोग से ग्रसित एक मरीज पर स्वास्थ्य महकमा एक माह में लगभग एक लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन पिछले लगभग सवा चार माह में यहां केवल दो हजार 717 मरीजों की ही भर्ती हुई है।
यानी औसतन एक दिन में 20 मरीज यहां भर्ती होते हैं। यहां पर स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के इलाज के लिए आठ डॉक्टर और चार टेक्नीशियन समेत स्वास्थ्य कर्मियों की भारी फौज तैनात कर रखी है।
खास बात यह है कि एक तरफ जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या के अनुपात में डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पा रहे और मरीजों व तीमारदारों को इलाज के लिए घंटों का इंतजार करना पड़ता है।
दूसरी तरफ ट्रामा सेंटर में संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। कोतवाली देहात के नयागांव स्थित शैया अस्पताल में आठ डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
इनमें मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अलावा एक फिजीशियन, तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक ईएनटी सर्जन, एक बेहोशी का विशेषज्ञ और एक डेंटिस्ट हैं। इसके अलावा दो एक्स-रे टेक्नीशियन, एक ईसीजी टेक्नीशियन और एक लैब टेक्नीशियन भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगाए गए हैं।
मरीजों की सहायता के लिए चार वार्ड ब्वाय की भी नियुक्ति है। इसके अलावा फार्मासिस्ट भी सेवाएं दे रहे, लेकिन मजेदार बात यह है कि यह सब जिन मरीजों के लिए हो रहा, उनकी संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक है।
सितंबर से शुरू हुए इस अस्पताल में पहले महीने में 384, अक्तूबर में 588, नवंबर में 706 और दिसंबर में 832 मरीज भर्ती हुए। जनवरी में 10 तारीख तक 207 मरीजों को भर्ती कराया गया था।
नए मरीजों को नहीं कर रहे भर्ती
कोविड सेंटर बनाए जाने के कारण नए मरीजों की भर्ती बंद कर दी गई थी।
मजेदार बात यह है कि अब तक यहां दो हजार 717 मरीजों की ही भर्ती हुई है।
इस लिहाज से प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों की औसत संख्या 20 है, जबकि विभाग प्रतिदिन एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत आठ डॉक्टर और चार तकनीशियनों के वेतन समेत लगभग 20 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च कर रहा है।
100 शैया अस्पताल में इन डॉक्टरों की तैनाती
डॉ. मनोज श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. प्रतीक नलवा, फिजीशियन, डॉ. अजय वर्मा, हड्डी रोग, डॉ. मुरलीधर, हड्डी रोग, डॉ. देवार्षि गुप्ता, हड्डी रोग, डॉ. प्रतीक पोडवाल, नाक, कान, गला (ईएनटी) सर्जन, डॉ. विनोद शाहनी, बेहोशी, डॉ. स्वाती, दांत रोग विशेषज्ञ।
कहीं सूखा तो कहीं आई बाढ़
एक ओर 100 शैया अस्पताल को जरूरत से कहीं ज्यादा संसाधन उपलब्ध करा दिए हैं, तो दूसरे ओर जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज ओपीडी पहुंचते हैं। मरीजों की संख्या के अनुपात में चिकित्सक कम पड़ते हैं। यही वजह है कि मरीज और उनके तीमारदार परामर्श और दवा के लिए कतारों में पूरा दिन निकाल देते हैं।
मरीज हैं नहीं, ड्यूटी कर रहे तीन डाक्टर
100 शैया अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी कम है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने यहां तीन आर्थोपैडिक डॉक्टरों को तैनात कर रखे हैं। डॉ. अजय वर्मा, डॉ. मुरलीधर और डॉ. देवार्षि गुप्ता तीनों ही आर्थोपैडिक डॉक्टर हैं।
सवाल यह है कि जिस सब्जेक्ट के मरीज सबसे कम हैं, उन्हीं के विशेषज्ञ सबसे ज्यादा तैनात क्यों किए गए हैं।
तो डाक्टरों को खुश करने को हुई तैनाती
स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ में 100 शैया अस्पताल में डॉक्टरों की बेवजह भर्ती को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं।
यहां के लोग यह भी कयास लगाने से पीछे नहीं हट रहे कि डॉक्टर्स को आराम देने के लिए विभाग के अधिकारियों ने उन्हें यहां तैनाती दी है, ताकि मरीजों की कम संख्या का फायदा उठाकर वह घर पर आराम कर सकें।
कोविड मरीजों के आने से बंद हुई ओपीडी
जनवरी माह में कोरोना वायरस के संक्रमण के 13 मरीजों के भर्ती होने से 100 शैया अस्पताल की ओपीडी बंद कर दी गई थी। केवल 10 जनवरी तक यहां पर सामान्य रोगों से ग्रसित मरीजों को भर्ती किया गया।
इसके बाद से ओपीडी की सेवाएं स्थगित हैं। 100 शैया अस्पताल में इलाज होने की जानकारी कम लोगों को है।
आसपास के ही कुछ मरीज यहां आते हैं। धीरे-धीरे लोगों को इसकी जानकारी हो रही थी और यहां मरीजों की संख्या भी बढ़ रही थी, लेकिन तीसरी लहर के प्रभाव ने फिर इस अस्पताल की उपयोगिता शून्य कर दी है।
कोविड के कारण ओपीडी बंद है। शासन से निर्देश मिलते ही ओपीडी में मरीजों की जांच और इलाज शुरू करा दिया जाएगा।
- मनोज श्रीवास्तव, सीएमएस, 100 शैया अस्पताल